पंचकूला में किसान के खेत से 21 पेड़ बरामद:विवाद के बाद वन विभाग सक्रिय, 4 लोगों के खिलाफ FIR

हरियाणा के पंचकूला में 10 हजार पेड़ कटने की बात को लेकर खुलासा करने वाले वन दरोगा को सस्पेंड किया गया है, लेकिन निलंबित वन दरोगा के धरने पर बैठ जाने और वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग हरकत में आया है। एक किसान के खेत से 21 पेड़ बरामद किए गए हैं। पंचकूला में वन विभाग के दरोगा रमेश कुमार ने बताया कि 9 मार्च को उनकी टीम ने गुप्त सूचना के आधार खडकुआ गांव के किसान गुरबचन के खेत में उनकी टीम ने छापा मारा। जिसमें टीम को आम के पेड़ नीचे खैर की लकड़ी मिली। जिसमें करीब 21 पेड़ों को घास-फूस के नीचे छिपाया गया था। निरीक्षण करने पर केवल 5 पेड़ कटे मिले वन विभाग की टीम ने 10 मार्च को टीम ने खडकुआ गांव के साथ लगते बीड शिकारगाह, वन्य प्राणी विहार के साथ लगते एरिया में निरीक्षण किया। जहां पर खैर के 5 पेड़ काटे हुए मिले। अवैध तौर पर लकड़ी काटने के मामले की जांच की गई, तो पता चला कि इसमें गुरबचन निवासी खडकुआ, जाति लुबाना, मलकीत निवासी खडकुआ, हैप्पी निवासी टांडीवाला, रवि निवासी हरिपुर गांव के साथ अन्य लोग भी शामिल हैं। मामले की जांच चल रही- ASI पंचकूला के पिंजौर थाना में जांच अधिकारी ASI रोशनलाल ने बताया कि वन विभाग की शिकायत पर धारा 303(2),62,324(4) BNS धारा 32,33 भारतीय वन विभाग अधिनियम सन 1927 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच चल रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यहां जानिए क्या है पूरा मामला… 26 फरवरी को पेड़ों के खैर के कटे होने का मामला सामने आया था। जब फॉरेस्टर विजय कुमार ने पेड़ों को काटे जाने का वीडियो वन मंत्री राव नरबीर के करीबी को भेजा था। हालांकि इसके बाद ही फॉरेस्टर विजय कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था। मामले के खुलासे के बाद 3 मार्च को पंचकूला के आसरेवाली क्षेत्र में खैर काटे जाने की मामले की पांच तक जांच चली थी। जांच में ये भी बात सामने आई थी कि खैर के पेड़ों को साइलेंट कटर से रात में काटा गया। इसके बाद 70 के करीब ऊंटों से इस बेशकीमती खैर की लकड़ी की तस्करी की गई। बाद में सबूत मिटाने के लिए पेड़ों के ठूठ जलाने का भी प्रयास किया गया। फॉरेस्टर विजय कुमार ने कहा… वन विभाग में ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा खोखला है, क्योंकि तस्कर पकड़े जाने के अगले ही दिन गाड़ियां छुड़ा लेते हैं और ईमानदार कर्मचारियों को वीआरएस (VRS) तक नहीं दिया जा रहा।

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