रोहतक जिले में जाट आरक्षण आंदोलन के पीड़ित गांव कबूलपुर के राहुल दादू ने फेसबुक पर लाइव होकर आपबीती बताई और पूरे षड़यंत्र को लेकर खुलासा किया। राहुल दादू ने हरियाणा को जलवाने के पीछे का साजिशकर्ता भाजपा नेता को बताया, जिसने यशपाल मलिक को आगे कर पूरी योजना बनाई थी। राहुल दादू ने आरोप लगाया कि अगर भूपेंद्र हुड्डा ने कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलवाई होती, तो कैप्टन ने FIR में नाम क्यों नहीं लिखवाया। युवाओं की कैप्टन के साथ कोई दुश्मनी नहीं थी, बल्कि सरकार के साथ लड़ाई थी। जब युवाओं पर गोली चलाई गई, तब युवा कैप्टन की कोठी में गए थे, लेकिन सवाल यह है कि उस समय कैप्टन वित्तमंत्री थे और उनकी कोठी पर कोई सुरक्षा क्यों नहीं थी। हर आदमी का अपना किस्सा राहुल दादू ने बताया कि कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलने को लेकर हर आदमी का अपना किस्सा है। कोई किसी को जज नहीं कर रहा था कि कितने लोग मरेंगे और सरकार इसका फायदा कैसे उठाएगी। बहुत सारे ऐसे लोग थे, जो नहीं चाहते थे कि कोठी जले, लेकिन उनके नाम भी डाल दिए। खाप ने किसी मुकदमें में नहीं करवाया बरी राहुल दादू ने कहा कि खाप कह रही हैं कि उन्होंने समझौता करवाया, जिसके बाद युवा बरी हुए, लेकिन युवा कोर्ट से बरी हुए है, कौन सी खाप ने क्या करवाया, पहले यह बताए। कौन से मुकदमों में खापों ने बरी करवाया। बहुत सारे युवा कोर्ट से कानूनी रूप से बरी हुए हैं। आरक्षण की मांग थी, 50 मांग बना दी राहुल दादू ने बताया कि उनकी केवल आरक्षण की मांग थी, लेकिन एक मांग की 50 मांग बना दी। जिसने यह दंगा करवाया, पूरी प्लानिंग के साथ करवाया। उसका नाम लेने की किसी में हिम्मत नहीं है। कैप्टन को दंगे की आशंका नहीं थी क्या। कैप्टन की कोठी के आगे पुलिस क्यों नहीं थी। मंत्रियों की कोठी के आगे, तो वैसे ही सिक्योरिटी रहती है, उस समय सिक्योरिटी कहा थी। भाजपा नेता ने जलवाया था हरियाणा राहुल दादू ने बताया कि 2016 में हरियाणा को भाजपा नेता ने ही फूंकवाया था। चैलेंज करके जलवाया था और हरियाणा जलने के बाद दो बार सरकार भी बना ली। कैप्टन अभिमन्यु को कोने में लगा दिया। आज कैप्टन का उसके हलके से जीतना भी मुश्किल कर दिया है। मनोहर लाल खट्टर ने तो किसानों पर भी लाठी चलवा दी। युवाओं का व्यक्तिगत नुकसान राहुल दादू ने बताया कि पुलिस ने जिनके पास सामान मिला, उनके ऊपर कोई केस दर्ज नहीं किया, जबकि निर्दोष होने के बावजूद उनके ऊपर 8 केस लगाए गए। 10 साल तक हमनें पीड़ा सही। अब बदमाशी उन्हें आती नहीं, गुंडे वह नहीं, अब क्या करें, उनका व्यक्तिगत नुकसान हुआ है। युवा बहुत बड़ी प्लानिंग का शिकार राहुल दादू ने बताया कि जैसा माहौल अब बनाया जा रहा है, वैसा नहीं होना चाहिए। युवा बहुत बड़ी प्लानिंग का शिकार हुए है। कैप्टन अभिमन्यु कभी उनके खिलाफ नहीं था, जिसके लिए उसकी इज्जत करते हैं, लेकिन अशोक बल्हारा ने हमारे ऊपर झूठे केस दर्ज करवाए। धरने के नाम पर लोगों को किया भ्रमित राहुल दादू ने बताया कि जो लोग पहले उन्हें गलत बता रहे थे, आज यशपाल मलिक को गलत बता रहे हैं। यशपाल मलिक पहले ही गलत था, लेकिन आज सर छोटूराम धाम के नाम से बन रही संस्था को कब्जाना चाहते हैं। धरने के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का काम किया। यशपाल मलिक को भाजपा नेता ने उठाया राहुल दादू ने बताया कि यशपाल मलिक को किसी ओर ने नहीं, बल्कि भाजपा नेता ने उठाया था। यशपाल मलिक को लोग नेता मानने लगे थे, लेकिन उन्होंने कभी यशपाल मलिक को नेता नहीं माना। आज यशपाल मलिक से कहलवा दो कि भाजपा नेता ने हरियाणा का जलवाया। कैप्टन अभिमन्यु को नहीं मानते नेता राहुल दादू ने कहा कि कैप्टन अभिमन्यु को हम नेता नहीं मानते। कैप्टन उस समय वित्तमंत्री था और अगर वह नेता होता, तो अब तक दूध का दूध हो चुका होगा। आज धर्मेंद्र हुड्डा लाइव होकर कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के लिए भूपेंद्र हुड्डा को जिम्मेदार ठहरा रहा है। अगर हुड्डा ने कोठी जलवाई, तो कैप्टन अभिमन्यु ने एफआईआर में नाम क्यों नहीं लिया। राहुल दादू ने कहा कि कैप्टन अभिमन्यु का नाश उन लोगों ने करवाया है, जो उसके चक्कर काट रहे हैं। कैप्टन की कोठी जब जलाई गई, जब युवाओं पर गोली चली थी। मामले में 25 हजार लोग ऐसे थे, जो पकड़े ही नहीं गए। पुलिस ने भी अपराधियों को छोड़ निर्दोष लोगों को पकड़ा था। अशोक बल्हारा ने लगवाए 2 केस राहुल दादू ने कहा कि उसके ऊपर 8 केस लगाए गए, जिनमें से दो केस अशोक बल्हारा ने लगवाए। अशोक बल्हारा के घर बात करने गए थे, लेकिन उसने पुलिस को बुला लिया। 8 में से 7 केसों में कोर्ट से बरी हुए है, किसी खाप ने कोई साथ नहीं दिया। आज खाप वाले चौधरी बन रहे है, लेकिन इन्होंने कुछ नहीं किया। संघ व सरकार के साथ लड़ाई राहुल दादू ने कहा कि भाजपा नेता कह रहा था कि डंडे उठाओ, मारो। इससे साफ है कि किसने क्या किया। उनकी लड़ाई संघ की विचारधारा व सरकार के साथ है, लेकिन हमारे जाट किसी की नहीं सुन रहे। ना समाज की सुनते और ना संघ की सुन रहे।