‘देश की रक्षा के लिए भेजा, संदूक में वापस आया’:जवान की मां बोली- बेटे पर गर्व है, दूसरा बेटा मां भारती की सेवा में तैनात है

‘’बेटे को मैंने देश की सुरक्षा के लिए 25 साल पहले घर से भेज दिया था। अब तक सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि जिस बेटे को मैंने मां भारती की सेवा के लिए भेजा था, वो एक दिन मेरे ही सामने लकड़ी की संदूक में घर आएगा। एक साल पहले ही सुमन के पापा मुझे छोड़ गए थे, अब बेटे ने भी साथ छोड़ दिया। मुझे गर्व है कि मैं जवान की मां हूं, जिसने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अभी मेरा एक और बेटा देश की सेवा में तैनात है। मेरा छोटा बेटा सीआईएसएफ में नवी मुंबई में है।” नालंदा के नायब सूबेदार सुमन कुमार सिंह की मां चिंता देवी (65) ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल, सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज (45) गंभीर बीमारी की वजह से लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को शुक्रवार की रात उनके पैतृक गांव मोकरमपुर मिर्चायगंज लाया गया। जवान का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ बाढ़ के उमानाथ घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। 14 साल के बेटे अंश ने पिता को मुखाग्नि दी। जवान सुमन कुमार सिंह की पोस्टिंग कहां थी? वे किस बीमारी की चपेट में थे? जवान के निधन पर बेटे, बेटी और उनकी मां ने क्या कहा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जवान की अंतिम यात्रा की कुछ तस्वीरें देखिए करीब एक महीने से लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था इलाज सुमन कुमार सिंह का करीब 1 महीने से लखनऊ के अस्पताल में इलाज चल रहा था। वो ब्लड कैंसर और पीलिया से पीड़ित थे। अस्पताल में इलाज के दौरान ही शुक्रवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक, 20 साल की उम्र में सुमन सिंह ने इंडियन आर्मी को जॉइन किया था। सबसे पहले उनकी पोस्टिंग जालंधर में हुई थी। इसके बाद उन्हें गुवाहाटी, फिर भटिंडा, लेह-लद्दाख में उनकी पोस्टिंग हुई थी। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग यूपी के बबीना में थी। जवान के परिजन की माने तो लद्दाख में ही पोस्टिंग के दौरान सुमन कुमार सिंह की तबीयत खराब होनी शुरू हुई थी। उन्होंने पीलिया यानी जॉन्डिस ने जकड़ लिया था। धीरे-धीरे संक्रमण ने गंभीर रूप ले लिया। 4 मार्च को परिजन को कॉल आया कि सुमन के कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह सुन्न (पैरालाइज) हो गया है। आनन-फानन में उन्हें बबीना से झांसी और फिर लखनऊ के कमांड अस्पताल रेफर किया गया। परिजन के मुताबिक, लखनऊ में जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सुमन सिंह को ब्लड कैंसर भी है। करीब एक महीने तक चले इलाज के बाद 27 मार्च को उन्होंने लखनऊ के अस्पताल में आखिरी सांस ली। बेटी बोली- पापा ने होली में घर आने का वादा किया था सुमन का परिवार पिछले 9 सालों से चंडीगढ़ में रह रहा था। सुमन की 17 साल की बड़ी बेटी सलोनी ने बताया कि पापा ने होली में घर आने का वादा किया था। चार मार्च को घर में पापा के पसंद का पकवान बना था। लेकिन उसी दिन उनकी बीमारी की हम लोगों को खबर मिली