डॉक्टर के साथ मारपीट के मामले में सरकार की अपील:करनाल में हड़ताल खत्म कर ड्यूटी पर लौटें,डीजी हेल्थ ने एचसीएमएस एसोसिएशन को भेजा पत्र

करनाल में घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी पर तैनात मेडिकल ऑफिसर के साथ कथित मारपीट और जबरन उठाकर ले जाने के मामले को लेकर जारी डॉक्टरों की हड़ताल पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख दिखाया है। महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा ने एचसीएमएस एसोसिएशन को पत्र भेजकर कहा है कि घटना की जांच उच्च स्तर पर कराई जा रही है और संबंधित एसएचओ को सस्पेंड भी किया जा चुका है, लेकिन आवश्यक सेवाओं में हड़ताल जारी रखना कानून के खिलाफ है। विभाग ने डॉक्टरों से तुरंत ड्यूटी पर लौटने की अपील की है ताकि मरीजों को परेशानी न हो। डीजी हेल्थ ने एसोसिएशन को भेजा पत्र
महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा की ओर से महासचिव और अध्यक्ष एचसीएमएस एसोसिएशन को 6 मार्च को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सीएचसी घरौंडा में ड्यूटी पर तैनात मेडिकल ऑफिसर के साथ मारपीट, जबरन उठाकर ले जाने और अवैध रूप से रोकने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। पत्र में कहा गया है कि पीड़ित के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है और इस मामले को उच्च स्तर पर उठाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य के हस्तक्षेप के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और जांच एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी गई है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हड़ताल को बताया अनुचित
पत्र में यह भी कहा गया है कि एचसीएमएस एसोसिएशन द्वारा दिया गया हड़ताल का आह्वान भले ही परिस्थितियों के कारण किया गया हो, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग जन्म से लेकर मृत्यु तक लोगों की सेवा करता है और इसकी सेवाएं अत्यंत आवश्यक श्रेणी में आती हैं। ऐसे में चिकित्सा सेवाओं में किसी भी प्रकार का व्यवधान मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है और समाज को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। ईएसएमए का हवाला देकर दी चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य में आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम पहले से लागू है। इसके तहत आवश्यक सेवाओं में हड़ताल करना प्रतिबंधित है। यदि इसके बावजूद हड़ताल जारी रहती है तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 4 मार्च को हुई थी घटना
जानकारी के अनुसार 4 मार्च को घरौंडा के सरकारी अस्पताल में कुछ मरीज मेडिकल कानूनी जांच के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि इन मरीजों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर प्रशांत के साथ गलत व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर प्रशांत ने पुलिस को फोन कर मदद मांगी। अस्पताल स्टाफ के अनुसार फोन पर डॉक्टर और पुलिस के बीच बातचीत हुई थी। थप्पड़ मारने का सीसीटीवी भी आया सामने
बताया जा रहा है कि फोन पर बातचीत के दौरान डॉक्टर ने एसएचओ को गाली दे दी। इसके बाद एसएचओ मौके पर पहुंचे और डॉक्टर को थप्पड़ मार दिए। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद मामला और तूल पकड़ गया। एसोसिएशन ने एफआईआर की मांग की
घटना के बाद मेडिकल एसोसिएशन ने एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि विभाग ने 5 मार्च को एसएचओ को सस्पेंड कर दिया, लेकिन एसोसिएशन एफआईआर की मांग पर अड़ी हुई है। इसी मांग को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल 6 मार्च को भी जारी रही। एसएचओ के समर्थन में भी उतरीं संस्थाएं
दूसरी ओर घरौंडा की कुछ सामाजिक संस्थाएं एसएचओ के समर्थन में सामने आई हैं। इन संस्थाओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं डॉक्टरों और प्रशासन के बीच इस विवाद को लेकर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

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