UPSC के सिविल सर्विस के 6 मार्च को आए रिजल्ट में कई ऐसे चेहरे सामने आए, जो कम संसाधनों के बावजूद सफलता की ऊंचाई पर पहुंचे। इनमें से एक हैं- प्रियंका चौधरी, जिनकी 79वीं रैंक है। गाजीपुर की रहने वाली प्रियंका के पिता चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। 6 साल पहले तक SDM की गाड़ी चलाते थे। इतना ही नहीं, UPSC के इंटरव्यू के 3 महीने पहले प्रियंका की मां की मौत हो गई थी। दूसरा नाम हैं- बुलंदशहर की शिखा गौतम। शिखा के दादा चपरासी थे, पिता ने भी चपरासी की नौकरी की। शिखा की 113वीं रैंक आई है। यह बात पता चलते ही उनके दादा फूट-फूटकर रो पड़े। लेकिन, वो खुशी के आंसू थे, क्योंकि पोती आईएएस बन गई है। इनके अलावा देवरिया की तान्या सिंह को 200वीं रैंक मिली है। पिता की मौत के बाद उनकी मां ने घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली। विमेंस डे पर पढ़िए UPSC में सिलेक्ट हुईं यूपी की ऐसी ही 3 बेटियों की कहानी, जिनका फैमेली बैकग्राउंड लोअर मिडिल क्लास था। बीच एग्जाम में अपनों को भी खोया, लेकिन हार नहीं मानीं… 1- प्रियंका चौधरी: इंटरव्यू से 3 महीने पहले मां को खोया; एक साल पहले भाई
गाजीपुर के जखनियां ब्लॉक स्थित गौरा खास गांव की रहने वाली हैं प्रियंका चौधरी। प्रियंका की सक्सेस की कहानी इमोशन और जज्बे की मिसाल है। प्री एग्जाम से 6 महीने पहले उनके भाई की मौत हो गई थी। जब इंटरव्यू में सिर्फ 3 महीने बचे थे, तभी उनकी मां की मौत हो गई। यह बात याद करते हुए प्रियंका की बड़ी बहन प्रीति चौधरी भावुक हो गईं। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया- परिवार के कठिन समय में सभी ने एक-दूसरे का सहारा बनकर साथ दिया। मुझे बहुत खुशी है कि मेरी छोटी बहन ने IAS परीक्षा क्रैक की है। जब घर में मुश्किल समय था, तब मैंने घर का काम संभाला, जिससे वह पढ़ाई पर ध्यान दे सके। आज उसकी मेहनत का नतीजा सबके सामने है। अगर हमारा भाई आज जिंदा होता, तो उसे बहुत खुशी होती। एक तरफ खुशी है, लेकिन भाई के न होने का गम भी हमेशा रहेगा। 21 नवंबर को मां की मौत, फरवरी में हुआ इंटरव्यू
मेंस क्लियर करने के बाद प्रियंका इंटरव्यू की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान अचानक 21 नवंबर, 2025 को मां शांति देवी की मौत हो गई। इसके तीन महीने बाद 16 फरवरी, 2026 को प्रियंका ने इंटरव्यू दिया। इसके पहले जब वह प्री एग्जाम की तैयारी कर रही थीं, तब 13 नवंबर, 2024 को उनके इकलौते भाई रितेश उर्फ गोल्डी की डेंगू से जान चली गई थी। प्रियंका के पिता नीरा राम जखनियां तहसील में लंबे समय तक SDM के ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वह तहसील के रिकॉर्ड रूम में नजारत (क्लास-4) पद पर तैनात हैं। बेटी की सफलता पर भावुक होते हुए कहते हैं- अगर मौका मिला तो मैं अपनी बेटी की भी गाड़ी चलाने में गर्व महसूस करूंगा। पिता नीरा राम भी बातचीत के दौरान भावुक हो गए। कहने लगे- मेरी जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। पत्नी की बीमारी और जवान बेटे की डेंगू से मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था। लेकिन, मेरी बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाया और मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। आज उनकी वजह से ही लोग मुझे पहचान रहे हैं। प्रियंका के गांव से BHU तक का सफर
प्रियंका ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जखनियां के श्री महावीर सूर्योदय उत्तर माध्यमिक विद्यालय से की। इसके बाद शहीद इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट पूरा किया। आगे की पढ़ाई और सिविल सेवा की तैयारी के लिए वह वाराणसी स्थित बीएचयू चली गईं। वहां रहकर उन्होंने लगातार मेहनत की और आखिरकार UPSC में सफलता हासिल कर ली। 2- बुलंदशहर की शिखा: पैसे नहीं थे तो एक साल पढ़ाई छोड़ी
