पंचकूला में प्रकाशन समूह एसोसिएटिड जनरल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लॉट आवंटन करने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को हाईकोर्ट ने आरोप तय किए जाने के खिलाफ याचिका स्वीकार कर ली। CBI की स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ एजेएल और हुड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें स्पेशल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने फैसले में कहा कि बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं हो रहे। ऐसे में कोर्ट ने आरोप तय करने के आदेशों को खारिज कर दिया। बता दें कि यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर के सरकारी भूखंड आवंटित करने से संबंधित है। इस केस में सीबीआई ने हुड्डा समेत एचएसवीपी के 4 वरिष्ठ अधिकारियों को भी आरोपी बनाया था। हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया था। जानिए क्या था पूरा मामला… भाजपा सरकार में केस दर्ज हुआ
प्रदेश में 10 साल हुड्डा सरकार रही। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी। 5 मई 2016 को हरियाणा राज्य की विजिलेंस ब्यूरो ने इस विषय में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को 4 अप्रैल 2017 में सौंप दी गई। CBI ने भी अपना केस रजिस्टर्ड किया था। विजिलेंस ने हुड्डा के अलावा 4 अफसरों को आरोपी बनाया
हरियाणा विजिलेंस ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हड्डा समेत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के 4 वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। बाद में ईडी ने इसी एफआईआर को संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। इनके खिलाफ भूखंड के पुनः आवंटन में अनियमितता बरतने का आरोप है। हुड्डा उस समय मुख्यमंत्री के रूप में हुडा (हरियाणा अर्बन डवलेपमेंट अथॉरिटी) के पदेन अध्यक्ष थे। उधर, जब जमीन वापस ली गई तब तर्क दिया गया कि उस पर निर्माण नहीं हुआ था। साल 2005 में फिर से उसी माप के साथ उसी कीमत पर (पुराने रेटों पर) आवंटित कर दी गई थी।