नालंदा में भगदड़- नौ मौतें कैसे हुईं:मंदिर का 90 हजार का कॉन्ट्रैक्ट, श्रद्धालुओं से 3 लाख वसूलने थे, बांस लगाकर रोका, भीड़ बेकाबू हुई

नालंदा के मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को 25 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद थी। मंदिर के पुजारी दिलीप पांडे ने 24 घंटे के लिए 90 हजार रुपए में मिथिलेश पांडे को मंदिर का ठेका दे दिया। टारगेट था श्रद्धालुओं से एक दिन में 3 लाख रुपए कमाना। इसके लिए मंदिर के एग्जिट गेट भी बंद कर दिए गए और श्रद्धालुओं की जान दांव पर लगा दी गई। यह खुलासा दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में हुआ है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और जानिए कि मंदिर के अंदर अचानक ऐसा क्या हुआ कि भगदड़ मच गई? मंदिर के पुजारियों से ऐसी कौन-सी चूक हुई, जिसकी वजह से 9 लोगों की जान चली गई। मंगलवार सुबह 9:30 बजे नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़ मची, जिसमें 8 महिला समेत 9 लोगों की मौत हो गई। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार होने की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ काफी ज्यादा थी। दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि मंदिर के पुजारियों ने श्रद्धालुओं से 3 लाख रुपए कमाने का टारगेट रखा था। इसके लिए पुजारी पिछले दरवाजे से पैसे लेकर श्रद्धालुओं को एंट्री दे रहे थे। भीड़ लगातार बढ़ रही थी, लेकिन पुजारी पैसे वसूलने में व्यस्त थे। VIP एंट्री के लिए 500 से 1000 रुपए की डिमांड सबसे पहले रिपोर्टर मंदिर के उस स्थान पर पहुंचा, जहां भगदड़ मची थी और लोगों की मौत हुई थी। घटना स्थल मंदिर परिसर से लगभग 1 फीट गहरा था। रिपोर्टर ने चश्मदीदों से मिलकर यह जानने की कोशिश की कि भगदड़ की शुरुआत कैसे हुई। मौके पर मौजूद संतोष कुशवाहा ने बताया कि श्रद्धालुओं को रोकने के लिए मंदिर के मुख्य गेट को बांस से घेर दिया गया था। बांस को नारियल की रस्सी से बांधा गया था। वहां मंदिर के वॉलेंटियर अनुज पांडे और अवधेश पांडे खड़े थे। दोनों वॉलेंटियर बांस खोलकर एक बार में 20-25 श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दे रहे थे। दूसरी तरफ, मंदिर के पिछले दरवाजे पर पुजारी 500-1000 रुपए लेकर VIP एंट्री दे रहे थे। इसके कारण मंदिर के सामने लंबी लाइन लगती चली गई। जब भी वॉलेंटियर बांस खोलकर श्रद्धालुओं को अंदर जाने देते, लाइन में लगे दूसरे लोग धक्का-मुक्की करते हुए भीतर घुसने की कोशिश करने लगते थे। जहां बांस बांधा गया था, वह स्थान करीब एक फीट गहरा था। इसी वजह से धक्का-मुक्की के दौरान कई श्रद्धालु असंतुलित होकर नीचे गिरने लगे, जिससे हालात और बिगड़ गए। भीड़ के दबाव से रस्सी टूटी, एक के बाद एक गिरने लगे श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह में पिछले दरवाजे से एंट्री दी जा रही थी, जिसके कारण मुख्य लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा था। जो श्रद्धालु गर्भगृह में पहुंच रहे थे, उनसे बिना पैसे लिए पुजारी पूजा नहीं करने दे रहे थे। इस कारण अंदर से बाहर निकलने में भी अधिक समय लग रहा था। ऐसे में बाहर लाइन में खड़े श्रद्धालु लगातार धक्का-मुक्की कर मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इससे बांस पर लगातार दबाव पड़ रहा था। बार-बार दबाव पड़ने से बांस को बांधने वाली रस्सी टूट गई। रस्सी टूटते ही लाइन में खड़े हजारों श्रद्धालु एक साथ गर्भगृह की ओर बढ़ गए। इसकी वजह से कई महिलाएं असंतुलित होकर गिर गईं। पीछे से आ रही भीड़ उनके ऊपर चढ़ती चली गई, जिससे करीब डेढ़ दर्जन महिलाएं और पुरुष दब गए। इधर मंदिर के दोनों एग्जिट गेट पर अन्य पुजारी पैसे लेकर वीआईपी एंट्री देने में लगे हुए थे। गर्भगृह के दोनों गेट बंद थे, जिसकी वजह से गर्भगृह में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। अफरा-तफरी के बीच लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए। जो नीचे दब गए, उनकोउठने का मौका नहीं मिला। रामसूरत सिंह ने बताया कि मंदिर में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोग आगे बढ़ने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे थे। इसी दौरान वहां मौजूद