चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कॉमर्शियल यूनिट का कब्जा समय पर न देने पर नोएडा और चंडीगढ़ स्थित डब्ल्यू-टीसी डिवेलपमेंट कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में लापरवाही का दोषी मानते हुए कड़ा आदेश जारी किया है। आयोग ने कम्पनी पर 30 हजार रुपए हर्जाना लगाया है और शिकायतकर्ता दंपती से लिए गए 18.90 लाख रुपए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के उन फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें स्पष्ट कहा गया है कि प्रोजेक्ट में देरी और कब्जा न देने पर उपभोक्ता को रिफंड देने से इनकार नहीं किया जा सकता। कंपनी ने जवाब में कहा कि कोविड-19 के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। इसलिए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रेरा से 30 जून 2024 तक विस्तार मांगा गया है, और ऐसे में शिकायत को खारिज किया जाना चाहिए। तय समय तक न यूनिट पूरा हुआ न कब्जा मिला सैक्टर-42बी के रहने वाले दंपती भगवान और मधु जिंदल ने आयोग में शिकायत दी थी कि उन्होंने मोहाली के एरो सिटी में बन रहे डब्ल्यू-टीसी टावर-ए की 12वीं मंजिल पर कॉमर्शियल यूनिट लेने के लिए 12–17 सितम्बर 2020 को कम्पनी के साथ समझौता किया था। यूनिट की कुल कीमत 37 लाख 53 हजार 161 रुपए तय हुई थी, जिसमें से 18.90 लाख रुपए कम्पनी को अदा कर दिए गए थे। समझौते के अनुसार कम्पनी को 31 दिसम्बर 2022 तक यूनिट का कब्जा देना था, पर न तो यूनिट पूरा हुआ और न ही कब्जा दिया गया। कई बार रिफंड मांगा गया लेकिन कम्पनी ने लौटा देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिकायत आयोग में दायर की गई। प्रोजेक्ट 30 जून 2023 तक पूरा होना चाहिए था आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि कोविड की वजह से 6 माह की ढील मान भी ली जाए, तो भी प्रोजेक्ट 30 जून 2023 तक पूरा हो सकता था। कम्पनी ने रेरा में विस्तार के आवेदन का कोई प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं रखा। आज तक भी निर्माण पूरा नहीं हुआ और न ही शिकायतकर्ता को कब्जा दिया गया। आयोग ने कहा कि यह साफ तौर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। इसलिए कम्पनी को न केवल 18.90 लाख रुपए और उसका ब्याज वापस करना होगा, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के लिए 30 हजार रुपए हर्जाना भी चुकाना होगा।