महिलाओं को हर्निया बताकर बच्चेदानी निकालने वाले एवर्स अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आयुमान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का निबंधन रद्द कर दिया है। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने स्तर से इस मामले की जांच कराई। जिसमें पूरा मामला सही साबित हुआ है। विभाग ने अपने रिपोर्ट में कहा कि अस्पताल ने जाली रिपोर्ट के आधार पर महिला की बच्चेदानी निकाल ली है। यह कार्रवाई सिविल सर्जन द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई है। साथ ही अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस कदम को योजना में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विभाग द्वारा कराई गई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना का दुरुपयोग किया। महिला मरीज के इलाज के लिए हर्निया पैकेज के तहत बुकिंग की गई, जबकि वास्तव में हिस्टेरोक्टॉमी (गर्भाशय हटाने की सर्जरी) की गई। संबंधित मरीज का पहले किसी सर्जरी का कोई चिकित्सकीय इतिहास नहीं था, जिससे पैकेज चयन पर सवाल खड़े हुए। जांच में यूएससी समेत अन्य डायग्नोस्टिक रिपोर्ट पूरी तरह से जाली पाई गईं। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आयुष्मान भारत योजना के तहत क्लेम प्रस्तुत किया गया। जांच टीम ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ मरीज की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया है। मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान, 8 हफ्ते में मांगी जांच रिपोर्ट
बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने दैनिक भास्कर में छपी खबर महिलाओं की बच्चेदानी निकालने के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अनंता मनोहर बदर ने सिविल सर्जन, वरीय पुलिस अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर आठ सप्ताह में जबाव मांगा है।आयोग के निबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने निर्देश मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 17 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। आदेश में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट केवल आयोग के अधिकृत ईमेल complaintsectionbhrc@gmail.com पर ही भेजी जाए। किसी अन्य ईमेल आईडी पर भेजी गई रिपोर्ट पर विचार नहीं किया जाएगा। कड़ा संदेश : नहीं बख्शे जाएंगे कोई गुनाहगार
आयुष्मान योजना के नोडल पदाधिकारी शशांक शेखर सिन्हा द्वारा जारी पत्र के अनुसार बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल और नैतिक मानकों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अस्पताल को डि-एम्पैनल करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई होगी। यूट्रस कांड में भी मेडिक्लेम के लिए गर्भाशय निकाले थे
पहले भी यूट्रस कांड से बिहार सुर्खियों में रहा था। तब मेडिक्लेम लेने के लिए गलत तरीके से समस्तीपुर समेत बिहार के विभिन्न जिलों के अस्पतालों में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर करीब 27 हजार महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए थे। इस घोटाले का पर्दाफाश 2012 में समस्तीपुर में हुआ। फर्जी सर्जरी की शिकायतों के बाद महिलाओं की दोबारा जांच हुई थी।