वॉलेंटियर्स श्रद्धालुओं पर लाठियां भांजने लगे। इससे भीड़ और ज्यादा अनियंत्रित हो गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। मंदिर के निकास द्वार पर भी भारी भीड़ जमा थी, जिससे गर्भगृह में मौजूद श्रद्धालु अंदर ही फंस गए थे। भास्कर रिपोर्टर जब मंदिर परिसर में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि मंदिर में एक एंट्री गेट और दो एग्जिट गेट हैं। मंदिर के गर्भगृह में एक समय में मुश्किल से 20-25 लोग ही जा सकते हैं। इन्वेस्टिगेशन के दौरान यह सामने आया कि मंदिर के पुजारियों ने दोनों एग्जिट गेट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए थे और वहां से VIP एंट्री दी जा रही थी। जिसके कारण आम श्रद्धालुओं की लाइन लगातार लंबी होती गई। यह लाइन करीब 1 किलोमीटर तक पहुंच गई थी, जिसमें लगभग 5 हजार लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। बिना पैसे लिए पुजारी करने नहीं देते पूजा मंदिर में गुड्डू पासवान नाम का एक युवक मिला, जो घटना के दौरान वहीं मौजूद था। गुड्डू ने बताया कि मंदिर के पुजारी बिना पैसे लिए न तो पूजा कराते हैं और न ही माता का दर्शन करने देते हैं। मंदिर के पीछे की ओर खुलने वाले एग्जिट गेट पर पुजारी खड़े होकर पैसे लेने के बाद ही श्रद्धालुओं को अंदर जाने दे रहे थे। वीआईपी एंट्री के कारण ही भीड़ लगातार बढ़ती चली गई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की लाइन और लंबी होती गई। गुड्डू के मुताबिक, पुजारी हर श्रद्धालु से पैसे मांग रहे थे, जिसके कारण पुजारियों से कई श्रद्धालुओं का विवाद हुआ। इसी दौरान बांस के बाहर खड़े लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर बाद बांस की रस्सी अचानक टूट गई। भीड़ में आगे खड़े श्रद्धालु गर्भगृह की सीढ़ियों पर गिर पड़े और पीछे से आ रही भीड़ उन्हें कुचलते हुए आगे बढ़ गई। अफरा-तफरी के बीच भीड़ छंटी, तो जगह-जगह लाशें बिखरी पड़ी थीं। गुड्डू ने बताया, वह मंजर बेहद डरावना और भयावह था। नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़ को लेकर अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग वजहें बताईं। कुछ लोगों का कहना है कि भीड़ में एक महिला की मौत की अफवाह फैल गई, जिसके बाद लोग पीछे हटने लगे। इसी दौरान कुछ लोग धक्का-मुक्की करते हुए आगे बढ़ने लगे, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई। वहीं, घटना के समय मौके पर मौजूद पूजा देवी ने बताया कि एक महिला पूजा करने के लिए झुकी, उसके गले से किसी ने सोने की चेन चुरा ली। जब महिला को इसका पता चला, तो उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। यह देखकर आसपास की महिलाएं भी अपने गहने जांचने लगीं। इसी बीच पीछे से अचानक तेज धक्का लगा और बांस टूट गया। बांस टूटते ही लाइन में लगी भीड़ तेजी से अंदर घुसने लगी और लोग एक-दूसरे पर चढ़ते चले गए, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। महिला का ये भी कहना है कि बिना पैसे लिए नारियल तक फोड़ने नहीं दिए जाते। एक नारियल फोड़ने के 100 रुपए लिए जाते हैं। नारियल फोड़ने के लिए भी गर्भगृह में भारी भीड़ मौजूद थी। हर दिन अलग-अलग पुजारी कराते हैं पूजा, रेट भी तय अब सवाल था कि मंदिर के पुजारी पिछले दरवाजे से एंट्री क्यों दे रहे थे और बिना पैसे लिए पूजा क्यों नहीं करवा रहे थे। इस पॉइंट पर जब भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन किया तो पता चला कि मंदिर को हर दिन अलग-अलग लोगों को पैसे पर ठेका दिया जाता है। पुजारी इस कोशिश में रहते हैं कि ठेके में लगाया गया पैसा एक ही दिन में वसूल लिया जाए। इसी वजह से हर दिन अलग-अलग पुजारी का टर्म रहता है। मंगलवार को दिलीप पांडे का पूजा कराने का टर्म था। जब दिलीप पांडे से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है। गांव में करीब 60 ब्राह्मण परिवार हैं, जो इस मंदिर में पूजा कराते हैं। अलग-अलग दिन अलग-अलग परिवारों की बारी होती है। पहले यह जिम्मेदारी एक ही परिवार के पास थी, लेकिन जैसे-जैसे परिवार बढ़ता गया, वैसे-वैसे आपसी सहमति से अलग-अलग दिनों का बंटवारा कर लिया गया। मंदिर के सामने दुकान चलाने वाले अजय ने बताया कि मंदिर पर गांव के ही कुछ पंडितों का कंट्रोल है। इनके