ट्राइसिटी के अस्पतालों में सीबीआई की रेड:ECHS में 100 करोड़ का घोटाला, फर्जी एडमिशन, पूर्व सैनिकों के इलाज के नाम पर खेल

ट्राइसिटी में केंद्र सरकार की पूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना में 100 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने मंगलवार को इस मामले में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के कई निजी अस्पतालों पर एक साथ छापेमारी की। सेक्टर-38 स्थित एक धार्मिक स्थल में संचालित मेडिकल सेंटर पर भी जांच की गई। यह घोटाला केंद्र सरकार की एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) योजना से जुड़ा है, जो पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के इलाज के लिए शुरू की गई थी। ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मरीजों को बिना किसी चिकित्सीय आवश्यकता के निजी अस्पतालों में भर्ती दिखाया गया। कई मामलों में मरीज केवल ओपीडी में पहुंचे, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें 7 से 14 दिनों तक एडमिट दर्शाकर लाखों रुपए के क्लेम पास करवा लिए गए। इस दौरान महंगी दवाइयों के फर्जी बिल तैयार किए गए, लैब टेस्ट की नकली रिपोर्ट बनाई गई और बिना ऑपरेशन किए ही ऑपरेशन दिखाकर रकम वसूली गई। इतना ही नहीं, मरीजों की फाइलों में फर्जी दस्तावेज भी जोड़े गए। सूत्रों के अनुसार, एक-एक मरीज के नाम पर 5 से 10 लाख रुपए तक के फर्जी बिल तैयार किए गए, जबकि दर्जनों मामलों में 2 से 5 लाख रुपए तक की राशि के बिल सामने आए हैं। सेक्टर-15 और सेक्टर-38 बना केंद्र सीबीआई की जांच में सामने आया कि सेक्टर-15 का एक निजी अस्पताल और सेक्टर-38 स्थित मेडिकल सेंटर इस नेटवर्क के प्रमुख केंद्र रहे। दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कार्यालयों की टीमों ने सेक्टर-15 स्थित धर्म अस्पताल का रिकॉर्ड खंगाला। देर रात तक दस्तावेजों की जांच चलती रही। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में निजी अस्पतालों के एक दर्जन से अधिक डॉक्टर, निजी लैब और एक प्राइवेट एजेंसी की भूमिका सामने आई है। यह एजेंसी अस्पतालों को ईसीएचएस के तहत पंजीकृत मरीज उपलब्ध कराती थी। पहले की जाती थी मरीज की तलाश जांच में यह भी सामने आया है कि जैसे ही क्लेम की राशि जारी होती थी, उसका हिस्सा डॉक्टर, अस्पताल, लैब और संबंधित एजेंसी के बीच बांट लिया जाता था। यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा था। पहले मरीज तलाशा जाता था, फिर बिना जरूरत उसे अस्पताल में भर्ती दिखा दिया जाता था। इसके बाद मेडिकल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की जाती। फर्जी टेस्ट रिपोर्ट और महंगी दवाइयों के बिल जोड़ दिए जाते। कई मामलों में एडमिशन और ऑपरेशन के नकली दस्तावेज भी तैयार किए जाते थे। जब क्लेम पास हो जाता, तो मिली रकम का आपस में बंटवारा कर लिया जाता था। पूर्व सैनिकों के इलाज के लिए शुरू की गई ईसीएचएस योजना में इस तरह की गड़बड़ी सामने आने से योजना की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी ने कई जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और कुछ लोगों की गिरफ्तारी की संभावना है। जांच अभी जारी है।

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