बुलंदशहर की शिखा गौतम के पिता प्रेमचंद स्याना स्थित इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उनके दादा ज्ञानचंद भी डीआईओएस कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत थे। शिखा की माता देवकी गृहिणी हैं। शिखा अपने पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर पर हैं। उनकी दो बड़ी बहनें सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में टीचर के पद पर तैनात हैं। पिता बोले- बेटी का सपना शुरू से ही आईएएस बनने का था
शिखा के पिता प्रेमचंद ने बताया कि उनकी बेटी का सपना शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनने का था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से शिखा को एक साल के लिए अपनी पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी थी। हालांकि, उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की। अपने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। बीटीसी की, फिर पिता ने दिल्ली भेजा
शिखा ने चौधरी वीरपाल सिंह इंटर कॉलेज बाड़ा से पढ़ाई की, फिर आईपी कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने बीटीसी भी किया। पिता ने किसी तरह से पैसों की व्यवस्था की और तैयारी के लिए दिल्ली भेजा। सिविल सेवा की तैयारी के दौरान शिखा ने रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और लगन को दिया। कहा- सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। 3- देवरिया की तान्या सिंह: पिता की मौत के बाद मां ने संभाला घर
देवरिया के लार थाना क्षेत्र के इसराइली गांव की रहने वाली हैं- तान्या सिंह। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 200वीं रैंक हासिल की। तान्या के पिता अजय सिंह दिल्ली में एलजी कंपनी में टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत थे। साल 2012 में ड्यूटी के दौरान उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पुष्पा देवी पर आ गई थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। तान्या ने भी विपरीत परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। तान्या की बहन भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं, जबकि उनका छोटा भाई अभी कक्षा-6 का छात्र है। परिवारवालों का कहना है कि तान्या की सफलता से न केवल उनके परिवार, पूरे जिले के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। तान्या की यह उपलब्धि साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अगर मेहनत और लगन के साथ प्रयास किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। तान्या का लार के इसराइली गांव में पैतृक घर है। घर छप्पर का है, वह भी गिर गया है। अब रहने लायक नहीं बचा है। तान्या का जैसे ही सिलेक्शन की सूचना गांव वालों को मिली, उन्होंने जमकर जश्न मनाया। ————————– ये 2 खबरें भी पढ़ें यूपी पुलिस इंस्पेक्टर की बेटी बनीं IAS: UPSC में हासिल की 14वीं रैंक, बोलीं- बिना कोचिंग मिली सफलता, कहीं भटकने की जरूरत नहीं बरेली के बजरंग एन्क्लेव की रहने वाली सुरभि यादव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल की है। सुरभि के पिता राकेश यादव यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। सुरभि शनिवार शाम को दिल्ली से अपने घर लौटीं। इस दौरान सुरभि यादव का फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। सुरभि का कहना है- मेरे मामा यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। उन्हें देखकर ही मेरे मन में यह विचार आया। पूरी खबर पढ़िए यूपी में SDM के ड्राइवर की बेटी IAS बनी, एक साल में मां-इकलौते भाई को खोया; परचून वाले की बेटी भी सिलेक्ट UPSC ने शुक्रवार को सिविल सर्विस एग्जाम 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। यूपी में शामली की 23 साल की आस्था जैन को 9वीं रैंक मिली है। आस्था के पिता परचून की दुकान चलाते हैं। गाजीपुर की प्रियंका चौधरी ने UPSC में 79वां स्थान हासिल किया। पिता मीरा राम SDM के ड्राइवर रहे हैं। वह इस समय अमीन हैं। एक साल के भीतर प्रियंका ने अपने इकलौते भाई और मां को खोया। लेकिन हौसला नहीं टूटा। पढ़ें पूरी खबर