चंडीगढ़ के गांव मलोया में पुलिसकर्मी बनकर लूट की वारदात को अंजाम देने वाली महिला को जिला अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी सीरत गिल को 7 साल कैद और 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। मामला अक्टूबर 2021 का है, जब सीरत गिल ने अपने साथी संदीप उर्फ खुर्मी के साथ मिलकर मलोया निवासी प्रियांशु के घर में लूट की थी। इस केस में संदीप को पहले ही पिछले साल 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। रात 3 बजे पुलिस बनकर पहुंचे थे आरोपी शिकायतकर्ता प्रियांशु के अनुसार, 4 अक्टूबर 2021 की रात करीब 3 बजे उनके घर की डोरबेल बजी। दरवाजा खोलने पर एक युवक और एक महिला खड़े थे, जिन्होंने खुद को पंचकूला पुलिस का अधिकारी बताया। दोनों ने कहा कि पंचकूला में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया है और उन्हें गिरफ्तार करने आए हैं। इसके बाद उन्होंने केस से नाम हटाने के नाम पर पैसे की मांग की। पिस्टल दिखाकर लूटे पैसे और मोबाइल जब प्रियांशु ने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपी युवक ने पिस्टल निकालकर उसे धमकाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर उसका पर्स छीन लिया, जिसमें 15 हजार रुपये और जरूरी दस्तावेज थे। आरोपियों ने उसका मोबाइल भी छीन लिया और मौके से फरार हो गए। वारदात के बाद से सीरत गिल फरार चल रही थी। पुलिस ने उसे 11 मार्च को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसके खिलाफ कोर्ट में केस चलाया गया। कोर्ट ने माना गंभीर अपराध सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि पुलिस बनकर लोगों को डराकर लूट करना समाज में भय पैदा करता है। ऐसे अपराधों पर सख्ती जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोषी महिला को 7 साल की सजा और जुर्माना सुनाया।