फोकल पॉइंट में लगा पीजोमीटर, बताएगा ग्राउंड वाटर कितना बढ़ा

भास्कर न्यूज | जालंधर सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथारिटी ने पहली बार जालंधर शहर के भीतर नेशनल हाईवे के किनारे 70 मीटर की गहराई पर पीजोमीटर स्थापित किया है। यह आधुनिक तकनीक भूजल स्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव को मापने के लिए उपयोग में लाई जाती है। यह उपकरण फोकल प्वाइंट स्थित शहीद बेअंत सिंह पार्क में नवंबर 2025 में लगाया गया। अब वर्षा ऋतु के दौरान जमीन में रिसने वाले पानी के बाद भूजल स्तर में कितनी वृद्धि होती है, इसका सटीक आंकलन संभव हो सकेगा। किसी भी शहर का विकास वहां उपलब्ध जल संसाधनों पर निर्भर करता है, इसलिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैसे कार्य करता है पीजोमीटर? पीजोमीटर का सिद्धांत सरल है। इसे समझने के लिए पानी से भरे गिलास में डाली गई नली का उदाहरण लिया जा सकता है, जिसमें पानी एक निश्चित स्तर तक ऊपर आता है। सबसे पहले जमीन में संकरा छेद कर जलस्तर तक पाइप डाला जाता है। इस पाइप के निचले हिस्से में दाब मापक यंत्र लगाए जाते हैं, जो पानी के दबाव को मापते हैं। जैसे-जैसे भूजल स्तर बढ़ता है, दबाव में परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन विद्युत संकेत में बदलकर आंकड़ों के रूप में नियंत्रण कक्ष तक भेजा जाता है। आधुनिक उपकरणों में संचार प्रणाली लगी होती है, जो नियमित अंतराल पर जानकारी संबंधित कार्यालय तक पहुंचाती है। भूजल की स्थिति चिंताजनक जालंधर में हर वर्ष औसतन 0.5 से 0.7 मीटर तक भूजल स्तर गिर रहा है। कई क्षेत्रों में पानी 30 से 40 मीटर (लगभग 100 से 130 फीट) की गहराई से भी नीचे पहुंच चुका है। गर्मियों के मौसम में पुराने बोरवेल काम करना बंद कर देते हैं, जिससे लोगों को अधिक गहराई वाले पंप लगवाने पड़ते हैं। यह स्थिति जल संकट की ओर संकेत करती है। पीजोमीटर क्यों आवश्यक है? त्वरित निगरानी: अब जलस्तर की जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है। अत्यधिक दोहन की पहचान: किसी क्षेत्र में अधिक पानी निकाले जाने पर स्तर में गिरावट तुरंत दर्ज होती है। योजना निर्माण में सहायक: वर्षा जल संचयन और सतही जल परियोजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन करने में आसानी।

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