पानीपत निगम के ट्रांसपोर्ट ऑफिस तोड़ने के फैसले पर रोक:कोर्ट बोला- मामला खतरनाक भवन का नहीं; जल्दबाजी में अपूरणीय क्षति संभव

पानीपत के सुखदेव नगर में स्थित न्यू इंडिया ट्रांसपोर्ट कंपनी को लेकर नगर निगम और ट्रांसपोर्टर के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। एक तरफ नगर निगम ने ट्रांसपोर्ट कंपनी को अवैध निर्माण और रिहायशी इलाके में अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट चलाने का दोषी मानते हुए बिल्डिंग गिराने का फरमान सुनाया है, वहीं दूसरी ओर अदालत ने ट्रांसपोर्टर को बड़ी राहत देते हुए निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। सीनियर एडवोकेट नीरज नरवाल ने बताया कि केवल एक ही कंपनी नहीं, ब्लकि 12 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिकों ने नगर निगम के इस फरमान के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिनमें से 3 की सुनवाई 30 जनवरी को हुई। 3 की सुनवाई 1 फरवरी को है। जबकि कुछ की सुनवाई 16 फरवरी को है, इनकी जल्दी सुनवाई के लिए कोर्ट में अपील की जाएगी। जिनकी सुनवाई हो चुकी है, उनको कोर्ट ने राहत देते हुए निगम के फैसले पर स्टे लगाया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होनी सुनिश्चित हुई है। नगर निगम का कड़ा रुख: 7 दिन में गिराएं अवैध निर्माण नगर निगम पानीपत के सहायक टाउन प्लानर (ATP) ने 20 जनवरी 2026 को ट्रांसपोर्टर देवेंद्र सिंह को एक सख्त आदेश जारी किया है। निगम के अनुसार ट्रांसपोर्ट कंपनी ने बिना बिल्डिंग प्लान मंजूर कराए रिहायशी इलाके (सुखदेव नगर) में अवैध निर्माण किया है और अवैध तरीके से ट्रांसपोर्ट का संचालन किया जा रहा है। निगम ने हरियाणा नगर निगम अधिनियम-1994 की धारा 261 के तहत आदेश दिया है कि 7 दिनों के भीतर बिल्डिंग को उसके मूल स्वरूप में लाया जाए या अवैध निर्माण हटाया जाए। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो निगम खुद इसे धराशायी कर देगा, जिसका खर्च भी मालिक से वसूला जाएगा। कोर्ट से मिली राहत: 22 अगस्त तक कार्रवाई पर लगी रोक निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ ट्रांसपोर्ट कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कंपनी के वकील ने दलील दी कि वे लंबे समय से कानूनी रूप से व्यवसाय कर रहे हैं और निगम के नोटिस अवैध हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा यह मामला किसी खतरनाक भवन के उपयोग या तत्काल खतरे का नहीं है। नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा। यदि निगम को अभी कार्रवाई करने से नहीं रोका गया, तो ट्रांसपोर्टर को अपूरणीय क्षति होगी। अदालत ने नगर निगम को 20 फरवरी 2026 तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई करने से रोक दिया है। इस साल ये कोर्ट में पहुंचे ये ट्रांसपोर्टर दिल्ली पानीपत गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी, चिनार रोडलाइंस, डायमंड रोडलाइंस, हिमाचल कश्मीर, श्री महाबीर ट्रांसपोर्ट, दिल्ली मालवा ट्रांसपोर्ट, न्यू इंडिया ट्रांसपोर्ट और ओम शिव ट्रांसपोर्ट ने इस साल नगर निगम के आदेशों के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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