चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट-AGTF और इंटेलिजेंस ने की पूछताछ:कई थे निशाने पर, पैसों के खातिर की वारदात,हैंडलर्स बोला दूसरे के खाते में पैसे डलवाना

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपी अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह के अलावा वारदात में साथ देने वाले 5 आरोपी बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा से पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों के निशाने पर पंजाब के और भी कई लोग थे। लेकिन आरोपियों ने अभी तक यह नहीं बताया कि वे कौन-कौन हैं। सोमवार को पूरे दिन पूछताछ होती रही। सोमवार सुबह ही पंजाब AGTF और इंटेलिजेंस की टीम पूछताछ करने के लिए मोहाली स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल में पहुंच गई थी। अब इस मामले में खुलासा हुआ है कि आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए जो 2 लाख रुपए की डील हुई थी, वह रकम बैंक अकाउंट में डलवाने के लिए मुख्य आरोपी अपने किसी करीबी को मना रहे थे, लेकिन किसी ने हां नहीं की। क्योंकि पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर्स ने आरोपियों को कहा था कि पैसे अपने खाते में मत डलवाना, किसी और के खाते में डलवाना, क्योंकि अपने खाते में डलवाने से फंसने का ज्यादा खतरा है। SP बिक्रम बराड़ ने खुद की पूछताछ सूत्रों से पता चला है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट AGTF के SP बिक्रम बराड़ खुद पूछताछ करने के लिए पहुंचे थे, जहां उन्होंने मुख्य दोनों आरोपी अमनप्रीत और गुरतेज से कई घंटों तक पूछताछ की और इस दौरान उन्होंने कई सवाल पूछे। अभी तक की जांच में सामने आया है कि दोनों गरीब परिवार से हैं और जुर्म की दुनिया में वे पैसों के खातिर आए। आरोपियों के निशाने पर पंजाब के और भी लोग थे, क्योंकि आरोपियों के पास दो ग्रेनेड थे और एक पिस्टल, जिससे साफ पता चलता है कि उन्होंने कहीं और भी वारदात को अंजाम देना था। लेकिन आरोपियों को खुद नहीं पता था कि उनका अगला टारगेट क्या था, क्योंकि उन्हें विदेश में बैठे हैंडलर्स सिर्फ फोन करते थे और आगे क्या करना है उसका आदेश देते थे। अभी तक इन्हें चंडीगढ़ स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय में ब्लास्ट करने का टारगेट दिया गया था। दोनों के फोन थे सर्विलांस पर पता चला कि जिस समय पंजाब पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए उनके गांव रतनगढ़ में रेड करने गई थी, उससे पहले पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा रखे थे। उसी दौरान पुलिस को पता चला था कि आरोपी अमनप्रीत के घर में रखे ट्रंक के अंदर एक पीला लिफाफा पड़ा है। क्योंकि पंजाब पुलिस से पहले अमनप्रीत के घर पर चंडीगढ़ पुलिस पहुंच गई थी, लेकिन उन्हें ट्रंक के बारे में नहीं पता था। पीले लिफाफे के अंदर से पुलिस ने कारतूस व ग्रेनेड से संबंधित संदिग्ध सामान बरामद किया था। और उसी दौरान पुलिस को और भी कई सुराग फोन के जरिए मिले कि आरोपियों ने चंडीगढ़ में ब्लास्ट करने के बाद कहां-कहां और किस-किस से बात की। अब पुलिस उन सभी की भी तलाश कर रही है। ये कैसा ज्वाइंट ऑपरेशन पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई फॉयरिंग में पंजाब पुलिस ने जस्सी नाम के शूटर को दबोचा। इसमें बताया गया कि जॉइंट ऑपरेशन में चंडीगढ़ पुलिस का डीसीसी स्टॉफ भी साथ था। अब पंजाब बीजेपी भवन में ग्रनेड फेंकने वालों के जो पांच मददगार पकड़े। उसमें भी कहा गया कि जॉइंट ऑपरेशन में चंडीगढ़ पुलिस साथ थी। जबकि असलियत की तस्वीर निराली है। प्रेसकॉन्फ्रेंस की तस्वीर से यूटी पुलिस गायब है। जब पीयू के शूटर्स को पकड़ा,तो बाइट में तस्वीर पंजाब के अफसरों की थी। मौके पर तस्वीरें भी पंजाब पुलिस के जवानों की थी। कहीं भी यूटी पुलिस दिखाई नहीं दी। जो पिस्टल,हथियार,मोटरसाइकिल बरामद हुई वह भी पंजाब पुलिस के पास ही है। बस प्रेस नोट में ही चंडीगढ़ पुलिस मौजूद है,मौके पर नहीं। वहीं अब बीजेपी पंजाब के हेडक्वार्टर पर ग्रनेड फेंकने के मामले में भी पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ही बाइट देते दिखे। चंडीगढ़ पुलिस का कोई अफसर मौजूद नहीं रहा। ग्रनेड,पिस्टल और अन्य हथियार भी जो बरामद हुए। वह भी पंजाब पुलिस के पास है और पांचों आरोपी भी। यहां भी बस मात्र प्रेस नोट में चंडीगढ़ पुलिस की मौजूदगी दर्ज है। रॉकेट लॉन्चर से आतंकी हमले हैंड ग्रेनेड तक पहुंचे रॉकेट लॉन्चर से आतंकी हमले शुरू होकर हैंड ग्रेनेड तक पहुंच