नामधारी संप्रदाय के सतगुरु जगजीत सिंह की मौत के बाद उत्तराधिकार विवाद में ठाकुर दिलीप सिंह अब फंसते नजर आ रहे हैं। मोहाली के सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने ठाकुर दिलीप सिंह को भगोड़ा (PO) घोषित करने के लिए पब्लिक नोटिस जारी कर दिया है। केस नंबर 3(S)/2017 की सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोपी न तो कोर्ट में पेश हो रहा है और न ही अपना वर्तमान पता बता रहा है। यह आदेश 9 साल से चल रही जांच और आरोपी के लगातार गायब रहने के बाद आया है। कोर्ट ने ठाकुर दिलीप सिंह के पीओ घोषित करने के लिए बाकायदा पब्लिक नोटिस भी पब्लिश करवा दिए हैं। आरोपी को 8 अप्रैल तक कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। अगर ठाकुर दिलीप सिंह कोर्ट में तय तिथि तक पेश नहीं हुए तो उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जाएगा। ठाकुर दिलीप सिंह के खिलाफ 3 अलग-अलग थानों में केस दर्ज थे। माता चंद कौर की हत्या, सतगुरु उदय सिंह व माता चंद कौर के दामाद जगतार सिंह पर हमले की साजिश और नामधारी अवतार सिंह की हत्या में ठाकुर दिलीप सिंह का नाम आया। 2017 में ये तीनों मामले मर्ज कर सीबीआई को भेज दिए गए। सीबीआई ने चंडीगढ़ में मामला दर्ज कर इसकी जांच शुरू की, लेकिन ठाकुर दिलीप सिंह इस मामले में कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए। इसकी वजह से कोर्ट ने पीओ नोटिस जारी किया। भगोड़ा घोषित हुए तो CBI और पुलिस दिलीप सिंह की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए उनकी तलाश तेज की जाएगी। श्री भैणी साहिब में उत्तराधिकार को लेकर उपजे विवाद में सीबीआई की जांच… ठाकुर दिलीप सिंह कौन हैं?
ठाकुर दिलीप सिंह नामधारी संप्रदाय के दिवंगत सतगुरु जगजीत सिंह के बड़े भतीजे हैं। 5 अगस्त 1953 को भैणी साहिब (लुधियाना) में महाराज बीर सिंह के घर जन्मे दिलीप सिंह सिरसा स्थित अपने डेरे से नामधारी संगत के एक हिस्से का नेतृत्व करते हैं। 2012 में सतगुरु जगजीत सिंह की मौत के बाद उत्तराधिकार का विवाद भड़का। माता चंद कौर ने छोटे भाई उदय सिंह का समर्थन किया, जबकि दिलीप सिंह खुद गद्दी पर दावा कर रहे थे। इस विवाद ने संप्रदाय को दो गुटों में बांट दिया।