पूर्व MP की कांग्रेस छोड़ने वालों को लौटने की सलाह:किरण चौधरी पर बोले बृजेंद्र- आज उन्हें अच्छा लग रहा, जल्दी समझ आएगा, वो हैं कहां

पिता चौधरी बीरेंद्र सिंह के साथ हरियाणा में सद्भाव यात्रा निकाल रहे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ने वालों को पार्टी में लौटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा-जो पुराने कांग्रेसी हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं और किसी को आपत्ति भी नहीं होनी चाहिए। फिर CM रहे चौधरी बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी के भाजपा में शामिल होने पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैंने उस समय भी कहा था और अभी भी कहता हूं कि आज के दिन उनको (किरण चौधरी) देखने में बहुत अच्छा लग रहा होगा कि वह खुद राज्यसभा में हैं। बेटी श्रुति चौधरी हरियाणा सरकार में मंत्री हैं। लेकिन जल्दी ही उनको समझ में आ जाएगा कि वे कहां पर हैं। किरण चौधरी तो बहुत सम्मानित व सीनियर नेता रही हैं। चौधरी बंसीलाल की विरासत हैं वो। पूर्व सांसद ने यह बात किरण चौधरी के गृह जिले भिवानी में कही। पूर्व IAS अफसर रहे बृजेंद्र सिंह भी भाजपा के टिकट पर ही साल 2019 में हिसार से सांसद बने थे। लोकसभा चुनाव से पहले 10 मार्च 2024 को भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पार्टी छोड़ते वक्त कहा था कि भाजपा में वैचारिक घुटन महसूस कर रहे थे। यह भी कहा था कि भाजपा हरियाणा के भाईचारे को जाति आधार पर विभाजित करना चाह रही है। संपत व वासुदेव अपनी ऑरिजनल पार्टी में लौटे
दैनिक भास्कर एप से बातचीत में बृजेंद्र सिंह ने कहा- जो ऑरिजनल कांग्रेसी हैं, उनके लिए तो दरवाजे हमेशा खुले हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई पुराना कांग्रेसी, कांग्रेस की विचारधारा वाला व्यक्ति यदि वापस कांग्रेस में आना चाहिए तो किसी को भी उस पर आपत्ति होगी। वह आपत्तियां राजनीति तौर पर अलग से होती हैं, क्षेत्र के हिसाब से, विधानसभा के हिसाब से या लोकसभा के हिसाब से। हालांकि अभी वह समय नहीं है कि आपको कोई उठापटक होती नजर आएगी लंबी-चौड़ी। प्रोफेसर संपत सिंह या वासुदेव शर्मा की बात करें तो वे मुझे लगता है कि वो उस स्टेज पर पहुंच गए थे कि उनको कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। उस नाते वे दोनों ऑरिजनली इनेलो के रहे हैं। वहीं वापस गए हैं। उनको इनेलो में शायद कोई संभावना नजर आ रही होगी कि उभर जाएगी। वजन कम नहीं हुआ, बेल्ट जरूर सरक गई
20 विधानसभा हलकों को कवर कर चुके बृजेंद्र ने कहा कि जब रोजाना इतनी पैदल यात्रा होती है और लगातार पसीना निकलता है, तो फिटनेस लेवल अपने आप बेहतर हो जाता है। हमारे जो साथी हैं, वे शुरुआत में दो-चार दिन दुखी थे, क्योंकि शुरुआत में 22-23 किलोमीटर चलना होता था। उस समय गर्मी भी दिन में अच्छी थी। अब तो सभी को मजा आने लग गया। अब तो एकाध दिन का ब्रेक लेते हैं तो कहते हैं कि अब यही समझ नहीं आता कि सुबह उठकर करना क्या है। हां, वजन तो कम नहीं हुआ। लेकिन बेल्ट सरक गई है। अंग्रेजी में कहते हैं कि आई ऐम लूजिंग इंचेज बट नॉट वेट। हम फिट हैं। 7 महीने बाद तो हम लोहे के हुए मिलेंगे। चुनाव आयोग कुछ बड़ा छिपाने की कोशिश कर रहा
बृजेंद्र सिंह ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पिछले कुछ महीने में जो तथ्य सामने रखे हैं, वे चुनाव आयोग के तथ्यों के आधार पर रखे हैं। चुनाव आयोग किसी बात का जवाब नहीं देता। चुनाव आयोग का जो रवैया है, उससे मैं आश्वस्त हो गया कि कुछ ना कुछ बड़े स्तर पर गड़बड़ चल रही है। उससे लगता है कि चुनाव आयोग कुछ बड़ा है, जिसे छुपाने की कोशिश कर रहा है। उचाना में 32 वोट से चुनाव हारे बृजेंद्र सिंह
बृजेंद्र सिंह ने अक्टूबर 2024 में कांग्रेस के टिकट पर जींद के उचाना हलके से विधानसभा चुनाव लड़ा। यह उनकी पैतृक सीट मानी जाती है, क्योंकि उनके पिता बीरेंद्र सिंह और मां प्रेमलता भी यहां से विधायक रहे हैं। बृजेंद्र सिंह की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन आखिर में भाजपा के देवेंद्र अत्री से 32 वोट से चुनाव हार गए। बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी, उनकी याचिका लंबित है। पत्नी व बच्चों की सियासी एंट्री नहीं
बृजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी भी कई बार यात्रा में शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में सियासी हलकों में चर्चा थी कि उनकी भी राजनीति में एंट्री हो सकती है। इसे बृजेंद्र सिंह ने नकारा है। पूर्व सांसद ने कहा कि वह मेरा हौसला बढ़ाने के लिए आ जाते हैं। मेरी पत्नी कामकाजी महिला हैं। बच्चे पढ़ाई में लगे हुए हैं। ऐसा नहीं है कि वे यात्रा में निरंतर चल रहे हों। हां बीच-बीच में कभी-कभार आ जाते हैं, अपने पति व अपने पिता का हौसला बढ़ाने।

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