पंजाब में सबसे अधिक पठानकोट में बारिश हुई है। जिले में पिछले 24 घंटे में 11.5 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई। हालांकि, सामान्य तौर पर मार्च के पहले पखवाड़े में 35.2 एमएम बारिश होती है। लेकिन, 1 से 16 मार्च में महज 13.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जोकि, पंजाब में सबसे अधिक आंकी गई है। इसके बाद गुरदासपुर में 10 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई। मोगा में बिल्कुल बारिश नहीं वहीं, मोगा में बिल्कुल बारिश नहीं हुई। जबकि, सामान्य तौर पर यहां 9.9 एमएम बरसात होनी चाहिए थी। पिछले 24 घंटों के दौरान बठिंडा में महज 0.1 एमएम बारिश हुई है। जोकि, सामान्य से 99 फीसदी कम है। पठानकोट जिले के माधोपुर में सबसे ज्यादा 20 एमएम, शाहपुरकंडी, फंगोता, रणजीत सागर डैम, मलिकपुर, धीन डैम में 10-10 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। इतना पानी बरसने के बावजूद जिले में अब तक 62 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। लेकिन, मौसम विभाग का कहना है कि यह कमी 19 और 20 मार्च को पूरी हो जाएगी। पठानकोट का मौसम सुहावना
मार्च महीने के पहले 15 दिन की बात करें तो तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री ज्यादा चल रहा था। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था। लेकिन रविवार शाम से शुरू हुई बारिश सोमवार को भी दोपहर तक जारी रही। बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली शीत हवाओं ने मौसम में ठंडक घोल दी। वहीं, मंगलवार को भी सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और ठंडी हवाओं ने मौसम सुहावना कर दिया।
2 दिन राहत, फिर बारिश का दौर मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ पंजाब के ऊपर सक्रिय है। विभाग ने 17 और 18 मार्च को बादल छाने और ठंडी हवाएं चलने की संभावना जताई है। इससे मौसम ठंडा रहेगा। लेकिन, 19 और 20 मार्च को फिर से बारिश की संभावना जताई गई है। हल्की से मध्यम बारिश, गरज व बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान 30-40 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। इस दौरान तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। फसलों के लिए बारिश फायदेमंद बारिश इस सीजन की फसलों खास तौर पर गेहूं के लिए काफी फायदेमंद है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में गरज के साथ बारिश और तेज हवा के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशकों का प्रयोग न करने की सलाह दी है। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जोगिंदर सिंह ने बताया कि हवा चलने से कई नुकसान रिपोर्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन फसलों को बारिश का फायदा होगा। यदि फसल बिछी है तो धूप खिलने के बाद फिर से खड़ी हो जाएगी। 30 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलने से गेहूं का पौधा नीचे गिर जाता है। इसलिए किसानों को सिंचाई कम करने की सलाह दी गई है।