दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह समय रहते रुकवा दिया गया। शुक्रवार को Just Rights for Children से संबद्ध कार्ड्स के सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर कुमार झा की सूचना पर पुलिस और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया।बाद में उसे बाल कल्याण समिति की देखरेख में सौंप दिया गया। मनोहर कुमार झा ने बच्ची के पिता की ओर से सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष को दिए गए आवेदन का संज्ञान लिया। संबंधित अधिकारियों व संस्थाओं को मामले से अवगत कराया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी के निर्देश पर और डीपीओ आईसीडीएस चांदनी कुमारी की निगरानी में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया। टास्क फोर्स में सेंटर डायरेक्ट कवच परियोजना की कार्यक्रम पदाधिकारी पूनम कुमारी, जिला समन्वयक रामविनय कुमार, कार्ड्स जिला समन्वयक नारायण कुमार मजूमदार तथा पंचायत फैसिलिटेटर ममता कुमारी शामिल थे। टीम ने सिंहवाड़ा थाना पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए नाबालिग को विवाह से पूर्व सुरक्षित निकाल लिया। बाल विवाह निषेध पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी नीरज कुमार और सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष बसंत कुमार की उपस्थिति में परिजनों से लिखित वचन पत्र भरवाया गया। प्रारंभिक स्तर पर बच्ची को उसके मामा के सुपुर्द किया गया। इस दौरान डालसा की अधिवक्ता मांडवी कुमारी, सहायक राजीव राम और मो. इमामुद्दीन ने बच्ची के पिता की काउंसलिंग की। विवाह के लिए चयनित युवक से बातचीत के बाद बाल विवाह की तैयारी की पुष्टि हुई। बच्ची के ननिहाल पहुंचकर गहन जांच की डीपीएम आईसीडीएस ब्रजेश कुमार सिंह और अधिवक्ता मांडवी कुमारी के नेतृत्व में टास्क फोर्स ने बच्ची के ननिहाल पहुंचकर गहन जांच की। जांच के दौरान पिता ने ससुराल पक्ष पर जबरन शादी कराने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि नाबालिग की मैट्रिक परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होनी है, लेकिन महाशिवरात्रि के दिन उसकी शादी कराने की योजना बनाई गई थी। प्राथमिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने के संकेत भी मिले हैं। नाबालिग की काउंसलिंग के बाद उसे सनहा दर्ज कर मेडिकल जांच उपरांत बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।