पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पशुओं की देखभाल और सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नए पशु आश्रय भवन (एसपीसीए) में जानवरों को शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पशु कल्याण को वीआईपी उद्घाटन के इंतजार में नहीं रखा जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सिर्फ रिबन काटकर उद्घाटन करने में हो रही देरी की वजह से काम नहीं रुकना चाहिए। कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने भरोसा दिलाया कि नए एसपीसीए भवन का कब्जा लेकर 10 दिन के अंदर सभी पशुओं को पुराने शेल्टर से वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई में इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब नजरें इस बात पर हैं कि नगर निगम तय समयसीमा में शिफ्टिंग और प्रबंधन व्यवस्था को किस तरह लागू करता है। ‘आक्रामक’ कुत्ते को पिंजरे में बंद रखने पर आपत्ति मामले की सुनवाई जस्टिस अलका सरीन की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मौजूदा शेल्टर में एक मादा कुत्ते ने कथित रूप से अपने ही पिल्ले को खा लिया। इस पर कोर्ट ने “आक्रामक” बताए जा रहे कुत्ते को लगातार पिंजरे में बंद रखने पर तीखी आपत्ति जताई। जस्टिस सरीन ने कहा कि केवल आक्रामक व्यवहार के आधार पर किसी पशु को कैद में रखना समाधान नहीं है। अदालत ने पूछा कि नियमित टहलाने और मानवीय प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। पीठ ने सवाल किया कि कुत्तों को एक-एक कर बाहर क्यों नहीं ले जाया जा सकता? जब कुत्ते के व्यवहार को “वैज्ञानिक आधार” से समझाने की कोशिश की गई, तो कोर्ट ने कहा कि यदि समस्या की आशंका थी तो पहले सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए। स्वयंसेवकों को मिलेगी अनुमति सुनवाई के दौरान पशु देखभाल और शिफ्टिंग में सहयोग देने को तैयार स्वयंसेवकों की सूची अदालत को सौंपी गई। नगर निगम ने बताया कि इन स्वयंसेवकों का विधिवत पंजीकरण कर पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, ताकि तय प्रक्रिया के तहत उन्हें प्रवेश मिल सके। कोर्ट ने पिल्लों को गोद देने की प्रक्रिया पर भी जानकारी मांगी। स्वयंसेवकों ने बताया कि इंटरनेट मीडिया के जरिए नियमित रूप से गोद दिलवाया जा रहा है। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा कि हाल में 18 सामुदायिक कुत्तों को गोद लेने के बाद दोबारा सड़कों पर छोड़ दिया गया।