जरूरत की खबर- मिड–एज से दिखते डिमेंशिया के संकेत:रिसर्च में खुलासा, 11 आदतों से बढ़ता रिस्क, डॉक्टर से जानें हेल्दी ब्रेन हैबिट्स

फर्ज करिए, आपकी उम्र 40 पार है। कभी कोई जरूरी सामान कहीं रखकर भूल जाते हैं, कभी किसी का नाम याद नहीं आता। कभी काम करते हुए ध्यान भटकता है, तो कभी अजीब सा अवसाद और कमजोरी महसूस होती है। ऐसे छोटे-छोटे संकेतों को हम अक्सर उम्र, काम के दबाव या रोजमर्रा के तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये बदलाव हमेशा इतने मामूली नहीं होते। हाल ही में ‘द लैंसेट साइकेट्री’ में पब्लिश यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) की एक स्टडी इस पर रोशनी डालती है। इस रिसर्च में मिड-लाइफ के छह खास डिप्रेसिव लक्षणों की पहचान की गई है। ये लक्षण आगे चलकर खतरे की घंटी हो सकते हैं। स्टडी में पता चला है कि डिमेंशिया रातोंरात नहीं होता। इसके संकेत दो दशक पहले से ही मिलने लगते हैं। आत्मविश्वास में कमी, लगातार घबराहट और भावनात्मक बदलाव सिर्फ डिप्रेशन के संकेत नहीं हैं। यह दिमाग में शुरू हो रहे न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं। न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस का मतलब ये है कि ब्रेन सेल्स धीरे-धीरे कमजोर और नष्ट हो रही हैं। ‘अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल’ की वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर तीन सेकेंड में एक नया व्यक्ति डिमेंशिया का शिकार हो रहा है। आने वाले सालों में यह खतरा और भी तेजी से बढ़ने वाला है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो साल 2060 तक हर साल करीब डिमेंशिया के 10 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं। ऐसे में आज हम जरूरत की खबर में जानेंगे कि–
एक्सपर्ट: डॉ. ज़ुबैर सरकार, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर सवाल- मिड एज में डिमेंशिया का रिस्क बढ़ता है। इस पर हुई नई स्टडी क्या कहती है? जवाब- यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) की एक स्टडी में 55 साल से अधिक उम्र के 5,000 से ज्यादा लोगों की लाइफ को दो दशकों तक ट्रैक किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में कुछ खास तरह के डिप्रेसिव लक्षण एक साथ दिखाई दे रहे थे, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था। सवाल- क्या संभावित डिमेंशिया के लक्षण मिड एज में ही दिखना शुरू हो जाते हैं? जवाब- हां, रिसर्च के मुताबिक, डिमेंशिया से जुड़ी कई चेतावनी के संकेत 60 साल की उम्र से पहले ही दिखना शुरू हो सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक, डिमेंशिया अचानक नहीं होता, बल्कि यह एक लंबा प्रोसेस है, जो सालों पहले छोटे-छोटे मेंटल और इमोशनल चेंज के रूप में सामने आता है। मिड लाइफ में दिखने वाले ये संकेत अक्सर याददाश्त से ज्यादा व्यवहार, सोचने के तरीके और इमोशनल रिस्पॉन्स से जुड़े होते हैं। सवाल- मिड लाइफ के वो कौन से लक्षण हैं, जो फ्यूचर डिमेंशिया के संकेत हो सकते हैं? जवाब- रिसर्च में मिड लाइफ के कुछ ऐसे मानसिक और भावनात्मक बदलाव सामने आए हैं, जो पहली नजर में सामान्य लगते हैं, लेकिन आगे चलकर डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। पॉइंटर्स से इन लक्षणों के बारे में समझते हैं- खुद पर भरोसा कम होना स्टडी में शामिल जिन लोगों ने यह बताया कि उनका आत्मविश्वास पहले की तुलना में घट गया है, उनमें डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम 51% तक अधिक पाया गया। समस्याओं का सामना करने में कठिनाई स्टडी के मुताबिक, जो लोग अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का सामना करने से बचने लगे, उनमें डिमेंशिया का खतरा 49% ज्यादा देखा गया। गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी अपनों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने