शनिवार को सेक्टर-17 हयात सेंट्रिक में चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की ओर से सीएलएस लिटराटी स्प्रिंग लिटफेस्ट हुआ। शुरुआत सीएलएस की फाउंडर व फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. सुमिता मिश्रा की स्पीच से हुई। उन्होंने कहा- एल्गोरिदम और एआई के इस दौर में भी साहित्य हमें याद दिलाता है कि हमारे मन को केवल डेटा तक सीमित नहीं किया जा सकता। फेस्ट में 11 सेशन हुए। बुक बज़ में मुकुल कुमार की किताब कथार्सिस – ए सिम्फनी ऑफ साइज़ का विमोचन हुआ। गीत चतुर्वेदी ने कविता-कहानियों व उपन्यास पर बात की। क्राफ्ट एंड क्रिएटिविटी इन द एज ऑफ एआई में विक्टर घोष और अफान येस्वी ने बात की। आईपीएस अधिकारी और लेखक अर्श वर्मा और सोनिया चौहान ने डॉ. जैस्मीन आनंद के साथ चर्चा की। समापन महफ़िल-ए-सुखन के साथ हुआ। माधव कौशिक, कस्तूरिका मिश्रा, सविता सिंह, मुकुल कुमार और बुब्बू तीर ने पंजाबी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं में कविता पाठ किया। आराधिका शर्मा और शीला चमन नवनीत ग्रेवाल और रंजीत पवार पंजाब की महाराजा सदा कौर बनती एक शब्द गलत बोलने पर तीन हफ्ता सस्पेंड रहते थे फरगाना में मां और उनके दोस्त… _photocaption_बंगाल के चुनाव तक तेल की महंगाई सरकार रोकेगी *photocaption* रंजीत पवार की किताब – द वेल एंड द स्वॉर्ड – शेर-ए-पंजाब के साम्राज्य की नींव में महिलाओं का योगदान। साथ में नवनीत ग्रेवाल ने चर्चा की। सेशन में रंजीत पवार ने सदा कौर को लेकर बताया – वह किंगमेकर थीं। बहुत कम उम्र में उन्होंने पहले पति, फिर ससुर को खोया। 22 साल की उम्र में कन्हैया मिसल की मिसलदार बनीं। किताब के लिए कई किताबें पढ़ीं, लाहौर जाकर रिसर्च की। किताब दूरदर्शन डायरीज – द गोल्डन एरा ऑफ इंडियन टेलीविजन पर चर्चा भी हुई। जब माइक में आवाज़ ठीक से नहीं आई तो वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज एंकर शीला चमन ने अपनी एक्सपर्टीज़ का इस्तेमाल करते हुए बेस टोन को सेट करवाया। दोबारा वॉयस ब्रेक हुई तो कहा- रुकावट के लिए खेद है… इस पर हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही क्योंकि सभी को दूरदर्शन के पुराने दिन याद आ गए। उन्होंने बताया- दूरदर्शन ने बेशक पैसे कम दिए, लेकिन जो नाम दिया उसकी हमेशा आभारी रहूंगी। 9 बजे की खबरों के लिए 5 बजे न्यूज़रूम पहुंच जाते थे। पांच घंटे की मेहनत के बदले में 150 रुपए मिलते थे। अगर किसी शब्द का उच्चारण गलत हो जाता था तो तीन हफ्ते के लिए सस्पेंड कर देते थे। मेकअप इतना भारी होता था कि कैमरा ऑन होते ही लगता था हम बेक हो रहे हैं। नारियल के तेल से मेकअप उतारते थे। जब कलर टीवी आया तो थोड़ा सुकून मिला क्योंकि हम हल्के रंग के कपड़े पहन पा रहे थे और लाइट मेकअप कर सकते थे। द गर्ल फ्रॉम फरगाना – सीक्रेट्स ऑफ माई मदर्स चाइनीज़ टी सेट के बारे में लेखक जोनाथन गिल हैरिस ने बात की। उनसे बात कर रही थीं डॉ. उर्वी शर्मा । जोनाथन गिल हैरिस ने कहा – मेरी मां पोलिश यहूदी थी, मगर अन्य पोलिश लोगों की तरह ही वह पोलैंड में रह नहीं पाई। रूस की तरफ से उन्हें साइबेरिया डिपोर्ट कर दिया गया। उसके बाद फरगाना भेजा गया। फरगाना का भारतीय सबकॉन्टिनेंट से गहरा रिश्ता है। मेरी मां फरगाना वैली में 6 साल रही। अपनी दोस्त कमर खान के साथ वे गरीबी में मिट्टी की झोपड़ी में रही। मुझे 60 साल बाद उनके दोस्त के बारे में तब पता लगा जब मां अपनी याद्दाश्त भूलने लगी तो एक दिन उन्होंने अपनी दोस्ती के बारे में बताया। किताब का शीर्षक – द गर्ल फ्रॉम फरगाना मेरी मां को और साथ में उनकी दोस्त को समर्पित है। मनराज ग्रेवाल मनीष तिवारी से पूछा-क्या देश युद्ध की इस स्थिति में फ्यूल रिज़र्व को लेकर तैयार है? जवाब में मनीष ने बताया – यह देश भारतीयों से है। देश की स्थिति को लेकर सरकार को बात करनी चाहिए। यह जानने का जनता का हक भी है। जहां तक मेरी जानकारी है, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीज़ल के रेट बढ़ाए हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश ज़रूर रहेगी कि जब तक पश्चिम बंगाल के चुनाव का दूसरा चरण पूरा नहीं हो जाता, तब तक कीमतों को सामान्य रखने की कोशिश की जाएगी। लेकिन, जो आज की हालत उसे लेकर सरकार को साफ-साफ मुल्क को अपनी रणनीतियों के बारे में बताना चाहिए। एनर्जी केवल भारत के लिए संसाधन ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है। 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत पर किताब लाल सलाम स्मृति ईरानी की पहली किताब है। इसे लेकर बोलीं – लाल सलाम को मैंने अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) में हुए नक्सली हमले के बाद लिखा, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवानों ने शहादत दी थी। नायक विक्रम प्रताप सिंह हैं, जो युवा अधिकारी हैं। जब विक्रम के करीबी दोस्तों और साथ काम करने वाले नक्सली हमले में मारे जाते हैं तो आगे भ्रष्टाचार, राजनीति और संघर्ष की कहानी शुरू होती है।