पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा ने पानीपत के सफीदों फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए नाबालिग बच्चे की कस्टडी पिता के पास ही रखी है। अदालत ने माना कि असली बायोलॉजिकल पिता ही सबसे अच्छा गार्जियन हो सकता है। इसलिए अदालत ने मामा की अपील को खारिज कर दिया। अक्सर पति पत्नी के लड़ाई झगड़े के मामले में बच्चों की कस्टडी मां को मिलती है, लेकिन यहां पर अदालत ने पिता को अच्छा गार्जियन मानते हुए यह कस्टडी पिता को दी है। वहीं अदालत ने मां की तरफ से दी सारी दलीलों को खारिज कर दिया है। महिला ने पिता के खिलाफ कराया था मुकदमा
महिला की तरफ से असंध पुलिस थाने में शिकायत देकर अपने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि पति ने नाबालिग बच्चे को जबरदस्ती घर से किडनैप कर लिया था। जिसे बच्चे के मामा (मां के भाई) ने पिता की कस्टडी से छुड़ाकर नाना-नानी के पास सौंप दिया था। अदालत में महिला के भाई की तरफ से दलील दी गई कि पति क्रिमिनल है, लेकिन अदालत ने इस दलील को भी नहीं माना। अब तीन पॉइंट में समझें पूरा मामला 1. 2024 में कनाडा गई महिला: नाबालिग बच्चे की मां 11 मई 2024 को पढ़ाई के लिए कनाडा चली गई थी। वह कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में रह रही है। जब वह भारत आती है तो अपने बच्चे से मिलती है। 2. 8 साल पुराना है पति-पत्नी का झगड़ा: 2018 में पत्नी की शिकायत पर पति के खिलाफ बच्चे को किडनैप करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से दोनों के बीच आपसी झगड़ा चल रहा है। 3. 10 साल से नाना-नानी के पास बच्चा: अदालत में बच्चे की मां के भाई की तरफ से दलील दी गई कि पिछले 10 साल से बच्चा नाना-नानी के पास रह रहा है। वे उसकी देखभाल के साथ-साथ पढ़ाई का पूरा खर्च भी उठा रहे हैं। तीन पॉइंट में जानिए अदालत की टिप्पणी 1. अदालत ने माना कि मां की तरफ से दर्ज कराए गए मामले में दोनों आरोपी बरी हो चुके हैं, इसलिए उन्हें क्रिमिनल कहना ठीक नहीं है। 2. मां की अनुपस्थिति में बायोलॉजिकल पिता ही बच्चे के लिए सबसे अच्छा व्यक्ति हो सकता है, खासकर जब बच्चा लड़का हो। 3. ट्रायल कोर्ट ने पिता के पक्ष में बच्चे की सिर्फ अंतरिम कस्टडी दी है। इससे यह साबित नहीं होता कि बच्चे की परमानेंट कस्टडी दी गई है।