अमृतसर के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग ने एक्सरसाइज से अपने घुटने ठीक कर सबको चौंका दिया है। बुजुर्ग के बेटे ने दावा किया है कि ट्रांसफॉर्मर गिरने से फ्रैक्चर हुए उसके पिता के पैरों को उसने पहले जैसा कर दिया है। इसमें करीब 6 महीने का समय लगा। कनाडा में जिम चलाने वाले फिटनेस ट्रेनर कुलविंदर सिंह सोढी का कहना है कि उन्होंने पिता बलविंदर सिंह सोढी को कनाडा बुलाकर जिम में एक्सरसाइज करवाई। उन्हें प्रोटीनयुक्त खाना खिलाया। इससे न केवल पिता के घुटने ठीक हुए, बल्कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग कॉम्पिटीशन में गोल्ड मेडल भी जीत लिया। अब वह साइकिलिंग करते हैं और 90 किलो वजन के साथ बेंच प्रेस भी लगाते हैं। कुलविंदर ने बताया कि ड्यूटी के दौरान ट्रांसफॉर्मर पिता के घुटनों पर गिर गया था। इससे दोनों पैरों में फ्रैक्चर हुआ और घुटनों में आर्थराइटिस हो गया। दर्द इतना तेज था कि वह ठीक से चल-फिर नहीं पाते थे। डॉक्टरों ने घुटनों की सर्जरी की सलाह दी थी। हालांकि, हमने सर्जरी न कर यह रास्ता अपनाया। सिलसिलेवार ढंग से पढ़ें बुजर्ग के ठीक होने की कहानी… 2010 में घुटनों पर गिर गया था ट्रांसफॉर्मर
मूल रूप से अमृतसर एरिया के रहने वाले बुजुर्ग ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (PSEB) में 40 साल तक लाइनमैन के रूप में नौकरी की। 2010 में ड्यूटी के दौरान वैन में अचानक ब्रेक लगने से ट्रांसफॉर्मर उनके घुटनों पर गिर गया। इस चोट से दोनों घुटने घायल हुए और गंभीर आर्थराइटिस हो गया। उनके घुटनों में इतना तेज दर्द होता था कि 15 सालों में वे ठीक से चल-फिर नहीं सके। डॉक्टरों ने बार-बार कहा कि दोनों घुटनों की सर्जरी (नी रिप्लेसमेंट) करानी पड़ेगी। कोई दवा, फिजियोथेरेपी या इलाज काम नहीं कर रहा था। जुलाई-अगस्त 2025 में कनाडा बुलाया
कुलविंदर ने बताया कि उन्होंने पहले 2 महीने का कहकर पिता को कनाडा आने के लिए मनाया। इसके बाद जुलाई-अगस्त 2025 में वह कनाडा आए। उन्होंने जिम में ट्रेनिंग शुरू की। शुरुआती दौर में सिर्फ हल्की मोबिलिटी एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और बेसिक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर ही जोर दिया गया। घुटनों पर ज्यादा दबाव न पड़े, इसके लिए सही टेक्नीक और फॉर्म सिखाया गया। साथ ही प्रोटीन से भरपूर खुराक दी। इन प्रयासों से दर्द में थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन अभी भी चलने-फिरने में तकलीफ बनी रही। 3 महीने बाद मसल बिल्डिंग एक्सरसाइज शुरू करवाई
कुलविंदर ने बताया कि 3 महीने पूरे होने तक यानी सितंबर 2025 में ट्रेनिंग को अगले लेवल पर पहुंचाया। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और मसल बिल्डिंग की एक्सरसाइज बढ़ा दी गईं। वजन घटाने का सिलसिला भी शुरू हुआ और पिता ने 10 पाउंड यानी लगभग 4.5 किलो फैट कम कर लिया। घुटनों का दर्द 80-90 प्रतिशत तक कम हो गया। पहली बार उन्हें साइकिल चलाने और घुटनों को मोड़ने में आसानी महसूस हुई। बेंच प्रेस का वजन बढ़कर 75 किलो तक पहुंच गया। इसी दौरान कुलविंदर ने पिता को पहली पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता (दिसंबर 2025) के लिए तैयार करना भी शुरू कर दिया। 6 महीने बाद नजर आया मेहनत का रिजल्ट
कुलविंदर ने बताया कि 6 महीने पूरे होने पर यानी दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक रूटीन ट्रेनिंग, मोबिलिटी वर्क, सही न्यूट्रिशन और पूरी रिकवरी के साथ मेहनत का रिजल्ट सामने आया। लगभग 9 किलो वजन कम हुआ, कमर 7 इंच कम हो गई। घुटनों का दर्द लगभग पूरी तरह खत्म हो गया और अब सर्जरी की कोई जरूरत नहीं रह गई। ताकत इतनी बढ़ गई कि 62 साल का बुजुर्ग 120 किलो की डेडलिफ्ट और 90 किलो की बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज करने लगा। पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता
कुलविंदर ने बताया कि पिता ने अपनी पहली पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीता। बुजुर्ग ने कहा- अब मैं आत्मविश्वास से चलता हूं। पहले की तरह महसूस होता है। इसी दौरान कुलविंदर ने अपनी मां का भी ट्रांसफॉर्मेशन किया। उनकी डायबिटीज, आर्थराइटिस और यूरिक एसिड की समस्या काबू में आई। मां ने 32 पाउंड वजन कम किया, 9 इंच कमर घटाई और अब दौड़-भाग भी सकती हैं। कुलविंदर बोले- उम्र केवल संख्या, एक्सरसाइज न छोड़ें
कुलविंदर ने पिता की रिकवरी पर कहा कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। अगर सही जज्बा, मेहनत और मार्गदर्शन हो तो शरीर किसी भी उम्र में वापस मजबूत हो सकता है। कुलविंदर ने पिता बलविंदर सिंह का सोशल मीडिया पर एक मोटिवेशनल वीडियो शेयर किया। इसमें वह भारी वजन उठाते नजर आ रहे हैं। जिम में एक्ससाइज करते, कार्डियो करते और बेंच प्रेस लगाने नजर आते हैं। कुलविंदर ने कहा कि वह कनाडा के ओंटारियो में 2 जिम चलाते हैं। एक मिसिसॉगा और दूसरा ब्रैम्पटन में। यहां वह हजारों लोगों को एक्सरसाइज के लिए मोटिवेट कर रहे हैं। कुलविंदर का कहना है कि पिता का वीडियो बनाने का मकसद उन लाखों लोगों को मोटिवेट करना है जो उम्र से हारकर दर्द में जी रहे हैं। पिता को कनाडा बुलाया, फिर पैरों पर खड़ा करने का किया वादा
कुलविंदर ने बताया कि पिता अब पहले की तरह दौड़ सकते हैं। तेजी से गाड़ी में बैठ सकते और उतर सकते हैं। बिना स्टिक की मदद से चल सकते हैं। भारी सामान उठा सकते हैं। ये सब उनकी रेगुलर एक्सरसाइज से संभव हो पाया है। एक्सरसाइज की कोई उम्र नहीं होती। सभी को हर उम्र में एक्सरसाइज कर बीमारियों पर कंट्रोल रखना चाहिए।