यूपी के बरेली में दो दिन पहले हुई जज की भतीजी की हत्या के मामले में पुलिस ने पति और सास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जबकि ससुर, देवर और ननद समेत अन्य आरोपी फरार हैं। ऑटोमैटिक कार के लिए दहेज लोभियों ने महजबीन की गला दबाकर हत्या कर दी थी। शादी और मौत की तारीख एक
बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के शाहबाद निवासी मोहम्मद तलहा पुत्र मेंहदी हसन से महजबीन की इसी साल 27 फरवरी 2025 को शादी हुई थी। ठीक उसी तारीख पर 9 महीने बाद 27 नवंबर को महजबीन को उसके पति ने मौत के घाट उतार दिया। 27 नवंबर की रात महजबीन का पति मोहम्मद तलहा उसे अस्पताल लेकर पहुंचा जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। गले पर थे चोट के निशान
महजबीन के गले पर चोट के निशान थे और मुंह से झाग निकल रहे थे। उसकी आंखें खुली हुई थीं। महजबीन के मायके वालों को जैसे ही इस बात की खबर लगी तो परिवार में हड़कंप मच गया। मायके वाले अस्पताल पहुंचे जहां पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। मौके पर पहुंची प्रेमनगर थाने की पुलिस ने पति और सास-ससुर को पकड़ लिया। लेकिन ससुर मौके का फायदा उठाकर भाग गया। पुलिस ने शनिवार को मोहम्मद तलहा और उसकी मां आसमां सकलैनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। दहेज की डिमांड और लगातार ताने
महजबीन के चाचा वकील अच्छन अंसारी ने बताया कि शादी के कुछ दिनों बाद ही ससुराल वाले इसे ताने देते थे कि तुम्हारे चाचा बड़े नेता हैं, बड़े वकील हैं। दूसरे चाचा जज हैं फिर भी उन्होंने ऑटोमैटिक कार नहीं दी। महजबीन की सास कहती थी कि हमारे पास बहुत बड़े घरों से रिश्ते आ रहे थे, वो लोग दहेज में काफी पैसा खर्च करने को तैयार थे, लेकिन मुझे क्या पता था जिस घर में हम अपने बेटे की शादी कर रहे हैं, वो लोग कंजूस निकलेंगे। हम लोग कई बार महजबीन की ससुराल गए और ससुराल वालों को समझाया, लेकिन उसके बावजूद ससुराल वालों ने मेरी भतीजी का मर्डर कर दिया। अब पढ़िए माँ ने क्या कहा महजबीन की मां नसीमा बानो ने बताया कि मेरी बेटी जज बनना चाहती थी, मगर उसको मार डाला। वो कहते थे कि ऑटोमैटिक कार चाहिए। वैगनआर कार देने की हमारी कूवत थी। 23 नवंबर को आखिरी बार बेटी का कॉल आया, वो बहुत परेशान थी, बार-बार यहीं कहती रही कि इन लोगों को कार दे दो, तभी मेरा घर बचेगा। ये सब कहते हुए महजबीन की मां नसीमा बानो रोने लगती हैं। वह कहती हैं- हमें लगा कि बेटी के घर में हालात जल्द ही नार्मल हो जाएंगे। ये नहीं सोचा था कि हालात उनकी जान जाने तक पहुंच जाएंगे। बेटी की परवरिश बहुत नाजो से की थी। वो पढ़ने में बहुत इंटेलिजेंट थी, LLM की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी। कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही थी। उसकी पढ़ाई छुड़वाकर शौहर डॉ. तलहा कहते कि तुम मेडिकल की पढ़ाई करो। तुम्हें डॉक्टर बनना चाहिए। क्या मेरी बच्ची को ऐसी मौत मिलनी चाहिए थी कि मेडिनोवा हॉस्पिटल (पीलीभीत रोड) की पार्किंग में कार के अंदर उसकी लाश मिली। पति, सास-ससुर वहीं खड़े रहे, पुलिस कहती है कि बेटी की मौत फंदे पर लटकने से हुई है। मगर उसको उस हाल तक पहुंचाने के जिम्मेदार कौन हैं? इस