वृंदावन में हुए नाव हादसे में 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इन सभी को लुधियाना के जगराओं का बांके बिहारी क्लब धार्मिक यात्रा पर लेकर गया था। जिसे आज से करीब 9 साल पहले दो सगे भाइयों और उनके एक दोस्त ने मिलकर बनाया। इसी हादसे में इन दो भाइयों में से एक की भी मौत हो गई। 16-17 साल की उम्र में मंदिरों में संकीर्तन से शुरुआत की। फिर तीनों ने मिलकर इस क्लब को बनाया। इसका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे क्लब से लोग जुड़ते चले गए। क्लब घर-घर संकीर्तन करता है। 5 साल पहले इन्होंने वृंदावन की यात्रा करवानी शुरू की। इस बार वह 9 अप्रैल को 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को वृंदावन ले गए थे। हर श्रद्धालु से साढ़े 4 हजार रुपए लिए गए। 10 अप्रैल को हादसा हो गया। जिसमें 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। पढ़िए कब बांके बिहारी क्लब बना और कैसे इससे लोग जुड़े… क्लब बनने से लेकर यात्राएं करवाने तक की कहानी… ———- ये खबरें भी पढ़ें: आखिरी 7 मिनट की कहानी, लुधियाना का श्रद्धालु बोला- मेरे सामने पत्नी-बेटा डूबा, मैं कुछ नहीं कर पाया लुधियाना के रहने वाले विजुय कुमार ने बतााय कि मैं खुद अपने परिवार को यमुना में डूबते हुए देखता रहा और कुछ नहीं कर सका। इस हादसे में मैंने अपना बेटा, पत्नी समेत परिवार के 9 सदस्य खो दिए। कुछ मिनटों में ही खुशियों से भरी यात्रा मातम में बदल गई और हमारी दुनिया उजड़ गई। (पढ़ें पूरी खबर) वृंदावन नाव हादसा, 5 चिताएं एकसाथ जलीं: अबोहर के युवक की लाश मिली, लुधियाना की युवती लापता, अब तक 13 मौतें वृंदावन नाव हादसे में मारने वाले 5 लोगों की लुधियाना के जगराओं में एक साथ चिताएं चलीं। इसमें कविता बहल, चरणजीत, मधुर बहल, पिंकी बहल और ईशान कटारिया शामिल हैं। मधुर बहल के परिवार ने राधा-राधा कहकर उनको अंतिम विदाई दी। (पढ़ें पूरी खबर)