पंचकूला नगर-निगम के 150 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले के तार अब करनाल तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। कल शाम से चंडीगढ़ पुलिस करनाल की चौधरी कॉलोनी में डेरा डाले हुए है और मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। सूत्रों की माने तो पुलिस रात से ही एक महिला अधिकारी के बारे में आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। वहीं कॉलोनी में ही घर के बाहर खड़ी चंडीगढ़ के VIP नम्बर वाली XUV 500 गाड़ी उसी महिला अफसर की है जो गाड़ी को यहीं पर खड़ी करके फरार बताई जा रही है। पुलिस उसी महिला अधिकारी को ढूंढने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने करनाल छापेमारी कर रही है। हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी का मामले में कोई बयान सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं और कई अहम खुलासे हो रहे है। आरोपी के खाते में पहुंचे 70 करोड़ रुपए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मामले में आरोपी रजत डागर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि नगर निगम के पैसों में की गई हेराफेरी के तहत करीब 70 करोड़ रुपए रजत डागर के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद रजत डागर ने यह रकम कई बिल्डर्स और निजी लोगों के खातों में आगे ट्रांसफर कर दी। यह खुलासा जांच एजेंसी ने कोर्ट में रिमांड की मांग के दौरान किया। कोर्ट ने दिया 6 दिन का रिमांड जांच एजेंसी ने रजत डागर के लिए 10 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन कोर्ट ने 6 दिन का रिमांड मंजूर किया। रजत डागर के वकील नीरज कुमार ने बताया कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोपों के दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं, इसलिए कोर्ट से कम अवधि का रिमांड देने की गुजारिश की गई थी। मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस रिमांड पर पहला आरोपी पंचकूला की एक स्थानीय अदालत ने दिलीप कुमार राघव को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। जांच में इस केस का उत्तर प्रदेश कनेक्शन भी सामने आया है। एसीबी सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में नकली स्टांप का भी इस्तेमाल किया गया है, हालांकि अभी तक उनकी बरामदगी नहीं हो सकी है। राघव को उत्तर प्रदेश के कासगंज ले जाकर बरामदगी के प्रयास किए जाएंगे। जांच में सहयोग नहीं कर रहा आरोपी जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि दिलीप कुमार राघव पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है और जानकारी छिपाने की कोशिश कर रहा है। एजेंसी का कहना है कि उससे हर लेन-देन के साथ-साथ नगर निगम और बैंक के अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर पूछताछ की जानी है। साथ ही फर्जी मुहर लगे पत्र, वाउचर और चेक के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी आई सामने जांच में सामने आया कि पंचकूला नगर निगम के रिकॉर्ड और बैंक रिकॉर्ड में भारी अंतर है। नगर निगम के अनुसार, कोटक महिंद्रा बैंक सेक्टर-11 पंचकूला में 145.03 करोड़ रुपए की 16 सावधि जमा थीं, जिनकी परिपक्वता राशि 158.02 करोड़ रुपए थी। इनमें से 11 एफडी 16 फरवरी, 2026 को मैच्योर हो गई थीं, जिनकी कुल राशि 59.58 करोड़ रुपए थी। खाते में 50 करोड़ की जगह मिले सिर्फ 2.18 करोड़ 16 मार्च, 2026 को प्राप्त बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, 13 मार्च को खाते में अपेक्षित 50.07 करोड़ रुपए के बजाय सिर्फ 2.18 करोड़ रुपए ही मौजूद थे। वहीं 18 मार्च, 2026 तक खातों में कुल शेष राशि 12.86 करोड़ रुपए बताई गई। बैंक ने यह भी कहा कि कोई एफडी चालू नहीं है, जो निगम के रिकॉर्ड से पूरी तरह अलग है। चार खातों की डिटेल खंगाली जांच एजेंसी ने कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद चार खातों के लेन-देन की जांच की है। इनमें खाता संख्या 2015073031 (28 मई, 2020 से 25 मार्च), 2046279112 (8 जून, 2022 से 25 मार्च), 2013457703 (27 अक्टूबर, 2018 से 25 मार्च) और 2046903758 (26 अगस्त, 2022 से 25 मार्च) शामिल हैं। दो लोगों ने उठाया बड़ा फायदा जांच में दो ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें इस घोटाले से बड़ा आर्थिक लाभ मिला। इनमें से एक रजत डागर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसने 60 करोड़ रुपए से अधिक राशि मिलने की बात स्वीकार की है। वहीं दूसरा संदिग्ध अभी जांच में शामिल नहीं हुआ है। इस बीच, जांच एजेंसी ने पंचकूला नगर निगम के वरिष्ठ लेखा अधिकारी से भी पूछताछ की है।