मोहल्ले में डॉ. हाशिम अंसारी का घर सब लोग जानते हैं। डॉ. अंसारी एक क्लिनिक भी चलाते हैं। उनका घर सफेद रंग का दो मंजिला था। गेट पर लिखा था- अच्छन अंसारी एडवोकेट, प्रदेश उपाध्यक्ष आजाद समाज पार्टी। अच्छन महजबीन के सगे चाचा हैं। लोगों ने बताया कि लड़की के एक चाचा असगर अली बरेली कोर्ट में ADJ हैं, घर के बाहर काफी बड़ी खुली जगह है, इसमें 3 कार खड़ी थीं। एक कोने से टेंट लगा हुआ था। यहां लोग बैठे थे और महजबीन की मौत को लेकर ही चर्चा कर रहे थे। लोगों ने बताया कि महजबीन की शादी 27 फरवरी, 2025 को प्रेमनगर के शाहाबाद में रहने वाले डॉक्टर तलहा से हुई थी। तलहा रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में MBBS के फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा है। गेट पर कुछ इस तरह से पेंट से लिखा गया था। इससे परिवार के रसूख का पता चलता है।
शौहर का परिवार कहता- जज बनकर क्या करेगी, डॉक्टर बनाएंगे
घर के अंदर पहुंचने पर एक कमरे में महिलाएं बैठी दिखीं। यही पर महजबीन के चाचा अच्छन अंसारी भी मिले। हमने पूछा- बेटी के बारे में कुछ बताइए? वह कहते हैं- महजबीन पढ़ने में बहुत तेज थी। LLM फर्स्ट ईयर पूरा कर चुकी थी, लेकिन शादी के बाद उसकी पढ़ाई भी छुड़वा दी गई। कहने लगे डॉक्टर बना देंगे, जबकि वो जज बनना चाहती थी। जब हमने इस बारे में परिवार से बात की। तब उन्होंने कहा- उसके चाचा जज है, इसलिए वो भी जज बनना चाहती थी। इसमें क्या खास बात है। चाचा ने कहा- हमने शादी बहुत धूमधाम से की थी, जो भी मांगते थे, पूरा कर देते थे। कार भी दी, लेकिन इन लोगों को ऑटोमैटिक कार चाहिए थी। हमने जो कार दी, वो मैन्युअल थी। बेटी फोन पर बताती थी कि घर में इस बात पर रोज टेंशन होती है, 9 ही महीने पहले तो शादी हुई थी। मां नसीमा कहती हैं- मुझे ये नहीं पता चला कि वो लोग उसको मार देंगे, वरना विदा कराकर यहां ले आते।
हम वकील, रोज दहेज के केस लड़ते हैं, आज अपने पर बीत रही है
चाचा ने कहा- हम पेशे से वकील हैं, रोज दहेज के मामलों में ऐसे लोगों की लड़ाई लड़ते हैं, जिन्हें जानते तक नहीं। कभी ये सोचा नहीं था कि अपनी ही बेटी के लिए न्याय मांगना पड़ेगा। लोग कहते थे कि दहेज हत्या के केस बनावटी होते हैं, लेकिन हमारे साथ जो हुआ, उसके बाद समझ आया कि कई परिवार सच में बहुत कुछ सहते हैं। यह कोई हादसा नहीं है, साफ-साफ हत्या है। केस उसी हिसाब से चलना चाहिए। डॉक्टर के परिवार के सदस्यों को उम्रकैद या कम से कम फांसी की सजा होनी चाहिए। कोर्ट को इस केस के जरिए एक नजीर पेश करनी चाहिए। चाचा अच्छन कहते हैं- डॉक्टर ने कहा था कि ये नार्मल डेथ का केस नहीं है।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर बोले- गले पर निशान मिले
परिवार का दर्द साझा करने के बाद हमने बरेली पोस्टमॉर्टम हाउस में महजबीन की लाश की जांच करने वाले डॉक्टर से संपर्क किया। पूछा- मौत कैसे हुई? उन्होंने कहा- महजबीन के गले पर निशान बने हुए थे। ये फंदे पर लटकने की वजह से हुए होंगे। उसके गले की हड्डी टूटी नहीं थी। हैंगिंग की वजह से मौत हुई थी। शरीर पर चोट के निशान नहीं थे। क्या उसको कोई नशीला पदार्थ दिया गया होगा, ये जानने के लिए विसरा को सुरक्षित किया गया है। महिला के साथ क्रूरता, दहेज हत्या की FIR
