चंडीगढ़ में ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए पटियाला की राव के क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट बनाने की योजना है। चंडीगढ़ अन्य शहरों से ग्रीन कवर में काफी आगे है, लेकिन अब यहां ज्यादा जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए नयागांव से तोगां तक करीब 3 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में लगभग 70 हेक्टेयर जमीन को रिजर्व फॉरेस्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। प्रशासन की कमेटी से इस पर सहमति मिल चुकी है। योजना है कि इसी मॉनसून सीजन में यहां बांस की प्लांटेशन शुरू करके इसे ‘बैंबू वैली’ की तरह विकसित किया जाए। दोनों तरफ बड़े स्तर पर बांस लगाए जाएंगे, जिससे धनास, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा जस्सू इलाकों में बड़ा ग्रीन पैच बनेगा। पिछले 6 महीनों से यह रिजर्व फॉरेस्ट नोटिफाई नहीं हो पाया है, क्योंकि रेवेन्यू रिकॉर्ड में उलझन है। पटियाला की राव में चंडीगढ़ की तरफ एक किनारे पर कोई विवाद नहीं। दूसरे किनारे पर चार गांव हैं- खुड्डा जस्सू, खुड्डा लाहौरा, धनास और डड्डूमाजरा। यहां जमीन सरकारी विभाग की है या किसानों के नाम पर, यह प्रशासन को स्पष्ट नहीं हुआ है। कई जगह नदी का क्षेत्र खुला है, इसलिए नोटिफिकेशन से पहले प्राइवेट लैंड का रेवेन्यू रिकॉर्ड क्लियर करना जरूरी है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट से जमीन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। इसलिए जरूरी है रिजर्व फॉरेस्ट अनक्लासिफाइड फॉरेस्ट को रिजर्व फॉरेस्ट में बदलने से कानूनी संरक्षण मजबूत होगा। सरकार/प्रशासन का पूरा कंट्रोल, सख्त नियम, प्रतिबंधित गतिविधियां, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर सुरक्षा होगा। अनक्लासिफाइड फॉरेस्ट में लोग आते-जाते रहते हैं, संरक्षण मुश्किल होता है। रिजर्व फॉरेस्ट घोषित होने से यहां नेपली-कांसल के जंगलों जैसी पाबंदियां लागू होंगी। } 70 हेक्टेयर का बड़ा ग्रीन पैच बनेगा। } चंडीगढ़ की ग्रीनरी बढ़ेगी। चंडीगढ़ का मौजूदा ग्रीन कवर } ट्री कवर: 21.18 वर्ग किमी. (अन्य यूटी/राज्यों से आगे) } फॉरेस्ट कवर: 10 साल में 7.74 वर्ग किमी बढ़ा } ट्री कवर: 10 साल में 11.18 वर्ग किमी बढ़ा } रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया में फॉरेस्ट कवर: 8.94 वर्ग किमी। इस तरफ कोई विवाद नहीं इस एरिया की जमीन किसकी यह स्पष्ट नहीं। 4 गांवों की जमीन, वन विभाग ने कहा- रेवेन्यू डिपार्टमेंट जमीन की स्थिित स्पष्ट करे