पंजाब के मोहाली में बच्ची के अपहरण और तस्करी के एक गंभीर मामले में आरोपी गायत्री शर्मा उर्फ सोनिया व राज कुमार की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी को रिहा किया गया तो वह फरार हो सकती है, गवाहों को प्रभावित कर सकती है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले की मेरिट पर असर नहीं डालेगा। मामला दिसंबर 2023 का है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सुरिंदर कौर और दर्शना रानी नाम की दो महिलाएं बच्चों का अपहरण कर उन्हें भीख मंगवाने के लिए बेच रही हैं। 12 दिसंबर 2023 को बालोंगी ब्रिज के पास पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस ने इन दोनों को एक छोटी बच्ची के साथ गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया संगठित विरोध जांच के दौरान, दर्शना रानी ने खुलासा किया कि बच्ची उन्हें गुरविंदर कौर उर्फ गुरलीन कौर ने दी थी। आगे की जांच में परमजीत सिंह के बयान से गायत्री शर्मा का नाम सामने आया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, गायत्री शर्मा उर्फ सोनिया (उम्र करीब 45 वर्ष, पवन शर्मा की पत्नी, निवासी हाउस नंबर एन1/3, फेज 1, बुद्ध विहार, नई दिल्ली) को दीपिका उर्फ दीपा, राज कुमार और अन्य के साथ मिलकर बच्ची को 3,60,000 रुपये में बेचने का आरोपी बनाया गया। पुलिस का दावा है कि ये सभी एक संगठित गिरोह के सदस्य हैं, जो शिशुओं की तस्करी में लिप्त हैं। इस दौरान भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370(4) (मानव तस्करी), 363 (अपहरण), 363ए (बच्चों का अपहरण और भिखारी बनाना) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत यह केस दर्ज हुआ। अपराध गंभीर, आरोप स्पष्ट है अदालत में आरोपी की ओर से वकील ने दलील दी कि मामला झूठा और बेबुनियाद है। आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और उसका जेल में रखना बेकार है। वहीं, राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक हर्षदीप ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध जघन्य है और आरोपी पर स्पष्ट आरोप हैं। हालांकि कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती। अगर आरोपी को रिहा किया गया तो वह फरार हो सकती है, गवाहों को प्रभावित कर सकती है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले की मेरिट पर असर नहीं डालेगा।