फिर चर्चा में विवादित मनीमाजरा प्रोजेक्ट:मेयर की बनाई कमेटी ने माना- दोबारा बनेगा जॉनिंग प्लान, हाउस बैठक में लाई जाएंगी प्रोसिडिंग

मनीमाजरा का विवादित हाउसिंग प्रोजेक्ट फिर से चर्चा में आने वाला है। दो माह बाद इसे दोबारा 28 नवंबर 2025 को होने वाली हाउस की बैठक में लाया जा रहा है। हाउस द्वारा नकार दिए जाने के बाद इस प्रोजेक्ट की कमियां दूरी करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की बैठकों में सामने आया है कि इसमें कुछ कमियां थीं, जिन्हें पूरा किया जाएगा। यह सामने आया है कि मनीमाजरा की उक्त पॉकेट नंबर 6 में एक एकड़ जगह पर अवैध कब्जा भी है। जिस कारण जगह का आकार भी बदल गया है। अब मनीमाजरा की उक्त 16.50 एकड़ जमीन की एक साथ जॉनिंग की जाएगी। जबकि पहले 7.7 एकड़ जमीन का जॉनिंग प्लान बनाया गया था। नगर निगम की उक्त कमेटी भी विवादों में रही है और इससे विरोधी पक्ष के पार्षद इस्तीफा तक दे चुके हैं। नवंबर में हुई आखिरी मीटिंग में दिए अतिक्रमण हटाने के आदेश कमेटी की 19 नवंबर को हुई बैठक में एक्सईएन अजय गर्ग ने पॉकेट 6 की डिमार्केशन रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि कुल 16.50 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जिसमें लगभग 1 एकड़ हिस्सा अतिक्रमण में है। कमेटी ने फैसला लिया कि पूरी जमीन को एक यूनिट के रूप में यूटी के चीफ आर्किटेक्ट के पास जॉनिंग के लिए भेजा जाएगा। आर्किटेक्ट विंग एमसीसी को इस संबंध में तुरंत कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने के आदेश इंजीनियरिंग विंग को पॉकेट 6 से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी ने कहा कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाए। जॉनिंग आने के बाद जनरल हाउस में रखा जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जमीन की नीलामी तब ही होगी, जब पॉकेट 6 में मौजूद पूरा अतिक्रमण हट जाएगा। 1990 में अधिग्रहण पूरा, तीनों आपत्तियां खारिज की गईं बैठक में मनीमाजरा जट्टा सभा, एक सामाजिक कार्यकर्ता और पुराने मुस्लिम कब्रिस्तान की सुरक्षा को लेकर आई तीनों शिकायतों पर भी चर्चा हुई। कमेटी ने पाया कि यह जमीन साल 1990 में अधिगृहीत की जा चुकी है और अधिग्रहण के समय सभी औपचारिकताएं पूरी थीं। इसलिए तीनों प्रतिनिधित्व को निराधार बताते हुए फाइल कर दिया गया है। क्या है मनीमाजरा प्रोजेक्ट?
मनीमाजरा में पॉकेट नंबर 6 में निगम की कुल 33.55 एकड़ जमीन है, जिसमें से 7.7 एकड़ रेजिडेंशियल एरिया के लिए 5 प्लॉट है। इनके अलावा स्कूल, कॉमर्शियल एरिया, संत निरंकारी भवन, कस्तूरबा, रैन बसरा, ओपन ग्रीन एरिया और कुछ रिजर्व लैंड है। नगर निगम के अधिकारी इस प्रापर्टी को आक्शन कर इससे पैसा कमाना चाहते हैं। जिससे 786 करोड़ रुपए आने हैं। मगर विरोधी पार्षदों ने इसमें खामियां बताकर इस पर रोक लगाने की मांग की थी। यही नहीं हाउस की बैठक में इसके लिए दस करोड़ रुपए सड़कें, सीवरेज और पीने लायक पानी की पाइप डालने के लिए दस करोड़ रुपए को भी मंजूरी दे चुकी है। बनाए गए प्लान के तहत बिल्डिंग की ऊंचाई 72 फुट तय की गई है और इसे लेकर भी पार्षदों द्वारा इसे भी गलत बताया जा रहा है। कमेटी बनते ही चार पार्षदों ने दिया था इस्तीफा
मेयर हरप्रीत कौर बबला की तरफ से तीन अक्तूबर को आठ सदस्य कमेटी का गठन किया गया था। जिसमें दो पार्षद आम आदमी पार्टी, दो भारतीय जनता पार्टी, दो कांग्रेस और दो मनोनीत पार्षदों को लिया गया था।
मगर इनमें से विरोधी पक्ष के चारों पार्षदों ने अगले ही दिन यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया गया उन्हें गलत कार्य में भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे वह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। वह इस प्रोजेक्ट का कभी हिस्सा नहीं बनेंगे। प्रोजेक्ट गड़बडिय़ों के भरा, जॉनिंग प्लान आएगा तब पता चलेगा ओर कितनी गड़बडिय़ां कीं
नगर निगम कीं डिप्टी मेयर अरुणा मेहता का कहना है कि पहले ही इस प्रोजेक्ट को चोरी छिपे हाउस में लाया गया था। मगर इस ढेरों गड़बडिय़ां थीं, इस लिए इसका विरोध हुआ। कमेटी बनाई गई, जिसमें से पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था। मेयर की तरफ से यह प्रोजेक्ट लाया गया था और उनके ही पार्षदों की कमेटी ने मीटिंगें की हैं। इस लिए इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। इस लिए हम जॉनिंग प्लान आने और पूरे प्रोजेक्ट के हाउस में आने पर ही इन पर विश्वास किया जा सकता है।

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