अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते हमलों ने खाड़ी देशों में रहने वाले बिहार के हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ईद पर घर लौटने की तैयारी में जुटे लोग अब बमबारी, मिसाइल अटैक और ब्लैकआउट के बीच कहीं कैंपों में छिपे हैं, तो कहीं टूटे घरों में दुबककर बैठे हैं। कई इलाकों में नेटवर्क बंद है। फ्लाइटें रद्द हैं और डर इतना कि बिहार के गांवों में माता-पिता रातभर जागकर सिर्फ एक फोन की घंटी का इंतजार कर रहे हैं। परिजन का सिर्फ एक ही सवाल है, बेटा सुरक्षित है न..? बिहार के किशनगंज, बक्सर, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, अररिया, पूर्णिया और मधुबनी के रहवासी अभी भी मिडिल ईस्ट में फंसे हुए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इन जिलों से फंसे लोगों और उनके परिवार के सदस्यों से बात की। हर घर में एक ही दर्द है, हमारा बेटा ईद पर घर आना वाला था… लेकिन अब पता नहीं वो कैसा होगा। किस हाल में होगा और कब घर वापस आएगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले हमले की कुछ तस्वीरें देखिए… 6-7 किलोमीटर दूर गिर रही मिसाइलें सबसे पहले हमारी बात बेगूसराय के डुमरी गांव के रहने वाले अफजल रजा से हुई। अफजल इनोवा कंस्ट्रक्शन, बनियास में कार्यरत है। अफजल ने दहशत भरी रातों के बारे में दैनिक भास्कर को बताया। अफजल ने कहा, ‘रात में सो नहीं पा रहे। 4000 लोग चाइना कैंप में एक साथ सो रहे हैं। धमाके होते हैं, तो जमीन कांपती है। सायरन बजते ही दिल की धड़कन बढ़ जाती है।’ एक कैंप में 4 हजार लोग, इनमें 100 बिहारी अफजल ने आगे बताया, ‘सुबह थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन दोपहर 2 बजे के बाद फिर मिसाइलें गिरने लगीं। हम जहां रहते हैं, वहां से 6-7 किलोमीटर दूर धमाके हो रहे हैं। धुआं साफ दिख रहा है, ऐसा लगता है जैसे युद्ध हमारे सामने ही हो रहा हो। बिहार के 100 से ज्यादा लोग वही उसी कैंप में हैं। हम रोजा में हैं, रमजान चल रहा है। कैंप की मस्जिद में नमाज भी हो रही है, लेकिन डर वहां भी बैठा है। जरूरी दस्तावेज, पासपोर्ट, पैसे सब बैग में रख लिए हैं ताकि जरूरत पड़े तो तुरंत निकल सकें।’ हालात लंबे समय तक बिगड़े तो दिक्कतें बढ़ेंगी अफजल ने बताया, ‘बिहार के हजारों लोग रोजगार के सिलसिले में यहां काम करते हैं। निर्माण कार्य, तेल-गैस सेक्टर, होटल और सुरक्षा सेवाओं में बड़ी संख्या में बिहार के युवक यहां कार्यरत हैं। वर्तमान संघर्ष के कारण वहां की सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है। यदि हालात लंबे समय तक बिगड़े रहते हैं तो सबकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की गई है, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।’ 8 महीने पहले बेगूसराय से दुबई गया अफजल की मां जैतून निशा बतातीं हैं, ‘रविवार सुबह से बेटे का फोन नहीं लग रहा था। दिल घबरा रहा था। कुरान भी नहीं पढ़ पा रही थी। दोपहर में जब बात हुई तो जान में जान आई। आठ महीना पहले ही अफजल यहां से गया है। बेटा ही नहीं, वहां रह रहे सभी लोगों के लिए अल्लाह से दुआ मांग रहे हैं, अल्लाह सबको सलामत रखें।’ ‘हमारे बच्चे कमाने गए, मौत के साये में फंस गए’ डुमरी गांव में सभी लोग इकट्ठा होकर दुआ कर रहे हैं। गांव के मोहम्मद सलीम कहते हैं, ‘रोजगार की मजबूरी में बच्चे विदेश जाते हैं, लेकिन ऐसी जंग में सबसे ज्यादा परेशानी वही झेलते हैं।’ किशनगंज के इजहार दुबई में चलाते हैं होटल किशनगंज के पूर्व विधायक मोहम्मद इजहार असफी के बेटे इफ्ताखर आसफी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दुबई में रहते हैं। इफ्ताखर फेकहीह विश्वविद्यालय अस्पताल में CCO हैं। दुबई में उनका ‘Imperial Biryani’ नाम का रेस्टोरेंट भी चलता है। घर से 20 मीटर की दूरी पर हुआ धमाका रविवार दोपहर को इजहार असफी की अपने बेटे से बात हुई। उन्होंने बताया, इफ्ताखर के घर से 20 मीटर दूर एक 5 स्टार होटल में तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मेरे बेटे के घर की दीवारें टूट गईं। शीशे बिखर गए। बेड तक चकनाचूर हो गया। इसके बाद से घरवाले एक कमरे में खुद को बंद करके बैठे हैं। वो सभी लोग डरे हुए हैं। सबसे दर्दनाक बात, दोपहर के बाद से बेटे से बात नहीं हो पाई है। नेट बंद है। पोती लगातार रो रही है। दो दिन से सभी जगे हुए हैं। नींद लगती है तो किसी भी आवाज पर चौक उठते हैं। मेरी पोती हर वक्त रोती रहती है। असफी की आवाज में डर साफ सुनाई दिया। मेरे बच्चे 2 दिनों से नहीं सोए। झपकी लेते ही बाहर धमाके से नींद खुल जाती है। दोहा में छिपकर रह रहे अररिया-मधुबनी के युवक अररिया के विनय मिश्रा, धीरेन्द्र चौधरी और मधुबनी के नीरज चौधरी इस समय दोहा में फंसे हैं। परिवार वालों की आवाज कांप रही थी। जब उन्होंने हमसे कहा, हमारे बच्चे बड़े पदों पर काम करते हैं। कंपनी ने उन्हें कैंप में रखा है, लेकिन क्या हालत है, यह सिर्फ ऊपरवाला ही जानता है। परिवार वालों को सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर दिया गया है, उसी पर कभी-कभी कॉल जा पा रहा है। विनय मिश्रा ने दोहा से बताया, हवाई हमले की सूचना मिलते ही अलर्ट बज उठा। शाम तक हम सब एक जगह जमा कर दिए गए। रात कैंप में गुजरी। घर से लगातार फोन आ रहा है, लेकिन हम बस उन्हें ढाढ़स दे पा रहे हैं। हैदराबाद एयरपोर्ट पर रोक दिए गए अररिया-पूर्णिया के लोग कतर जाने के लिए तैयार अररिया और पूर्णिया के 3 लोगों को हैदराबाद एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया है। होटल में रात गुजारने के बाद सोमवार को उन्हें वापस बिहार भेजा जा रहा है। एयरलाइन ने कहा- हालात सामान्य होने तक उड़ानें रद्द हैं। पटना के गोला रोड के श्रवण कुमार, जो कुवैत ऑयल कंपनी में इंजीनियर हैं, बताते हैं- मिसाइल हमले के बाद एमेरिटस एयरवेज ने सभी उड़ानें रद्द कर दीं। जहां हमला हुआ, वहां आम लोगों का आना-जाना नहीं होता, इसलिए जनहानि नहीं हुई। सभी भारतीय सुरक्षित हैं, लेकिन परिवार वाले रातभर सो नहीं पा रहे। ईरान में फंसे मुजफ्फरपुर के 300 लोग मुजफ्फरपुर के कथैया के आनंद कुमार, जो मनामा इलाके की पाइपलाइन कंपनी में काम करते हैं। इन्होंने सबसे भयावह तस्वीर बयां की। आनंद ने बताया, ‘यहां बम बरस रहे हैं। आसमान अचानक लाल हो गया है। लग रहा था आग के गोले गिर रहे हों। एक के बाद एक धमाके हुए। हर धमाके पर धरती कांप रही है।’ उनका दावा है कि, ‘मुजफ्फरपुर और आसपास के 250 से 300 लोग ईरान में फंसे हैं। आनंद के पिता राजमंगल साहनी और परिवार लगातार रो-रोकर दुआ कर रहे हैं।’ मुजफ्फरपुर के आनंद ने ईरान से भेजी 2 तस्वीरें … ‘मैं ऑनलाइन नहीं दिखूं तो समझना गड़बड़ है’ बक्सर के रहने वाले सुजीत कुशवाहा दुबई में फंसे हुए हैं। सुजीत कुशवाहा ने एक पोस्ट में लिखा, अगर मैं ऑनलाइन नहीं दिखूं तो समझना स्थिति खराब हो चुकी है। इस पोस्ट के बाद से परिवार वाले सो नहीं पाए हैं। सुजीत ने बताया, ‘लगातार धमाके सुनाई दे रहे थे। अलर्ट सायरन बज रहा था। फोन पर बात भी कठिन हो गई है। पता नहीं कब क्या हो जाए।’ ‘ईद पर घर आने वाले थे…आज जान की चिंता में आंखें सूख गईं जिन लोगों के परिवार मिडिल ईस्ट में फंसे हैं, वहां एक ही बात बार-बार दोहराई जा रही है। हमारे बच्चे ईद पर घर आने वाले थे। टिकट कट चुका था, लेकिन अब हमलोग रोज खुद को समझा रहे हैं, बस वो सुरक्षित रहें। अररिया हो या पूर्णिया मधुबनी हो या मुजफ्फरपुर बक्सर हो या बेगूसराय हर घर में सिर्फ दो ही चीजें हैं, दुआ और डर। वहीं, इस स्थिति पर भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन बिहार में बैठे परिजन हर मिनट बस यही प्रार्थना कर रहे हैं, अल्लाह/भगवान हमारे बच्चों को सलामत रखें। बस वो वापस घर लौट आएं। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विदेश मंत्री से की बात पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात और वहां फंसे बिहार के हजारों लोगों की चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरी स्थिति पर करीबी नजर रखने का निर्देश जारी किया है। इसी के तहत जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने विदेश मंत्री डॉ.एस.जयशंकर से विस्तृत बातचीत की। संजय झा ने दैनिक भास्कर को बताया, ‘विदेश मंत्री ने आश्वस्त किया है कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहां मौजूद भारतीय मिशन लगातार स्थानीय सरकारों से संपर्क में हैं। हर गतिविधि की मॉनिटर की जा रही है।’ उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने व्यक्तिगत स्तर पर भी संबंधित देशों से बातचीत की है। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि, भारत का हर नागरिक सुरक्षित रहे, चाहे वह बिहार का हो या देश के किसी अन्य राज्य का। स्थिति सामान्य होते ही सरकार आवश्यक कदम उठाएगी संजय झा ने बताया, ‘जब भी स्थिति नियंत्रण में आएगी, भारत सरकार के स्तर पर राहत, निकासी या अन्य आवश्यक कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी। फिलहाल दूतावास लगातार काम कर रहे हैं और किसी भी नागरिक को असुरक्षित नहीं छोड़ा जाएगा।’ घरों के अंदर रहें, सतर्क रहें, अफवाहों से बचें गलत सूचना, गलतफहमी और अफरा-तफरी की स्थिति को रोकने के लिए संजय झा ने विदेशों में रह रहे भारतीयों खासकर बिहार के लोगों से अपील की है, वर्तमान परिस्थितियों में सभी लोग घरों के अंदर रहें। अनावश्यक आवाजाही न करें और दूतावास और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा, सरकार हालात पर मिनट-टू-मिनट निगरानी कर रही है। जैसे ही परिस्थितियां सामान्य होंगी। आवश्यक और तुरंत कदम उठाए जाएंगे। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।