पंजाब की पटियाला पुलिस की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग जिला परिषद व ब्लॉक समिति चुनाव से पहले वायरल हुई थी। इस मामले की आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। साथ ही साफ किया कि इस वायरल ऑडियो की जांच CFSL (केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) चंडीगढ़ में होगी। साथ ही पुलिस को इस मामले में एक्शन करना होगा। हालांकि इससे पहले अकाली दल ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाए थे। अकाली दल ने कहा था कि पुलिस ने इसे फेक करार दे दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने किस लैब या एजेंसी से इसकी जांच कराई है। बता दें कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने एक कॉल रिकॉर्डिंग अपने अकाउंट से पोस्ट की थी। सुखबीर बादल ने दावा किया था कि यह कॉल रिकॉर्डिंग पटियाला पुलिस की कॉन्फ्रेंस कॉल पर हुई मीटिंग की है, जिसमें पटियाला के SSP वरुण शर्मा DSP को अकाली उम्मीदवारों के साथ नामांकन के वक्त धक्केशाही करने के लिए कह रहे हैं। रिकॉर्डिंग में SSP पुलिस अधिकारियों से कहते हुए सुने जा रहे हैं कि नामांकन पत्र छीनना, फाड़ना या जो भी करना हो, उम्मीदवारों के घर, गांव या रास्ते में करो। नामांकन केंद्रों में इस तरह की कोई हरकत नहीं होनी चाहिए। हालांकि उस समय पटियाला पुलिस ने इसे AI से बनाया गया फेक वीडियो कहकर खारिज कर दिया था। अब पढ़िए, वायरल की गई वीडियो में क्या बातचीत हुई… एक अधिकारी: जहां कहीं भी अकाली मिलें, उनके नामांकन पत्र फाड़ दें। दूसरा अधिकारी: आज पुलिस ऑब्जर्वर आए थे। उसके बाद हम डिविजनल कमिश्नर के पास गए। DIG, DC भी थे और मैं भी वहीं था, और 2 एसपी भी मेरे साथ थे। प्रशासन बल प्रयोग पर रोक नहीं लगाता। वे स्पष्ट हैं कि स्थानीय निकायों में ऐसा होना ही चाहिए, लेकिन उनकी नीति यह है कि जिसे निशाना बनाना है, रोकना है, उसे बाहर से ही रोक लिया जाए। उसके गांव, घर या रास्ते में ही रोक लिया जाए। नामांकन दाखिल केंद्र पर पहुंचकर कागज न फाड़े जाएं। कल हमारे लिए सबसे संवेदनशील दिन है क्योंकि सुखबीर सिंह बादल खुद घनौर आ सकते हैं। तीसरा अधिकारी: हम राजनीतिक नेतृत्व से निर्देश ले रहे हैं। दूसरा अधिकारी (फिर से): नीति यह है कि जिसे भी पर्चा दाखिल करने से रोकना है, उसे गांव में रोको, घर पर रोको या रास्ते में रोको। जिस तरह से चुनावों के दौरान सेंटरों के अंदर एमसी ने कागज फाड़े, वह नहीं होना चाहिए। सब कुछ बाहर से ही होना चाहिए। चौथा अधिकारी: हम विधायक साहब और उनकी टीम के संपर्क में हैं… सब कुछ इसी तरह से प्लान किया गया है। पांचवां अधिकारी: हम विधायक साहब के आदमियों को सुबह 9 बजे का समय देंगे और उनसे पहले अपना पर्चा दाखिल करवाएंगे। दूसरा अधिकारी (फिर से): निजी तौर पर या खुद हमें जो भी पाबंदियां लगानी हैं, वे बाहर से लगानी होंगी। विधायक को भी बताएं, जिस व्यक्ति पर पाबंदी लगानी है, उसे गांव में या घर पर ही लगाने को कहें। सबकी निगाहें आप पर हैं, लेकिन जो भी धक्का-मुक्की करनी है, गांव में करो, घर पर करो या रास्ते में करो। कल आपके सुखबीर बादल भी आएंगे। सबको पता है कि नामांकन रोक दिए जाएंगे और खारिज कर दिए जाएंगे। किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं, मैं किसी भी शिकायत की सकारात्मक रिपोर्ट बनाऊंगा। अगर कागज छीनने हैं तो 5 किलोमीटर पहले छीने जाएं। अगर कोई अंदर घुसने की हिम्मत करता है तो आरओ उसका नामांकन रद्द करें। चलो, कोई बात नहीं, हिम्मत रखो और निर्देशानुसार काम करो। पटियाला पुलिस ने दावे को खारिज किया था पटियाला पुलिस ने सुखबीर बादल के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह वीडियो फेक है और AI के जरिए बनाई गई है। पुलिस के मुताबिक, इससे लोगों को गुमराह किया जा रहा है और इसे वायरल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के इस दावे पर अभी तक सुखबीर बादल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे यह पता चल सके कि पुलिस द्वारा फेक बताए जाने के बाद इसे सच साबित करने के लिए उनके पास क्या सबूत हैं। वहीं, बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान विदेश में हैं और आम आदमी पार्टी पंजाब में अपने प्रभारी मनीष सिसोदिया की साम, दाम, दंड, भेद की नीति पर चलकर चुनाव चोरी कर रही है।