साथ ही पूजा कराने के लिए अलग-अलग दिनों की टर्म तय रहती है। जिस दिन जिस पंडित की बारी होती है, उस दिन वह पूजा कराने का अधिकार अपने पास रखता है। अजय के अनुसार, इन पंडितों के बीच आपस में बोली भी लगती है। जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है, उसे उस दिन का अधिकार मिल जाता है। इसके बाद वह अधिक कमाई के लालच में बिना पैसे लिए किसी भी श्रद्धालु को पूजा नहीं करने देता है। ज्यादा कमाने के लिए पुजारी VIP एंट्री करवाते हैं वहीं, घटना के दौरान मौके पर मौजूद मघड़ी गांव के संतोष कुशवाहा ने बताया कि भले ही गांव के अलग-अलग परिवारों का अलग-अलग दिन टर्म आता है, लेकिन सभी परिवार मंदिर में पूजा कराने नहीं आते। कुछ ही परिवार नियमित रूप से पूजा कराते हैं। जिस दिन जिस परिवार का टर्म होता है, उस दिन वे आपस में बोली लगाते हैं और फिर कोई एक व्यक्ति या पुजारी उस दिन का ठेका ले लेता है। जिस परिवार का टर्म रहता है, वह एक दिन के लिए करीब 1 लाख रुपए तक की बोली लगाता है। इसके बाद ठेका लेने वाले पुजारी कोशिश करते हैं कि एक ही दिन में इससे ज्यादा रकम वसूल सकें। मंगलवार को चैत्र महीने का आखिरी मंगलवार होने के कारण भीड़ ज्यादा होने की उम्मीद थी, इसलिए 90 हजार रुपए की बोली लगी थी। बोली की रकम से ज्यादा कमाई करने के लिए पुजारी पिछले दरवाजे से श्रद्धालुओं को एंट्री दे रहे थे और हर व्यक्ति से पैसे वसूल रहे थे। बिना पैसे लिए किसी को पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। इससे मंदिर के सामने भीड़ लगातार बढ़ती गई। स्थिति और गंभीर तब हो गई, जब अंदर भीड़ पहुंचने के बावजूद निकास के दोनों गेट बंद थे। अगर दोनों गेट खुले होते, तो भीड़ आसानी से बाहर निकल सकती थी, लेकिन गेट पर पुजारी खड़े थे, जिसके कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए और हालात बेकाबू हो गए। भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत का वीडियो सामने आया इधर, इस भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत का वीडियो भी सामने आया है। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं जमीन पर पड़ीं दिख रही हैं। लोग उन्हें उठाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान कुछ लोग लोगों को आगे धक्का देते दिखाई दे रहे हैं। कुछ महिलाएं बांस की बैरिकेडिंग को पकड़कर बचने की कोशिश कर रही हैं। लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही हैं। लोग कह रहे हैं डरो मत, आओ, हाथ दो। घबराओ मत। अरे उसे पहले बचाओ। मंदिर अध्यक्ष, सचिव-कोषाध्यक्ष समेत 40 पर FIR वहीं, दीपनगर थाने की पुलिस अधिकारी मौसमी कुमारी के लिखित आवेदन पर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत 20 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। आरोपितों पर गैर इरादतन हत्या का आरोप लगा है।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज से अज्ञात आरोपितों की पहचान कर रही है। घटना के बाद पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने गर्भगृह के पास जानबूझकर अवरोध पैदा किया गया ताकि अवैध वसूली की जा सके। भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई। अब तक इस मामले में नामजद पुजारी अनुज कुमार पांडे, अवधेश कुमार मिश्रा, विवेकानंद पांडे, निरंजन कुमार पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पूरी खबर पढ़ें… ————————————- ये खबर भी पढ़ें… नालंदा भगदड़ में 9 मौतें- लापरवाही के 5 जिम्मेदार चेहरे:DM-SP राष्ट्रपति के कार्यक्रम में व्यस्त, थाना प्रभारी भीड़ देखने नहीं गए, मंदिर वाले पैसे वसूलते रहे नालंदा के शीतला माता मंदिर में मंगलवार (31 मार्च) को भगदड़ हुई। इसमें 9 लोगों की मौत हो गई। सुबह 9.30 बजे हादसा हुआ और शाम होते-होते प्रशासन की तरफ से सबकुछ सामान्य दिखाने की कोशिश की गई। मृतकों के परिजन को मुआवजा राशि दी गई। मंदिर में संध्या आरती भी की गई। मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा में राष्ट्रपति के दौरे के चलते जब पूरा इलाका हाई अलर्ट पर था, उस वक्त हुए इस हादसे के बाद प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पूरी खबर पढ़ें…

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