पंजाब यूनिवर्सिटी में महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने के लिए ‘विमन साइबरसेफ क्लब’ बनाया जा रहा है। यह क्लब संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट गोल- एसडीजी-5 (जेंडर इक्वालिटी) और एसडीजी-4 (क्वालिटी एजुकेशन) से जुड़ा है। इसका लक्ष्य है महिलाओं को ऑनलाइन सशक्त बनाना और टेक्नोलॉजी से होने वाली हिंसा रोकना। क्लब पीयू की लड़कियों को डिजिटल सुरक्षा की ट्रेनिंग देगा। साइबर अंबेसडर्स तैयार करेगा, जो कैंपस में जागरूकता फैलाएंगे। एक कमेटी इसे चलाएगी, जिसमें साइबर एक्सपर्ट्स, पुलिस, एनजीओ और यूनिवर्सिटी वाले शामिल होंगे। मेंबरशिप अलग-अलग उम्र की महिलाओं के लिए खुली रहेगी, जिससे अनुभव शेयर करने का नेटवर्क बनेगा। रोजमर्रा की सुरक्षा जैसे- मजबूत पासवर्ड, वीपीएन का इस्तेमाल, फिशिंग पहचानना, फ्रॉड रिपोर्ट करना और पीड़ितों को मदद करना सिखाया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटीज के जेंडर ग्रांट के तहत इसे चुना गया। (इसके संरक्षक किंग चार्ल्स III हैं। दुनिया भर से 1000 आवेदनों में से पीयू का चयन हुआ है। सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीएसडीई) इसे चलाएगी। प्रो. सुवीरा गिल (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) और प्रो. विशाल शर्मा (को-पीआई) इसमें शामिल हैं। प्रो. सुवीरा गिल कहती हैं- डिजिटल सुरक्षा के बिना जेंडर इक्वेलिटी नहीं हो सकती। क्लब पीयर लर्निंग पर जोर देगा, क्योंकि युवा एक-दूसरे से सबसे अच्छे से सीखते हैं। यह पहल महिलाओं को सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाएगी। डिजिटल खतरे बढ़ रहे हैं… } ऑनलाइन हरासमेंट, स्टॉकिंग, फेक प्रोफाइल, बदनामी और डीपफेक जैसे खतरे तेजी से बढ़े हैं। } भारत में 31% महिलाओं ने ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट का सामना किया है। } 92% महिलाएं कहती हैं कि डिजिटल हिंसा मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ती है। } ग्लोबल स्तर पर 14% से 58% महिलाएं ऐसी हिंसा झेल चुकी हैं। } भारत में 2021 से 2023 तक साइबर क्राइम के मामले 33 हजार से ज्यादा बढ़े। खास सुविधा… } यह क्लब पीयू के साइबर वेलनेस क्लिनिक (कॉपकनेक्ट) के साथ काम करेगा। } जगह: सेक्टर-25, साउथ कैंपस (सीएसडीई बिल्डिंग)। } यहां मशीन से मोबाइल हैकिंग की जांच कराई जा सकेगी। } सदस्य एक-दूसरे को ट्रेन करेंगे (पीयर लर्निंग)। } नाम: हार्नेसिंग सायबर अवेयरनेस फॉर डिजिटल एम्पावरमेंट ऑफ विमन } तारीख: 26-27 फरवरी को } आवेदन की आखिरी तारीख: 23 फरवरी } रोज 50 लोग- कोई भी स्टूडेंट, फैकल्टी या स्टाफ इसमें शामिल हो सकता है। वर्कशॉप में ये सीखेंगे… जेंडर हिंसा पहचानना, साइबर हाइजीन, प्राइवेसी सेटिंग्स, अकाउंट सिक्योरिटी, डिजिटल फुटप्रिंट कंट्रोल, सुरक्षित पेमेंट। रिपोर्ट कैसे करें, सुरक्षित सबूत रखें। पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार। साइबर लॉ की बेसिक जानकारी। साइबर सिक्योरिटी में करियर के रास्ते। वर्कशॉप में बेस्ट परफॉर्म करने वाले टॉप-3 को 7500 रुपये की साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर ट्रेनिंग मुफ्त दी जाएगी। यह 8 हफ्ते का प्रोग्राम होगा। इसके बाद यही 3 लोग क्लब के पहले मेंबर होंगे। वर्कशॉप के दौरान ही फॉर्म भरवाए जाएंगे कि कौन इस क्लब का मेंबर बनने का इच्छुक है।