पंजाब में फिर घिरी BJP:कृषि कानून, सीनेट-सिंडिकेट के बाद उठा चंडीगढ़ का मुद्दा, 26 का प्रदर्शन लेगा नई दिशा

केंद्र सरकार चंडीगढ़ को धारा 240 के अधीन लाने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में बिल लाने जा रही है। इससे भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में सियासी जमीन पर पैर रखने में मुश्किल हो सकती है। पहले तीन कृषि कानूनों की भरपाई में लगी भाजपा के समक्ष सीनेट-सिंडिकेट को भंग करने का विवाद खड़ा हुआ था। अब इस मुद्दे की वजह से फिर पंजाब BJP को बैकफुट पर आना पड़ सकता है। 25 नवंबर तक सीनेट के चुनाव का ऐलान नहीं होने पर 26 को यूनिवर्सिटी बंद करने का ऐलान पहले ही हो चुका है। भाजपा के प्रदेश और जिला कार्यालयों का घेराव करने का प्रोग्राम बनाया जा रहा है। यही नहीं 26 को ही किसान ने कृषि कानूनों के प्रदर्शन की तिथि मनाने भी चंडीगढ़ आ रहे हैं। उससे पहले यूटी का स्टेट्स बदलने की जानकारी सामने आना भाजपा के लिए परेशानी भरा है। सीएम मान ने जताई आपत्ति वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी इस पर आपत्ति जताई है। सीएम ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा, संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल का हम कड़ा विरोध करते हैं। यह संशोधन पंजाब के हितों के विरुद्ध है। हम केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के विरुद्ध रची जा रही साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। हमारे पंजाब के गांवों को उजाड़कर बने चंडीगढ़ पर सिर्फ पंजाब का हक है। हम अपना हक यूं ही जाने नहीं देंगे। इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, हम उठाएंगे। गठबंधन टूटा, मतदान में पहले ही दिक्कतें कृषि कानूनों की वजह से भारतीय जनता पार्टी का अपनी क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूट चुका है। जिसके साथ मिलकर ही भाजपा सत्ता में रही है। मगर कृषि कानून वापस लेने के बाद भी वह पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के प्रयास में ही है। वह अब तक अकेले एक विधानसभा, एक लोक सभा और दो उपचुनाव लड़ी है, मगर उन्हें बस यही सफलता मिली है कि वह गांवों में अपने बूथ ही लगा सके हैं। विरोधियों को फिर मिला घेरने का मुद्दा जैसे ही लोकसभा के शीतकालीन सत्र का शेड्यूल जारी हुआ और उसमें चंडीगढ़ UTS का स्टेट्स बदलने के लिए बिल लाए जाने की बात सामने आई है, तो पूरा विपक्ष भाजपा के खिलाफ आन खड़ा हुआ है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल की तरफ से बयान जारी किए गए हैं और केंद्र सरकार को घेरने के लिए अंदरूनी तौर पर प्रोग्राम बनाने भी शुरू कर दिए हैं। विधानसभा में पहले ही भाजपा के दो ही विधायक इस समय 217 सीटों वाली विधानसभा में इस समय भाजपा के महज दो ही विधायक अश्वनी शर्मा पठानकोट से और जंगी लाल महाजन मुकेरियां से हैं। जबकि एक समय अकाली दल के साथ मिलकर लड़े चुनाव में भाजपा को 23 सीटों पर जीत मिली थी। अब जब भाजपा पूरे देश में प्रचंड बहुमत से जीतती है तो पंजाब में उनकी राह आसान नहीं हो रही है।

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