जालंधर जिला प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों की रसोई को आसान बनाने के लिए एक सराहनीय पहल शुरू की है। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में विशेष कैंप लगाकर प्रवासी मजदूरों को 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को बिना किसी लंबी दस्तावेजी प्रक्रिया के पोर्टेबल गैस सिलेंडर मुहैया कराना है, ताकि उन्हें दैनिक जीवन में खाना पकाने के लिए ईंधन की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसी कड़ी में आज ‘हेमको ग्रुप’ में कैंप लगाकर जरूरतमंद परिवारों को सिलेंडर वितरित किए गए। जालंधर के जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले भर में कार्यरत प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम के छोटे एलपीजी सिलेंडर वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार प्रवासी मजदूरों को बड़े सिलेंडर लेने या उनके कनेक्शन के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने में कठिनाई होती है, इसी समस्या को देखते हुए एफ.टी.एल. सिलेंडरों पर जोर दिया जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों में लग रहे हैं विशेष कैंप
मजदूरों और उनके परिवारों तक गैस सप्लाई की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभाग अब सीधे उन जगहों पर जा रहा है जहां ये मजदूर काम करते हैं। इसके लिए अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों को चिन्हित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि कार्यस्थल पर ही कैंप लगाने से मजदूरों का समय भी बचता है और उन्हें गैस कनेक्शन के लिए भटकना नहीं पड़ता। हेमको ग्रुप में वितरण और कार्यक्रम
इस पहल के तहत आज जालंधर के प्रसिद्ध हेमको ग्रुप लिमिटेड के परिसर में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर डी.एफ.एस.सी. नरेंद्र सिंह और हेमको ग्रुप के चेयरमैन श्याम गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान लगभग 20 एफ.टी.एल. सिलेंडर जरूरतमंद मजदूर परिवारों को सौंपे गए। पोर्टेबल सिलेंडरों के लाभ
अधिकारियों ने बताया कि ये 5 किलो वाले पोर्टेबल सिलेंडर प्रवासी मजदूरों के लिए बेहद सुविधाजनक हैं। इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है और इनके लिए किसी एड्रेस प्रूफ की जटिलता भी आड़े नहीं आती। चेयरमैन श्याम गुप्ता ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना की और कहा कि मजदूरों की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखना उद्योगों की भी नैतिक जिम्मेदारी है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जालंधर के सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और उन कॉलोनियों में जहां प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक है, वहां नियमित रूप से ऐसे कैंप लगाए जाएं। नरेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मजदूर को धुएं वाले चूल्हे या अवैध रिफिलिंग के खतरे में न पड़ना पड़े।