चुके हैं। सेक्टर-10 में फेंके गए बम से हमले पंजाब बीजेपी ऑफिस तक पहुंच गए हैं, जबकि चंडीगढ़ पुलिस जस की तस ही है। जी हां, चंडीगढ़ पुलिस पिछले कई सालों से अब तक ऐसा एक भी ऑपरेशन नहीं कर पाई है, जिसमें उसने खुद अपने बलबूते आतंकियों को दबोचा हो या गैंगस्टरों द्वारा की गई टारगेट किलिंग को खुद सुलझाया हो। हां, इतना जरूर है कि अपनी साख का डैमेज कंट्रोल करने के लिए अब यूटी पुलिस पंजाब पुलिस की छत्रछाया में चली गई है, यानी रहमोकरम पर। इसलिए अब पिछली तीन वारदातों में ज्वाइंट ऑपरेशन का नाम दिया गया है। चंडीगढ़ प्रशासक हुए थे खफा… दरअसल सेक्टर 9 में हुए चमप्रीत नागरा उर्फ चिनी कुबाहेड़ी की दिनदिहाड़े हुई हत्या के बाद चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद वे और खफा तब हुए, जब चंडीगढ़ पुलिस खाली हाथ थी और पंजाब पुलिस ने चिनी कुबाहेड़ी के शूटर्स हरियाणा से दबोच लिए। इसके बाद आनन फानन में एंटी गैंगस्टर टॉस्क फोर्स तो बनाई, लेकिन अभी तक इसकी नोटीफिकेशन नहीं की गई है। इसके बाद दो बड़ी वारदातें पंजाब पुलिस ने सुलझाई, इसमें जॉइंट ऑपरेशन चंडीगढ़ पुलिस का दिखाया। वह भी एसएसपी यूटी कंवरदीप कौर के अधीन की टीम का। जोकि खुद पंजाब से डेपुटेशन पर हैं। इसको लेकर विभाग में कई तरह की चर्चा भी है। पंजाब डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि इनकी 6 महीने पहले मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई। इसमें अटैक का 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था। इसके लिए इन्हें 2 लाख रुपए देने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के तार पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की पंजाब में अफरातफरी फैलाने की कोशिश थी। डीजीपी ने ये बड़ी बातें कहीं… सोशल मीडिया पर दोनों की मुलाकात हुई: डीजीपी ने बताया कि आरोपियों को हरियाणा एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया। दोनों आरोपियों को रेवाड़ी से काबू किया गया। करीब 6 महीने पहले इनकी मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था: उन्होंने कहा कि 28 मार्च को गुरतेज को टास्क दिया गया था कि वह बलाचौर से ग्रेनेड और हथियार लेकर आए। इसके बाद वह रूबल और मंदीप शर्मा को साथ लेकर जसबीर जस्सी से मिला, जहां उन्हें दो ग्रेनेड, एक पिस्टल और 10 कारतूस दिए गए। बलजोत सिंह ने गुरतेज को रेकी करने और टारगेट की पहचान की जिम्मेदारी दी थी। वहीं, अमनप्रीत की भर्ती भी गुरतेज ने ही की थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल: डीजीपी के मुताबिक, दोनों मुख्य आरोपी रैपिडो में काम करते थे। घटना वाले दिन जब अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, तो गुरतेज ने उसकी वीडियो बनाई थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल था, जो इनसे वीडियो बनवाकर एक तरह का माहौल (परसेप्शन) तैयार करना चाहता था। उसने इन्हें ऑनलाइन ही निर्देश दिए और यह भी बताया कि ग्रेनेड को कैसे एक्टिव करना है। आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई: इस काम के लिए आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई थी, लेकिन यह रकम पूरी नहीं दी गई थी। पूरा ऑपरेशन तकनीकी माध्यमों और दूर बैठे हैंडलर के निर्देशों के आधार पर चलाया गया। पाकिस्तान-ISI से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा: DGP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ था। इस नेटवर्क को विदेश में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई लोग जुड़े हुए थे और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों के पास हैंड ग्रेनेड, हथियार और कारतूसों की खेप पहुंचाई गई थी। यह खेप कई लोगों के जरिए आगे बढ़ाई गई और आखिर में हमले को अंजाम देने वालों तक पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि पुर्तगाल में बैठे हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत के निर्देश पर पूरे हमले की साजिश रची गई और उसे अंजाम दिया गया। पाकिस्तानी ग्रेनेड के यूज होने का दावा: इससे पहले इस मामले में सूत्रों से पता चला था कि हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं, इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। हमले के बाद 2 नए वीडियो भी सामने आए थे। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दिए। वहीं, दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं।

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