‘मेरी मां को फंसाने के लिए फर्जी वोटर कार्ड तैयार कराने के आरोप लगा दिए गए। जबकि पूरा मामला तो नादिर अली वक्फ की बेशकीमती संपत्ति को बेचने के विरोध का है।’ यह कहना है पाकिस्तान की महिला सबा के बेटे फराज का। वो पेशे से वकील हैं, वह कहते हैं- शिकायत कराने वाली रुखसाना हमारी प्रापर्टी में किरायेदार हैं। उसके खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया गया था, वह विचाराधीन है। इस विवाद में ही FIR दर्ज कराई गई है। दरअसल, मेरठ की सबा मसूद उर्फ नाजिया ने 2003 में 2 वोटर आईडी कार्ड बनवा लिए थे। इनमें अलग-अलग नाम लिखे गए। सबा नादिर अली बिल्डिंग में रहने वाले फरहत मसूद से शादी करके 37 साल पहले भारत में आईं थीं। FIR होने के बाद मेरठ कोर्ट ने उन्हें 14 दिन के लिए जेल भेजा है। जेल में उन्हें क्वारंटाइन बैरक में बाकी बंदियों से अलग रखा गया है। 2 वोटर आई कार्ड बनवाकर अरेस्ट हुई पाकिस्तानी महिला के मामले को समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने उनके बेटे फराज से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… जानिए नादिर अली से कैसे जुड़ा नाम फरहत और सबा के सबसे बड़े बेटे फराज पेशे से वकील हैं। वह बताते हैं- हमारे परदादा का नाम मोहम्मद इशाक था। मोहम्मद इशाक के दूसरे भाई का नाम नादिर अली था। इस लिहाज से नादिर अली भी हमारे परदादा हुए। उनका पुश्तैनी नाम नादिर अली के नाम से चला आ रहा है, इसलिए पूरा परिवार नादिर अली के नाम से जाना जाता है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण वह संपत्ति है, जिसको हमारे परदादा ने कमाया। वर्ष 1941 में सारी संपत्ति वक्फ अलल औलाद कर दी गई। इसका एक रजिस्टर्ड वक्फनामा भी है। वक्फ अलल औलाद क्या है, इस पर वह बताते हैं, इसमें संपत्ति का मालिक खुदा हो जाता है, मगर संपत्ति का फायदा पीढ़ी दर पीढ़ी लोग लेते रहते हैं। सिर्फ उस संपत्ति को बेच नहीं सकते हैं। फराज फरहत कहते हैं- हमारे परिवार ने वक्फ संपत्ति को बेचने का विरोध किया था, तभी से यह विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, वक्फ की संपत्ति ट्रांसफर नहीं हो सकती। इनकी देखरेख का जिम्मा मुतवल्ली और उसके बाद वक्फ बोर्ड का होता है, लेकिन कुछ लोगों ने मुतवल्ली से मिलीभगत कर हमारे खानदान या कहें तो वक्फ को दी गई कई संपत्तियों को बेच दिया है। हम इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। दावा : इन संपत्तियों को बेचा गया विरोध पर दर्ज कराई रिपोर्ट
फराज बताते हैं- नादिर महल बेचे जाने का हमने विरोध किया, तो रुखसाना के परिवार से तल्खी बढ़ती चली गई। 15 अप्रैल, 2025 को पहला मुकदमा हमारे पिता फरहत मसूद और छोटे भाई राहिल के खिलाफ दर्ज कराया गया। उन पर आरोप लगाया गया कि वह अपने परदादा की मोहर लगाकर सामान की बिक्री कर रहे हैं। उनको डेढ़ महीने सलाखों के पीछे बिताना पड़ा, लेकिन इसके बाद वह हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गए। वर्तमान में भी वह स्टे प्रभावी है। मौसी ने कराया पाकिस्तान से रिश्ता
नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद पुत्र स्व. मसूद अहमद की खाला (मौसी) पाकिस्तान के लाहौर में रहती हैं। फरहत पहली बार वर्ष 1986 में पाकिस्तान गए। यहां फरहत की मुलाकात लाहौर निवासी हनीफ खान की बेटी सबा से हुई और मौसी ने रिश्ते की बात बढ़ा दी। 1988 में पाकिस्तान में ही फरहत और सबा का निकाह हो गया। निकाह के बाद भी ढाई वर्ष तक सबा पाकिस्तान में रही। इसके बाद वर्ष 1991 में फरहत अपनी पत्नी सबा को लॉन्ग टर्म वीजा की प्रक्रिया के जरिए भारत लेकर आ गए। मेरठ में दिया पहले बच्चे को जन्म
निकाह के एक वर्ष बाद 1991 में सबा ने पहली संतान को जन्म दिया। उसका नाम फराज रखा गया, क्योंकि पाकिस्तान सबा का मायका था, इसलिए निकाह के बाद भी वह पाकिस्तान आया-जाया करती थी। वर्ष 1993 में फरहत और सबा के घर एक और बच्चा हुआ। इस बार लड़की हुई, जिसका नाम ऐमन रखा गया था। खास बात यह थी कि सबा की डिलीवरी पाकिस्तान में हुई थी। डिलीवरी के दो महीने बाद फरहत अपनी पत्नी सबा, बेटे फराज के साथ ही पाकिस्तान में जन्मी ऐमन को भी लेकर भारत आ गए। भारत आकर बनवाया ऐमन का पासपोर्ट
ऐमन को जब पाकिस्तान से भारत लाया गया था, वह दो महीने की थी। वह लॉन्ग टर्म वीजा पर विशेष अनुमति के बाद भारत आई थी। यहां आने के बाद पिता फरहत ने उसके पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। क्योंकि फरहत की नागरिकता भारतीय थी, इसलिए उसके आधार पर बेटी ऐनम का पासपोर्ट भी वर्ष 1994 में तैयार हो गया। अब इस पासपोर्ट की मदद से ही ऐनम भी पाकिस्तान आने जाने लगी। वर्ष 1998 में फरहत के यहां तीसरा बच्चा जन्मा, जिसका नाम राहिल रखा गया था। SP बोले- जांच में सही मिलने पर एफआईआर लिखी
SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया- देहली गेट पुलिस और खुफिया विभाग की टीम ने नाजिया को खोजकर उसके दूसरे पहचान दस्तावेज की जांच की। आरोप सही पाए जाने पर नाजिया को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। महिला को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, वहां से उसको जेल भेजा गया है। जेल में उसको अलग बैरक में रखा गया है। …………
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