थी। इसके बाद जब हम लोगों की बातचीत हुई तो पापा ने मझसे कहा कि 12 मार्च तक मैं घर आ जाऊंगा। मेरी बीमारी को लेकर तुम लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। सलोनी बताती है कि पापा कुछ महीने पहले ही जेसीओ बने थे और जल्द ही उन्हें एक और प्रमोशन मिलनी थी, लेकिन शायद भगवान को ये मंजूर नहीं था। पापा से आखिरी बार 13 मार्च को बातचीत हुई थी। पापा ने मुझसे कहा था कि अब अच्छे से रहना, मैं जल्दी ठीक होकर आ जाऊंगा, भाई का ध्यान रखना। पापा से आखिरी बातचीत में अपने रिजल्ट के बारे में बताया था सुमन कुमार सिंह को मुखाग्नि देने वाले 14 साल के बेटे अंश ने बताया कि मैं आठवीं में पढ़ता हूं। हाल ही में मेरा रिजल्ट आया था। अंश ने बताया कि 25 मार्च को पापा से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने मुझसे रिजल्ट के बारे में पूछा था। मैंने अपना रिजल्ट बताया था तो पापा ने मुझे शाबाशी दी थी। वहीं, सुमन सिंह की पत्नी नीलम सिंह ने बताया कि पति ने तो देश के लिए अपना फर्ज निभा दिया, लेकिन अब में पत्नी का धर्म कैसे निभाऊंगी। अकेले अपने चार बच्चों को कैसे संभालूंगी। अभी तो बेटियों ने दुनिया देखना शुरू ही किया है, दोनों बेटे अभी स्कूल में ही हैं, लंबी जिंदगी है, भला आप मेरा साथ क्यों छोड़ गए। सुमन और नीलम सिंह के चार बच्चे हैं, जिसमें उनकी बड़ी बेटी 17 साल की सलोनी इंटर में जबकि छोटी बेटी 16 साल की स्नेहा इंटर में है। वहीं बेटों में बड़ा बेटा 14 साल का अंश आठवी में जबकि 13 साल का बेटा यश 7वीं में पढ़ाई कर रहा है। गांव के भतीजे ने कहा- चाचा ने कहा था, अगली बार आकर घर बनाऊंगा ग्रामीण रणधीर सिंह ने बताया कि सुमन जब भी गांव आते थे, अपनी फोर-व्हीलर गाड़ी में गांव के सभी लड़कों को साथ लेकर घूमते थे। वे इतने मिलनसार थे कि शादी-ब्याह हो या छोटा-मोटा आयोजन, वे हर किसी के सुख-दुख में शरीक होते थे। सुमन के भतीजे शुभम कुमार सिंह बताते हैं कि पिछली बार जब चाचा आए थे, तो कह रहे थे कि बेटा, अगली बार आऊंगा तो गांव में एक पक्का मकान बनाऊंगा। अभी हमारा घर छोटा है और भाई के साथ जॉइंट फैमिली में है। उन्होंने घर बनाने के लिए जमीन और नक्शे की बातें भी की थीं। लेकिन वह घर अब कभी नहीं बनेगा, क्योंकि उस घर की नींव रखने वाला शख्स ही आज पंचतत्व में विलीन हो गया। मंत्री श्रवण कुमार बोले- शहादत को देश और बिहार कभी नहीं भूलेगा सुमन कुमार सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जवान ने सरहद की हिफाजत करते हुए अपनी जान गंवाई है। उनकी शहादत को बिहार कभी नहीं भूलेगा। दुख की इस घड़ी में पूरा प्रदेश परिवार के साथ खड़ा है। सरकारी नियमों के अनुसार जो भी सहायता राशि और सुविधाएं मिलनी चाहिए, उन्हें सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, सुमन के चचेरे भाई आकाश, जो खुद सीआईएसएफ में सब-इंस्पेक्टर हैं, ने सरकार से मांग की कि सुमन भैया के नाम पर गांव में एक ‘शहीद स्थल’ या ‘शहीद यात्री शेड’ बनाया जाए। यह केवल एक संरचना नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह याद दिलाएगी कि मोकरमपुर का एक बेटे ने कैसे वतन की हिफाजत करते हुए अपनी जान मां भारती पर न्योछावर कर दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *