10 लाख रुपये की रिश्वत से जुड़े मामले में चंडीगढ़ सीबीआई अदालत ने आरोपी आयुष भल्ला की याचिका खारिज कर दी है। आयुष भल्ला ने अदालत में आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उसे मामले से जुड़े सभी दस्तावेज नहीं दिए हैं। इस पर विशेष जज भावना जैन ने कहा कि कानून के मुताबिक सीबीआई को सिर्फ वही दस्तावेज देने होते हैं, जिनका इस्तेमाल वह अदालत में केस साबित करने के लिए करेगी। जिन दस्तावेजों पर सीबीआई भरोसा नहीं कर रही, उनकी कॉपी देना जरूरी नहीं है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी, यदि चाहे, तो सीबीआई के मालखाने में रखे गए उन दस्तावेजों का नियमों के अनुसार स्वयं या अपने वकील के जरिए निरीक्षण कर सकता है। बचाव के लिए दस्तावेजों की मांग नहीं कर सकता अदालत ने कहा कि सरकारी वकील को सिर्फ वही दस्तावेज देने होते हैं, जिनका वह केस में इस्तेमाल कर रहा है। जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया जा रहा, उनकी केवल सूची देना ही कानून के अनुसार काफी है। जो रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है या जिसे निकाला नहीं जा सका, उसे देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप तय होने के समय आरोपी अपने बचाव के लिए दस्तावेजों की मांग नहीं कर सकता। अगर आगे चलकर किसी दस्तावेज की जरूरत पड़ती है, तो उस समय अलग से आवेदन किया जा सकता है। मोबाइल से निकाले डाटे कॉपी नहीं दी आयुष भल्ला की ओर से अदालत में कहा गया कि शिकायतकर्ता शिव कुमार शर्मा के मोबाइल फोन से निकाले गए पूरे डेटा की कॉपी उन्हें नहीं दी गई। 1 अगस्त 2018 की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके अलावा 1 अगस्त 2018 को लुधियाना स्थित पेंट हाउस रेस्टोरेंट की डीवीआर फुटेज, 2 अगस्त 2018 को आईजीपी कार्यालय में लगे वाई-फाई कैमरे की पूरी रिकॉर्डिंग और 7 अगस्त 2018 की कथित विजिट से जुड़ा ऑडियो-वीडियो भी नहीं दिया गया।
आरोप लगाया गया कि सीबीआई ने जरूरी रिकॉर्ड जानबूझकर छिपाया है। सीबीआई बोली फोन से मिला डाटा सौंप दिया सीबीआई ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन से जो भी जरूरी और सही डेटा मिला था, वह सभी आरोपियों को दे दिया गया है। पेंट हाउस रेस्टोरेंट की डीवीआर सीएफएसएल भेजी गई थी, लेकिन उसमें 1 अगस्त 2018 का कोई डेटा मौजूद नहीं मिला। होटल पार्क इन, सेक्टर-35 की डीवीआर से भी कोई डेटा रिकवर नहीं हो सका।
आईजीपी कार्यालय के वाई-फाई कैमरे से जो भी रिकॉर्ड सीएफएसएल से मिला, वह पहले ही आरोपियों को दिया जा चुका है। सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि 7 अगस्त 2018 की किसी विजिट से जुड़ा कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है। 2018 में दर्ज हुआ था रिश्वत का मामला सीबीआई ने इस मामले में 14 अगस्त 2018 को एफआईआर दर्ज की थी। केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7-ए के तहत दर्ज किया गया। शिकायत शिव कुमार शर्मा ने दी थी। सीबीआई के अनुसार, लुधियाना में अशोक गोयल को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। आरोप था कि यह रिश्वत तत्कालीन आईजीपी फिरोजपुर रेंज गुरिंदर सिंह ढिल्लों की ओर से मांगी गई थी। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 20 अप्रैल 2022 को अशोक गोयल, आयुष भल्ला और सतदेव जिंदल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद आईजीपी गुरिंदर सिंह ढिल्लों की भूमिका को लेकर धारा 173(8) के तहत आगे जांच की गई।
27 फरवरी 2023 को दाखिल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने लायक कोई सबूत नहीं मिले।