पॉक्सो केस में समझौते का दबाव बनाने को बच्ची का आपत्तिजनक वीडियो वायरल किया

भास्कर न्यूज |लुधियाना कूमकलां थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची से जुड़ी आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पहले से दर्ज पॉक्सो केस में समझौते का दबाव बनाने के लिए आरोपी पक्ष ने बच्ची की वीडियो क्लिप जानबूझकर व्हाट्सऐप ग्रुप में शेयर की। पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया कि 21 मार्च 2025 को थाना कूमकलां में आरोपी सुखविंदर सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत केस दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने नाबालिग के साथ गलत हरकतें की थीं। केस दर्ज होने के बाद से आरोपी का परिवार शिकायतकर्ता को लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहा था। अब आरोप है कि 10 फरवरी को आरोपी के भाई ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में बच्ची की आपत्तिजनक वीडियो क्लिप डालकर उसे वायरल कर दिया, ताकि पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाया जा सके। इस घटना के बाद परिवार की सामाजिक बदनामी हुई और मानसिक रूप से भी उन्हें प्रताड़ित किया गया। शिकायत के आधार पर थाना कूमकलां पुलिस ने आरोपी मुंदर सिंह निवासी हैदर नगर के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67-बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अभी तक वह पकड़ में नहीं आया है। मामले की जांच कर रहे अधिकारी परमदीप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं और तकनीकी जांच की जा रही है। पहले से दर्ज पॉक्सो केस में समझौते का दबाव बनाना और फिर पीड़िता की आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करना, कानून की नजर में दो अलग-अलग और गंभीर अपराध हैं। ऐसे मामलों में आरोपी को पुरानी सजा के साथ नई सजा अलग से भुगतनी पड़ सकती है। अगर नाबालिग से अश्लील हरकत का आरोप साबित होता है तो आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत 3 से 7 साल तक की सजा या गंभीर मामलों में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा जुर्माने का प्रावधान भी है। केस दर्ज होने के बावजूद पीड़ित परिवार को समझौते के लिए धमकाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है। इस अपराध में आरोपी को 2 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है। यदि धमकी जान से मारने की दी गई हो तो सजा 7 साल तक बढ़ सकती है। सबसे गंभीर अपराध नाबालिग की आपत्तिजनक वीडियो क्लिप वायरल करना माना जा रहा है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-बी के तहत दंडनीय है। पहली बार दोषी पाए जाने पर आरोपी को 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपए तक जुर्माने की सजा हो सकती है। दोबारा अपराध की स्थिति में सजा 7 साल तक बढ़ जाती है। वीडियो वायरल कर पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाना सिर्फ आईटी एक्ट का अपराध नहीं है, बल्कि इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना और मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में भी गिना जाएगा। इस पर साजिश और प्रताड़ना से जुड़ी अतिरिक्त धाराएं भी लग सकती हैं, जिनमें 1 से 3 साल तक की अलग सजा हो सकती है। – नवजोत सिंह, सीनियर एडवोकेट

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