तरनतारन भांजी हत्या केस में आरोपी को जमानत नहीं:हाईकोर्ट ने मासी की याचिका ठुकराई, कहा- राहत की हकदार नहीं

पंजाब में चार साल पहले अपनी ही भांजी को जहर देकर हत्या करने की आरोपी मासी को अभी सलाखों के पीछे ही समय बिताना पड़ेगा। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने में 63 साल की बुजुर्ग मासी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पर अपनी सगी भांजी को जहर देकर मारने का बेहद गंभीर आरोप है, इसलिए वह राहत की हकदार नहीं है। घर से लड़की को बुलाकर दो लड़कों ने की छेडछाड़ 30 जनवरी 2022 को तरनतारन के थाना सरहाली क्षेत्र के एक गांव में 12वीं की छात्रा अनिता (बदला हुआ नाम) घर पर अकेली थी। इसी दौरान महकदीप सिंह और दिलप्रीत सिंह नाम के दो लड़के वहां पहुंचे और उसे कहा कि उसकी मासी रंजीत कौर बुला रही हैं। छात्रा उनके साथ मासी के घर चली गई। लेकिन जब वह वहां पहुंची तो मासी मौजूद नहीं थी। इस दौरान दोनों लड़कों ने उसके साथ छेड़छाड़ की। इसी बीच उसका चचेरा भाई लवप्रीत उसे ढूंढते हुए वहां पहुंच गया और उसने दोनों आरोपियों की पिटाई कर दी। वहीं, लड़की से भी मारपीट की। वारदात के कुछ देर बाद मौसी भी पहुंची कुछ समय बाद उसकी मासी रंजीत कौर भी वहां पहुंच गई। उसने लड़की को यह कहकर डराया कि अगर उसके पिता को लड़कों के साथ हुई इस घटना के बारे में पता चला, तो वे उसे जान से मार देंगे। इस डर के कारण रंजीत कौर ने लड़की को कुछ “दवाई” खाने के लिए दी। मासी के कहने पर लड़की ने वह पदार्थ खा लिया। इसे खाने के बाद छात्रा की हालत बिगड़ गई। उसके पिता ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान अस्पताल में लड़की की मौत हो गई। विसरा की रासायनिक जांच रिपोर्ट में मृतका के शरीर में “एल्यूमीनियम फॉस्फाइड” (एक जहरीला पदार्थ) पाया गया। इस मामले में 2 फरवरी 2022 को पुलिस स्टेशन सरहाली में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। इस दौरान तीन लोगों पर केस दर्ज किया। आरोपी के वकील की दलील- 63 साल की हैं जमानत दी जाए याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि रंजीत कौर 63 साल की हैं और पिछले 1 साल 9 महीने से हिरासत में हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। हालांकि, सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और सगी मासी ने ही भांजी को जहर दिया था। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता मृतका की सगी मासी है और उस पर अपनी ही भांजी को जहर देने का गंभीर आरोप है। अपराध की गंभीरता और मामले के तथ्यों को देखते हुए मना कर दिया।

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