में दिक्कत आना भी डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकता है। लगातार घबराहट या बेचैनी अगर लंबे समय तक चिंता और मानसिक तनाव बना रहता है तो इससे दिमागी क्षमताएं कमजोर हो सकती हैं। यह स्थिति डिमेंशिया की संभावना को भी बढ़ा सकती है। काम पूरा करने के बाद भी असंतोष किसी भी काम को पूरा करने के बावजूद संतुष्टि न मिलना या प्रोडक्टिविटी को लेकर असंतोष महसूस करना भी एक वॉर्निंग साइन हो सकता है। फोकस करने में कठिनाई फोकस बनाए रखने, फैसले लेने या किसी एक काम पर टिके रहने में परेशानी भविष्य में होने वाली कॉग्निटिव समस्याओं की ओर इशारा कर सकती है। सवाल- अगर मेरी उम्र 45 साल है तो मुझे अपनी डेली लाइफ में किन संकेतों पर गौर करना चाहिए? जवाब- ऐसे में आपको खुद से ये सवाल पूछने चाहिए- कभी–कभार ऐसा महसूस करना सामान्य है, लेकिन अगर रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी डिप्रेसिव फीलिंग हर वक्त महसूस हो तो इसे सिर्फ उम्र या स्ट्रेस मानकर नजरअंदाज न करें। सवाल- डेली लाइफ की वो कौन सी आदतें हैं, जो हमारे ब्रेन को नुकसान पहुंचाती हैं? जवाब- हमारी रोज की कई आदतें अनजाने में दिमाग पर धीरे-धीरे नकारात्मक असर डालती हैं। ये आदतें सीधे तौर पर याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक सेहत को कमजोर कर सकती हैं और लंबे समय में ब्रेन एजिंग की स्पीड बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक्स से समझते हैं- सवाल- उम्र के साथ ब्रेन एजिंग को कम करने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव भी हमारी ब्रेन हेल्थ में बड़ा फर्क ला सकते हैं। सवाल- डिमेंशिया के रिस्क को कम करने के लिए डाइट में क्या शामिल करें? जवाब- एक्सपर्ट्स ने ब्रेन-फ्रेंडली फूड्स को मिलाकर एक खास डाइट विकसित की है, जिसे ‘माइंड डाइट’ कहा जाता है। इसका पूरा नाम है– मेडिटेरेनियन/डैश इंटरवेंशन फॉर न्यूरोडीजनरेटिव डिले। यह डाइट मेडिटेरेनियन और डैश डाइट का मिश्रण है। इस डाइट में फल-सब्जियां, मछली, पोल्ट्री, अंडे, साबुत अनाज और ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट्स शामिल होते हैं। रिसर्च में देखा गया कि जो लोग पत्तेदार साग, जामुन, नट्स और साबुत अनाज खाते हैं, उनमें डिमेंशिया का जोखिम कम होता है। ये सभी इंफ्लेमेशन कम करने, सेल्स को नुकसान से बचाने और ब्रेन एजिंग की रफ्तार धीमी करने में मदद करते हैं। सवाल- क्या सामान्य भूलने की समस्या और डिमेंशिया में फर्क है? जवाब- हां, दोनों में बड़ा फर्क है। कभी–कभार तो हम सब चीजें भूलते हैं। कई बार इसका कारण विटामिन-D और विटामिन–B12 की कमी भी हो सकती है। लेकिन वो डिमेंशिया नहीं होता। डिमेंशिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें याददाश्त के साथ-साथ हमारी सोचने, निर्णय लेने, बोलने, और सामाजिक व्यवहार की क्षमता पर भी असर पड़ता है। डिमेंशिया का मतलब सिर्फ याददाश्त खोना नहीं है, बल्कि यह पूरी जिंदगी को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है। अच्छी बात यह है कि समय रहते संकेतों को पहचानकर और लाइफस्टाइल में बदलाव करके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ………………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़ें…
जरूरत की खबर- हेल्दी ब्रेन चाहिए, खाएं ये 14 चीजें:शुगर और ट्रांस फैट ब्रेन के लिए खतरा, डॉक्टर से जानें 6 जरूरी सावधानियां ब्रेन हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह हमारी हर सोच, हर काम और हर फैसले को कंट्रोल करता है। इसलिए ब्रेन का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए सही डाइट का चुनाव करना सबसे पहला कदम है क्योंकि जो हम खाते हैं, वह सीधे हमारी मानसिक क्षमता, याददाश्त और ध्यान पर असर डालता है। पूरी खबर पढ़ें…

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