बरेली बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा बांदा में इस्लाम धर्म को लेकर दी गई टिप्पणी पर विवाद गहरा गया है। ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने दोटूक कहा कि एक धार्मिक व्यक्ति होने के नाते धीरेंद्र शास्त्री को दूसरे धर्मों का अपमान करने से बचना चाहिए, लेकिन वे लगातार भाषा की मर्यादा लांघ रहे हैं। निकाह और तलाक का मजाक उड़ाना गलत
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने इस्लाम के उसूलों, जैसे निकाह और तलाक का मजाक उड़ाया है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “हम एक धर्मगुरु के नाते उनका सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे हमारे मजहब पर निजी टिप्पणी करें। इस्लाम और उसके सिद्धांतों पर की गई ऐसी बयानबाजी करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँचाती है।” पहले टोपी वालों को धमकाया, अब सीधे धर्म पर वार
मुस्लिम धर्मगुरु ने शास्त्री के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए कहा कि वे पहले भी मुसलमानों को ‘टोपी वाले सुधर जाओ’ कहकर धमकाते रहे हैं। मौलाना ने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री अब सीधे इस्लाम मजहब को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम किसी दूसरे धर्म के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं देता, यही कारण है कि मुसलमान दूसरों के धार्मिक कार्यों में दखल नहीं देते। सुप्रीम कोर्ट के ‘हेट स्पीच’ फैसले का उल्लंघन
मौलाना बरेलवी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है, जब-जब इस्लाम को दबाने की कोशिश हुई, वह और नई ऊर्जा के साथ उभरा। उन्होंने कहा, “मुसलमान निजी हमले बर्दाश्त कर सकता है, पर अपने दीन (धर्म) पर हमला नहीं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि शास्त्री की यह बयानबाजी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें ऐसी बातों को ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में रखा गया है। विवाद की जड़: बांदा में शास्त्री का वह बयान
दरअसल, यह पूरा विवाद बांदा में धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था, “एक दूसरा धर्म हरिउल्लाह वाला है, वहां तीन बार बोलने पर तलाक हो जाता है। हमारे यहां 20-25 पेशी में भी नहीं होता।” शास्त्री ने यह भी कहा था कि “उनके यहां तो कटना ही कटना है, भगवान ही बचाए, हमें कुछ बोलना नहीं है वरना दंगा हो जाएगा।” उनके इसी बयान को अब मुस्लिम समाज अपमानजनक मान रहा है।