कानपुर के एक थाने में राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता का निरीक्षण तूल पकड़ता जा रहा। निरीक्षण के बाद ज्वाइंट सीपी विनोद कुमार सिंह ने लेटर लिखकर आयोग की सदस्य को चेतावनी दी। लिखा- वह दोबारा किसी थाने का निरीक्षण न करें क्योंकि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ज्वाइंट सीपी के लेटर पर पलटवार करते हुए अनीता गुप्ता ने उनकी हद बताई है। कहा- ‘ज्वाइंट सीपी ने मुझे नहीं, बल्कि योगीजी की सरकार को चुनौती दी है। मैं साफ कहना चाहूंगी कि यह मेरा नहीं, सरकार का अपमान है। जेसीपी रैंक वाले अधिकारी को यह अधिकार ही नहीं है कि वे सीधे मुझे कोई पत्र भेजें।’ भास्कर से बातचीत में अनीता गुप्ता ने कहा कि जेसीपी को आयोग को पत्र भेजना चाहिए था। मैं भी किसी शिकायत पर सीधे किसी अधिकारी को पत्र नहीं भेजती, बल्कि डीएम या पुलिस कमिश्नर को ही पत्र भेजती हूं। दरअसल, 22 नवम्बर को बर्रा थाने का निरीक्षण करने महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता पहुंची थीं। पहले जानिए पूरा मामला… राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने 22 नवंबर को बर्रा थाने का औचक निरीक्षण किया था। थाने में उन्होंने महिला हेल्प डेस्क और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति देखी थी। आयोग की मेंबर का थाने का निरीक्षण जॉइंट कमिश्नर (JCP) विनोद कुमार सिंह को नागवार लगी। ज्वाइंट सीपी ने महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता को लेटर लिखकर उनके कार्यक्षेत्र और अधिकारों को लेकर नसीहत दे डाली। लेटर में कहा कि वह भविष्य में दोबारा किसी थाने का निरीक्षण न करें। क्योंकि, यह उनके अधिकार के बाहर है। निरीक्षण से पुलिस का काम प्रभावित होता है। अनाधिकृत व्यक्ति बोलने पर भड़की सदस्य
ज्वाइंट कमिश्नर ने लेटर भेजकर सभी डीसीपी को यह निर्देश दिया कि भविष्य में दोबारा वे किसी भी थाने का निरीक्षण न होने दें। थाने का निरीक्षण किसी ऐसे व्यक्ति को न करने दिया जाए, जिसके पास कानूनी अधिकार न हों। ज्वाइंट कमिश्नर ने आयोग की सदस्य को भेजे गए लेटर की कॉपी पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था), सभी डीसीपी और एसीपी को भेजी है। उधर, लेटर मिलने के बाद महिला आयोग की सदस्य भड़क गईं। उन्होंने ‘अनाधिकृत’ शब्द के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई। अब पढ़िए भास्कर से इस मुद्दे पर बातचीत में महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने क्या कहा? सवाल: आप थाने का निरीक्षण करने पहुंची थी? क्या आपको कोई शिकायत मिली थी? जवाब: हां, मुझे कुछ महिलाओं की शिकायत मिली थीं। मैं उनके नाम सार्वजनिक नहीं करूंगी। उन्होंने बताया था कि थाने में समझौते के लिए जबरन दबाव डाला जाता है। कुछ और शिकायतें भी थीं, इसलिए मैंने निरीक्षण किया। मैंने सिर्फ महिला हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया, पूरे थाने का निरीक्षण नहीं किया। सवाल: आखिर ऐसा क्या हुआ कि पुलिस ने आपको पत्र लिखकर हद बता दी? जेसीपी का कहना है कि आप थाने का निरीक्षण नहीं कर सकती? जवाब: मैं जेसीपी विनोद कुमार सिंह से कहना चाहूंगी कि उनको पता ही नहीं है कि महिला आयोग के पास क्या-क्या अधिकार है। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने मुझे चुनौती दी है। उन्होंने सीधे योगी सरकार को चुनौती दी है। आप कुछ भी नियम बनाइए, हम उसे अपने तरीके से लागू करेंगे। ये मेरा अपमान नहीं, सरकार का अपमान है। सवाल: क्या थाने के निरीक्षण में आपको कोई खामी मिली, इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है? जवाब: हम लोग सीधे शासन को रिपोर्ट नहीं भेजते। हम सभी सदस्य अपनी जांच रिपोर्ट को आयोग की मासिक बैठक में अपनी अध्यक्ष को देते हैं। इन रिपोर्ट्स की समरी तैयार की जाती है। फिर आयोग की अध्यक्ष की ओर से शासन और महिला कल्याण मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जाती है। सवाल: पुलिस का कहना है कि आपने उनके कार्य में बाधा डाली? जवाब: मैं इस थाने का पहले भी निरीक्षण कर चुकी हूं। पिछली बार वहां एक पीड़िता भी मौजूद थी। हमने उसकी शिकायत सुनी थी। उसकी एफआईआर भी दर्ज कराई थी। लेकिन इस बार कोई मौजूद नहीं था। यह औचक निरीक्षण था। निरीक्षण करना हमारा अधिकार है। जिस जिले की मैं सदस्य हूं, वहां किसी भी थाने में जा सकती हूं। पहले भी मैं कई थानों का निरीक्षण कर चुकी हूं। सवाल: क्या आप इस मामले की शिकायत सरकार या आयोग से करेंगी? जवाब: मुझे जब नोटिस मिला तो मैं चुप रही, क्योंकि हम अनुशासित संगठन के लोग हैं। मैंने इस पत्र के बारे में आयोग की अध्यक्ष को जानकारी दी और लेटर उन्हें सौंप दिया। आयोग की अध्यक्ष ने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों को भेज दी है। सवाल: आपने जेसीपी को मानसिक बीमार बता दिया, क्या वजह रही जो आपने ऐसा कहा? जवाब: मैं नहीं चाहती कि वह हमें कोई खास तवज्जो दें। वह जेसीपी रैंक पर हैं तो निश्चित ही अनुभवी और सीनियर अधिकारी हैं। लेकिन अपनी लेटर में उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह गलत है। पहली बात तो यह कि उनको मुझे सीधे पत्र भेजने का अधिकार ही नहीं है, उन्हें अपनी बात आयोग को भेजनी चाहिए थी। मैने तो थोड़ा कम ही बोला है। सवाल: क्या आप भविष्य में किसी थाने का निरीक्षण करने जाएंगी? जवाब: बिल्कुल, मै जाऊंगी… क्यों नहीं जाउंगी। ये मेरे अधिकारों में है। अधिकार इन अधिकारियों ने मुझे नहीं दिया है। यह अधिकार मुझे सरकार ने दिया है। यह हमारी नियमावली में है। महिला उत्पीड़न के विषय में हमारी सरकार काफी गंभीर है। हमारी पहली बैठक में ही सीएम ने हमें 24 प्वाइंट बताए थे, जिसका हम लोग अनुपालन कर रहे हैं। —————- ये भी पढ़ें- मां का आटे का पुतला बनाकर दाह संस्कार करेगा बेटा:गोरखपुर में पिता से मांगी माफी; पहले कहा था- घर में शादी…लाश फ्रीजर में रख दो गोरखपुर में 20 नवंबर को बेटे ने मां का शव लेने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था, क्योंकि घर में शादी थी। उसने कहा था कि 4 दिन फ्रीजर में लाश रखवा दो। शादी के बाद आकर दाह संस्कार करवा दूंगा। पढ़िए पूरी खबर…