हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद पुलिस प्रताड़ता केस में हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के आदेश लागू नहीं होने पर जारी किया गया है। खास बात ये है कि यह विभाग सीएम नायब सैनी के पास है। पहला मामले में भिवानी जिले में 19 साल के युवक के निजी अंगों में पेट्रोल डालकर प्रताड़ित किया गया था। इसमें दोषी पाए गए पुलिस कर्मी को सजा की जगह पदोन्नति दे दी गई थी। दूसरा मामला फतेहाबाद का है, जिसमें एक ज्वेलर के खिलाफ सट्टेबाजी केस में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें सीआईए इंचार्ज सहित पांच पुलिस कर्मियों पर एफआईआर करने के निर्देश हुए थे। मगर, इन पर भी कार्रवाई नहीं हुई। इसकी शिकायत हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने की थी। वर्मा ने कहा था कि हरियाणा गृह विभाग की ओर से स्टेट अथॉरिटी के आदेशों को लागू नहीं किया गया है, जबकि ये मामले पुलिस अत्याचार और हिरासत में यातना से जुड़े हैं। इसका राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। प्रधान सचिव को भेजे गए नोटिस में दो सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी गई है। भिवानी और फतेहाबाद के मामलों के बारे में जानिए… सजा की जगह दे दी गई पदोन्नति
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की ओर से की गई शिकायत में बताया गया कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने स्पष्ट रूप से आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन हरियाणा के गृह विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अथॉरिटी की एक वर्ष लंबी जांच में दोषी पाए गए भिवानी पुलिस के एएसआई दशरथ को निलंबित करने के बजाय पदोन्नत कर एसआई बनाया गया। उसे उसी चौकी का इंचार्ज भी नियुक्त कर दिया गया, जहां उनके द्वारा यातना करने के आरोप का मामला सामने आया था। उनके अनुसार, जून 2023 में भिवानी जिले के गांव बामला के 19 वर्षीय युवक को एएसआई दशरथ व अन्य चार पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह प्रताड़ित किया था। आरोप है कि उसके निजी अंगों में पेट्रोल तक डाला गया। पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने 24 सितंबर 2024 को जांच पूरी कर आरोप सही पाए और निर्देश दिए थे कि एएसआई दशरथ व अन्य आरोपियों का तुरंत निलंबन कर एफआईआर दर्ज कर उन पर कार्रवाई की जाए। मगर, गृह विभाग ने इन आदेशों को लागू नहीं किया। उल्टा मुख्य आरोपी को पदोन्नति देकर उसे दिनोद गेट चौकी का इंचार्ज बना दिया गया। पांच पुलिस कर्मी दोषी पाए गए, एफआई के आदेश हुए प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया नोटिस
शिकायत की समीक्षा के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत नोटिस जारी किया है। प्रधान सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता सुशील वर्मा के आरोपों की जांच कराएं। इस मामले में दो सप्ताह में कार्रवाई करके एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को जमा करवाएं। आयोग की पीठ के अनुसार, आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने की चिंताजनक प्रवृत्ति दर्शाते हैं। इसलिए जांच व कार्रवाई जरूरी है।