दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के शंकरपुर स्थित संत उमेश फाउंडेशन स्कूल में बुधवार को छात्रों और अभिभावकों ने एडमिट कार्ड वितरण में देरी को लेकर जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद छात्रों को उनके एडमिट कार्ड मिल सके। यह पूरा मामला स्कूल के तीन निदेशकों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। इनमें कल्पना मिश्रा (स्वर्गीय आनंद मिश्रा की पत्नी), उत्तम कुमार मिश्रा (स्वर्गीय उमेश मिश्रा के पुत्र) और गोपाल जी मिश्रा (स्वर्गीय उमेश मिश्रा के पुत्र, जो वर्तमान में प्रधानाध्यापक हैं) शामिल हैं। यह विवाद स्कूल के ट्रस्ट और संपत्ति के बंटवारे को लेकर स्वर्गीय उमेश मिश्रा की मृत्यु के बाद से ही चल रहा है। थाना प्रभारी बसंत कुमार ने बताया कि उन्हें दसवीं के छात्रों के एडमिट कार्ड वितरण को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत कराया। उन्होंने बताया कि यह स्कूल एक ट्रस्ट के माध्यम से चलता है, जिसमें छह ट्रस्टी हैं। आपसी बंटवारे को लेकर विवाद है। पुलिस ने सभी पक्षों को 13 फरवरी को एक बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है, जिसमें ट्रस्टी, सरपंच, मुखिया और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे, ताकि बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो। स्कूल की छात्रा निधि कुमारी ने बताया कि वे सुबह 11 बजे से एडमिट कार्ड का इंतजार कर रही थीं, लेकिन शाम 4:30 बजे तक उन्हें कार्ड नहीं मिला। पुलिस प्रशासन स्कूल में मौजूद था। एक अन्य छात्रा खुशी कुमारी, जो दसवीं की विद्यार्थी है,उन्होंने बताया कि उनकी परीक्षा 17 फरवरी से शुरू हो रही है और 11 फरवरी तक उन्हें एडमिट कार्ड नहीं मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तम सर एडमिट कार्ड लाए थे, लेकिन गोपाल सर उन्हें देने से मना कर रहे थे। खुशी ने यह भी बताया कि स्कूल 10 अक्टूबर से बंद है और पढ़ाई नहीं हो पा रही है। संत उमेश फाउंडेशन के निदेशक उत्तम कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘मनगढ़ंत’ बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सितंबर 2025 तक की फीस लेकर बच्चों को एडमिट कार्ड देने का आदेश दिया था।
उत्तम मिश्रा ने आरोप लगाया कि गोपाल मिश्रा जानबूझकर स्कूल को बाधित कर रहे हैं ताकि उनका दूसरा स्कूल सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि गोपाल मिश्रा ने अपना दूसरा स्कूल बिना किसी विचार-विमर्श के खोला है। उत्तम मिश्रा के अनुसार, स्कूल पिछले 12 साल से एडमिट कार्ड वितरित कर रहा है, लेकिन विवाद के कारण पिछले कुछ महीनों से पढ़ाई बाधित थी, शिक्षकों को वेतन नहीं मिला और कई अच्छे शिक्षक स्कूल छोड़कर चले गए। अभिभावक मोहम्मद इरशाद ने बताया कि उनका बच्चा इस स्कूल में दसवीं की पढ़ाई कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले चार-पांच महीने से स्कूल बंद होने के बावजूद प्रबंधन पूरे महीने की फीस क्यों मांग रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे 13-14 साल से इस स्कूल में पढ़ रहे हैं, लेकिन विवाद के कारण पढ़ाई नहीं हो पा रही है। शंकरपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि अहमद अली तम्मने ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत पर वे मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि स्कूल में पहले भी विवाद को लेकर बैठकें हुई हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल सितंबर तक ही चला था, इसलिए वे केवल सितंबर तक की फीस का भुगतान करेंगे। इस बीच, शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, संत उमेश फाउंडेशन स्कूल को केवल आठवीं कक्षा तक ही पठन-पाठन की स्वीकृति मिली हुई है। इसके बावजूद, विद्यालय में नौवीं और दसवीं कक्षा की पढ़ाई अवैध रूप से कराई जा रही है, जो नियमानुकूल नहीं है। लोगों का आरोप है कि यह शिक्षा विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यह विद्यालय सीबीएसई बोर्ड से दसवीं की पढ़ाई के लिए संबद्ध भी नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस स्कूल के नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का पंजीकरण रामकृष्ण विद्यापीठ, वासुदेवपुर, दरभंगा में हुआ है। संत उमेश फाउंडेशन स्कूल में कुल 27 बच्चे हैं, जिनमें 14 लड़के और 13 लड़कियां शामिल हैं। लगभग छह घंटे के हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के बाद, पुलिस अधिकारियों की तीन गाड़ियों के पहुंचने पर स्थिति शांत हुई और अंततः सभी छात्रों को एडमिट कार्ड वितरित किए गए। एडमिट कार्ड मिलने के बाद छात्रों के चेहरों पर खुशी देखी गई और उन्होंने पुलिस प्रशासन, मीडिया को धन्यवाद दिया। बीईओ विनोद कुमार ने पुष्टि की कि उक्त स्कूल को जिला स्तर पर केवल आठवीं कक्षा तक पठन-पाठन की स्वीकृति है। उन्होंने कहा कि बिना संबद्धता के नौवीं और दसवीं कक्षा का संचालन चोरी-छिपे करना नियमानुकूल नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना पर लोगों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विवादों से विद्यार्थियों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ता है और स्कूल समय में विवाद करने से गलत संदेश जाता है। कुछ छात्रों ने बताया कि दो अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें अलग-अलग संदेश भेजे जाते थे, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती थी। गोपाल मिश्रा का कहना है कि चार माह का भुगतान न होने के कारण एडमिट कार्ड नहीं दिए जा रहे थे। अब लोगों की नजर शिक्षा विभाग पर टिकी है कि वह इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है।