चंडीगढ़ 85 करोड़ घोटाला;पीडी व अकाउंटेंट को जेल:बैंक मैनेजर समेत 3 को भेजा अंबाला जेल,118 करोड़ फेक एफडी मामले में नया खुलासा

चंडीगढ़ में क्रेस्ट से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले मामले में शुक्रवार को अहम कार्रवाई हुई। पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीडी) सुखविंदर और उसके साथ गिरफ्तार अकाउंटेंट को चंडीगढ़ जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अदालत में पेश करने से पहले पुलिस ने सुखविंदर के सेक्टर-28 स्थित आवास पर सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन वहां से कोई खास बरामदगी नहीं हो सकी। पूछताछ के दौरान भी पुलिस आरोपियों से गबन से जुड़ी कोई नकदी बरामद नहीं कर पाई है। बैंक मैनेजर समेत 3 आरोपी अंबाला जेल भेजा आईडीएफसी बैंक के मैनेजर रिभव ऋषि, सीमा धीमान और अभय को भी अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में अंबाला जेल भेज दिया गया। ये तीनों आरोपी पहले से अंबाला जेल में बंद थे और यूटी पुलिस इन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लाई थी, इसलिए दोबारा वहीं भेज दिया गया। 118 करोड़ फेक एफडी मामले में नया खुलासा उधर नगर निगम से जुड़े 118 करोड़ रुपये की फेक एफडी मामले में गिरफ्तार स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की सीएफओ नलिनी को लेकर भी जांच में अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फेक एफडी, फर्जी ट्रांसफर और फेक अकाउंट स्टेटमेंट में कहीं भी नलिनी के हस्ताक्षर नहीं मिले हैं। बताया जा रहा है कि 8 करोड़ रुपये की फेक कंपनी की एंट्री भी नलिनी के कार्यकाल के बाद की है, जिसमें भी उनके सिग्नेचर नहीं पाए गए। हालांकि पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि 2 लाख रुपये शेल कंपनी के खाते से उनके खाते में ट्रांसफर हुए थे, जबकि आरोपी रिभव ऋषि ने बयान दिया है कि उसने 50 करोड़ रुपये नकद नलिनी को दिए थे। वकील ने आरोपों को बताया निराधार रिभव ऋषि के वकील दीपांशु बंसल ने पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सभी आरोप मनगढ़ंत और तथ्यों से परे हैं तथा आरोपी को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वकील का कहना है कि पूरे मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, न ही आरोपी के पास से कोई बरामदगी हुई है, जिससे उसकी संलिप्तता साबित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कथित गड़बड़ियां वित्तीय रिकॉर्ड और एफडीआर के प्रबंधन से जुड़ी हैं, जिसकी जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के पास थी।

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