चंडीगढ़ में माउंटेड पुलिस विंग के तहत चल रहे पुलिस राइडिंग क्लब की ऑडिट जांच में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। 2021 से 2023 की जांच में पता चला कि ड्यूटी के लिए रखे गए सरकारी घोड़ों से आम लोगों और स्पेशल मेंबरों को निजी राइडिंग करवाई जा रही थी। साथ ही राइडिंग फीस के रूप में मिले 6 लाख 05 हजार 500 रुपए सरकारी खजाने में जमा कराने की बजाय एक बैंक खाते में रखे गए। मामले को लेकर विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन ऑडिट टीम को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 37 सरकारी घोड़े, निजी राइडिंग में उपयोग रिकॉर्ड के मुताबिक 2023 तक माउंटेड पुलिस विंग में 37 घोड़े सरकारी खर्च पर रखे गए हैं। नियमों के अनुसार, इन घोड़ों का इस्तेमाल अपराध नियंत्रण, गश्त और भीड़ संभालने जैसी पुलिस ड्यूटी के लिए होना चाहिए। लेकिन ऑडिट में सामने आया कि इन घोड़ों से आम लोगों और खास सदस्यों को राइडिंग सिखाई जा रही थी। इसके लिए तय फीस भी ली जा रही थी। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब पुलिस नियम 7.4 और 8 जुलाई 1987 के आदेश के अनुसार सरकारी घोड़ों का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी काम के लिए ही किया जा सकता है। आम लोगों को राइडिंग सिखाने या निजी काम के लिए इनका उपयोग करना नियमों के खिलाफ है। 6.05 लाख बैंक खाते में जमा, ट्रेजरी में नहीं जांच में पता चला कि 1 जनवरी 2022 को एक निजी बैंक में चालू खाता खोला गया था, जिसमें राइडिंग की फीस जमा की जा रही थी। नियमों के अनुसार, सरकारी मद में मिली कोई भी रकम सीधे ट्रेजरी में जमा होनी चाहिए। इसलिए बैंक खाते में पैसा रखना नियमों के खिलाफ माना गया है। जांच में यह भी सामने आया कि इन लेन-देन की नियमित कैश बुक नहीं रखी गई। 1 जनवरी 2022 से पहले का पूरा रिकॉर्ड भी ऑडिट टीम को नहीं दिया गया। इससे पैसों के लेन-देन को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ गए हैं। ऑडिट आपत्तियां, जांच के आदेश ऑडिट रिपोर्ट में कुल आपत्तियां दर्ज की गई हैं। मामले पर आईजी पुषिंदर कुमार ने कहा कि सभी आपत्तियों की जांच कराई जाएगी। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी सामान और पैसों के लेन-देन में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। किसी भी तरह की गड़बड़ी या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।