आज फाल्गुन शुक्ल का एकादशी व्रत है। इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत आर्द्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग में मनाई जाएगी। यह एकादशी सबसे खास महत्व रखता है, क्योंकि सामान्यतः एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा होती है, लेकिन इस रंगभरी एकादशी में महादेव की भी आराधना की जाती है। आज भगवान शिव को बेलपत्र, भांग के साथ अबीर-गुलाल से श्रृंगार होगा। इस दिन स्नान-दान व धर्म कृत्य करने से अक्षय पुण्य मिलता है। चार शुभ योग में रंगभरी एकादशी ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, रंगभरी एकादशी पर चार शुभ योग का संयोग बन रहा है। आज श्रीहरि विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना होगी। शालिग्राम की पूजा, उन पर आंवला का अर्पण, आंवला के पेड़ की पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम, पुरुष सूक्त का पाठ, वेद मंत्रों का जाप फिर घी के दीपक और कर्पूर से आरती होगी। रंगभरी एकादशी की पौराणिक कथा फाल्गुन शुक्ल एकादशी को भगवान शंकर ने माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आये थे। इस पावन अवसर पर शिव के गणों और ऋषि-मुनियों ने अपार प्रसन्न होते हुए अबीर-गुलाल उड़ाकर उनका स्वागत किया था। इसलिए इस दिन काशी में विश्वनाथ भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत करते है। आमलकी एकादशी में आंवला की महिमा आज फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी भी कहते हैं, जिसका महत्व अक्षय नवमी के समान ही है। आचार्य राकेश झा ने कहा कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का खास विधान है, क्योंकि इसी दिन सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले आंवला वृक्ष की उत्पति हुई थी। जो भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय है। इस पेड़ के मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, तना में रूद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में समस्त प्रजापति वास करते है I रंगभरी एकादशी की पूजा मुहूर्त चर-लाभ मुहूर्त: प्रातः 06:16 बजे से 09:09 बजे तक अमृत मुहूर्त: सुबह 09:09 बजे से 10:36 बजे तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:39 बजे से 12:25 बजे तक शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 01:29 बजे तक प्रदोष मुहूर्त: शाम 05:49 बजे से रात्रि 08:26 बजे तक