चंडीगढ़ में श्री हिंदू तख्त का निगम के बाहर प्रदर्शन:गोवंश मौत मामला, MOH-पाठक के सस्पेंशन पर अड़े, नहीं बुलाया जांच में शामिल होने

चंडीगढ़ के रायपुर कलां स्थित इंसीनरेटर प्लांट में 13 जनवरी को 40-50 गोवंश के शव मिलने के मामले में तैयार की गई मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट प्रशासक को सौंप दी गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद श्री हिंदू तख्त के पदाधिकारियों और समर्थकों ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन करते हुए जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के समर्थक मौके पर पहुंचे, जबकि स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया। और एमओएच डॉक्टर इंद्रदीप और पाठक को सस्पेंड करने की मांग करते रहे। श्री हिंदू तख्त के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक तिवारी ने नगर निगम अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में जांच एडीसी को दे दी गई और चार सदस्यीय कमेटी भी बना दी गई। इसके बावजूद उन्हें एक बार भी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया, जबकि इस मामले को सबसे पहले उन्होंने ही उठाया था। बोले- एमओएच और पाठक को करो सस्पेंड अशोक तिवारी ने कहा कि उनकी इस मुद्दे पर स्पेशल कमिश्नर प्रदीप कुमार से भी बात हुई थी। उन्होंने मांग की थी कि मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (एमओएच) डॉक्टर इंद्रदीप और पाठक को तुरंत सस्पेंड किया जाए। तिवारी ने आरोप लगाया कि जब तक इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की थी, लेकिन अभी तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और नगर निगम के अधिकारी इन्हें बचाने में लगे हुए हैं। रिपोर्ट में बड़े अधिकारियों को बचाया अशोक तिवारी ने आरोप लगाया कि मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के अनुसार इंसीनरेटर प्लांट में गोवंश के शवों का ढेर लगने के पीछे दो मुख्य वजह बताई गई हैं। पहली वजह यह रही कि प्लांट के चार में से एक-एक कर बर्नर खराब होते गए। प्लांट चलाने वाली कंपनी के इंजीनियर शुरुआत में कहते रहे कि बर्नर दो घंटे में ठीक हो जाएंगे, लेकिन बाद में बताया गया कि उन्हें लोकली ठीक करना संभव नहीं है, जिसके चलते काफी समय लग गया। तिवारी बोले, जिन अफसरों की जवाबदेही है, जिनके पास रोजाना रिपोर्ट जाती है और जिन्हें सब कुछ पता था, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि शहर के अलग-अलग इलाकों से गोवंश के शव प्लांट में लाए गए थे। जब प्लांट खराब था तो उन्हें दफनाने की तैयारी कर ली गई थी और दो-तीन गड्ढे भी खोद लिए गए थे, लेकिन दो कर्मचारियों के आपसी विवाद के कारण समय पर शवों को दफनाया नहीं जा सका। अगर उस समय प्लांट खराब था तो उसमें गोवंश को क्यों लाया गया, उसे ठीक होने तक बंद क्यों नहीं किया गया। क्या एमओएच और पाठक की जानकारी में यह सब कुछ नहीं था या फिर जानबूझकर अफसर अनजान बने रहे कि किसी को पता नहीं चलेगा। तिवारी बोले, होना भी ऐसा ही था, वह तो उन्हें पता चल गया और मामला तूल पकड़ गया, वरना यह सब कुछ अफसरों द्वारा दबा दिया जाता। सफाई व्यवस्था में खामियों को किया स्वीकार नगर निगम कमिश्नर (अतिरिक्त चार्ज) प्रदीप कुमार ने इस मामले में सफाई व्यवस्था में खामियां होने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि उस समय पर्याप्त डॉक्टरों और संसाधनों की कमी थी और नियमित मॉनिटरिंग में भी कोताही बरती गई। साथ ही ड्रेनेज नेटवर्क में कई जगह ब्लॉकेज थे, जिससे गंदा पानी रुक रहा था। सवालों से बचते नजर आए स्पेशल कमिश्नर वहीं जब चंडीगढ़ नगर निगम स्पेशल कमिश्नर प्रदीप कुमार से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की गई है और यह देखा जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी उस समय वहां थी या नहीं। इसके बाद जब उनसे सवाल किया गया कि प्लांट की सुपरविजन डॉक्टर इंद्रदीप के पास होती है और रोजाना रिपोर्ट भी जाती है, तो क्या उन्हें यह पता नहीं था कि वहां क्या हो रहा है। साथ ही यह भी पूछा गया कि पाठक की भी इस मामले में जिम्मेदारी थी। इस सवाल के बाद स्पेशल कमिश्नर ने कोई जवाब नहीं दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *