चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पेड़ गिरने से हुई दर्दनाक घटना पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि अपील लंबित होने का बहाना बनाकर राहत देने में देरी नहीं की जा सकती। डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि मृत छात्रा के पिता को 1 करोड़ रुपये और गंभीर रूप से घायल छात्रा, जिसका हादसे में हाथ कट गया था, को 50 लाख रुपये का मुआवजा तुरंत दिया जाए। हालांकि यह भुगतान मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। कोर्ट ने यूटी प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाना जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हादसे को “ईश्वर की मर्जी” बताकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। पहले भी दिया था मुआवजे का आदेश हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2025 को अपने आदेश में यह मुआवजा तय किया था, लेकिन अब तक इसका भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने अवमानना याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोबारा सख्त निर्देश जारी किए। मामले की जांच रिपोर्ट में इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही सामने आई थी। अदालत ने कहा कि प्रशासन ने जांच कमेटी की कई सिफारिशें लागू कीं, लेकिन मुआवजा देने के निर्देश को नजरअंदाज कर दिया, जो गंभीर बात है। घायल छात्रा की हालत गंभीर अदालत ने घायल छात्रा की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 15 वर्षीय बच्ची को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा और कई सर्जरी से गुजरना पड़ा। अब वह रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर है, जिससे उसके भविष्य पर गहरा असर पड़ा है। कोर्ट ने प्रशासन की अपील पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 मई तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को राहत देना प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।