निचलौल रेंज के सबया, रमपुरवा, जहदा, सोहट, कमता, संडा, लोढ़िया, गुरली,कटहरी, दुर्गवालिया, गौरा निपनिया, कोल्हुआ, बड़हरा चरगहा और पकड़ी भारत खंड सहित कई गांवों के ग्रामीण इन दिनों बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में बंदरों के झुंड ने ग्रामीणों का जीवन मुश्किल कर दिया है, जिससे फसलों और पेड़-पौधों को भारी नुकसान हो रहा है। बंदरों के झुंड विशेष रूप से सब्जियों की फसलों को निशाना बना रहे हैं। इनमें नेनुआ, लौकी, भिंडी, सरपुतिया और कद्दू जैसी सब्जियां शामिल हैं, जिन्हें भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा, अमरूद के छोटे फल, फूल और पेड़ों की डालियों को भी तोड़कर बर्बाद किया जा रहा है। ग्रामीण अपनी फसलों और घरों की सुरक्षा के लिए दिन भर लाठी, डंडे और गुलेल लेकर रखवाली कर रहे हैं। बंदरों के डर से बच्चों को छतों पर जाने से भी रोका जा रहा है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अब जंगल छोड़कर गांवों में अपना बसेरा बना चुके हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। चंदन सिंह सौरभ, कौशल चौधरी, भोला, श्रवण, पप्पू मद्देशिया, राजकुमार कुशवाहा, गरिजेश कुशवाहा, राजकुमार राय, कोमल भारती, शरीफ अली और विजय साहनी जैसे कई ग्रामीणों ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है।