पुलिस ने इस केस में दहेज हत्या, महिला के साथ क्रूरता करना और दहेज अधिनियम में केस दर्ज किया है। प्रेमनगर थाने में पति डॉ. मोहम्मद तलहा, देवर डॉ. मोहम्मद हमजा, मोहम्मद जैद, ससुर डॉ. मेंहदी हसन, सास आसमा, ननद उजमा, ननद चमन और ननदोई फैजान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस केस की जांच CO सिटी आशुतोष शिवम कर रहे हैं। वह कहते हैं- पति और सास को मौके से हिरासत में लिया गया था, जबकि बाकी लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। घर की परिस्थितियां भी देखी गई, जिस कमरे में बॉडी लटकी मिली थी। वहां स्ट्रगल के निशान नहीं मिले थे। घर के अंदर कोई फंदा भी मिला। परिवार ठीक से ये नहीं बता पाया कि बॉडी कहां लटकी हुई थी। फिर भी आरोपों और जो साक्ष्य सामने आ रहे हैं, उनके आधार पर हम पूरे केस की जांच कर रहे हैं। अब जानिए कि 26 नवंबर की रात को क्या हुआ था… डॉ. तलहा ने पुलिस को बताया कि रात में पूरे परिवार ने खाना खाया। सब कुछ सामान्य था, रात में करीब 12.30 से 1 बजे के बीच महजबीन की तबीयत बिगड़ी। मैं अपने वालिद के पास गया, उन्हें बताया कि महजबीन को हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ेगा। उसके मुंह से झाग निकल रहा है। हम लोगों ने उसको कार में डाला और मेडिनोवा हॉस्पिटल पहुंचे। यहां जिस स्टाफ ने उन्हें देखा, उसने बताया कि सांस थम चुकी हैं। तब हमें महजबीन की मौत की जानकारी हुई। ये सब होते-होते सुबह के 2.45 बज गए। मेडिनोवा हॉस्पिटल के डॉ. मोहम्मद अली अंसारी महजबीन को पहचानते थे। उन्होंने उसके चाचा अच्छन अंसारी को फोन किया। परिवार के लोग 3.45 बजे अस्पताल पहुंचे। अच्छन बताते हैं कि जब मैंने डॉ. तहला से पूछा कि बेटी को क्या हुआ? उन्होंने मुझसे कहा था- मेरे मां-बाप ने कुछ नहीं किया, मैंने मारा है। डॉक्टर ने भी कहा कि ये नार्मल डेथ नहीं है। सुबह 5 बजे पुलिस आने के बाद डॉ. तलहा और उनकी मां और पिता को हिरासत में लिया गया। सुबह 9 बजे थाने में परिचितों की भीड़ लग गई। लोग गुस्से में थे, उन्होंने आरोपियों को पीट दिया। इस दौरान महजबीन का ससुर मौके से भाग गया, जबकि सास और पति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पिता बोले- बेटी को प्रताड़ित कर रहे थे
महजबीन के पिता डॉ. हाशिम अंसारी कहती हैं- बेटी को शादी के बाद से ही लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। महजबीन कई बार फोन करके कहती थी कि ससुराल वाले ऑटोमैटिक कार के लिए परेशान कर रहे हैं। कई बार ससुराल गया, लेकिन हालात नहीं बदले। डॉक्टर बोले- देखते ही लगा मौत सामान्य नहीं
महजबीन की जांच करने वाले डॉक्टर मोहम्मद अली अंसारी ने स्पष्ट कहा कि जिस हालत में उसे लाया गया था, उससे साफ हो गया था कि उसकी मौत सामान्य नहीं है। महजबीन की मौत कार में ही हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ससुराल वालों में घबराहट और जल्दबाजी थी और पुलिस पूछताछ में उन्होंने कई बार अपने बयान भी बदले, जिससे शक और गहरा गया। अस्पताल स्टाफ और परिजनों के मुताबिक, महजबीन के गले पर दबाव के निशान, मुंह से निकला झाग और खुली आंखें इस बात के संकेत थे कि उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है।