31 साल बाद नितिन नवीन परिवार का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से नाता टूट गया। 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद 30 मार्च को उन्होंने स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे के बाद अब ये सीट खाली हो गई है। 6 महीने के भीतर यहां चुनाव होना तय है। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद कई बड़े नेता इस सीट पर दावेदारी में जुट गए हैं। मौजूदा सांसद से पूर्व विधायक तक, अपने परिवार के लिए जुगाड़ में जुट गए हैं। भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए बांकीपुर सीट से उम्मीदवार के लिए सबसे आगे किसका नाम चल रहा है। संजय मयूख- नितिन और नवीन दोनों के साथ काम का अनुभव नितिन नवीन की जगह बांकीपुर सीट के लिए सबसे प्रबल दावेदारों में संजय मयूख का नाम है। बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी मयूख अमित शाह की कोर टीम के मेंबर हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भी भरोसेमंद माने जाते हैं। 1995 में नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा इस सीट से पहली बार विधायक बने थे। उस दौरान से ही संजय मयूख इस सीट पर उनके साथ एक्टिव रहे। बाद के दिनों में नितिन नवीन यहां से जीते तो इनके साथ भी अच्छे रिश्ते रहे। फिलहाल मयूख 2016 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। जून 2026 में इनकी सदस्यता विधान परिषद से समाप्त हो रही है। बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी इन्हें तीसरी बार विधान परिषद भेजने की जगह विधानसभा चुनाव मैदान में उतारेगी। इसके साथ ही कायस्थ कोटे से मयूख को नई सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद से ये कोटा खाली चल रहा है। 1990 में पार्टी से जुड़े, राज्य से राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का मीडिया संभाला छपरा के अमनौर के रहने वाले संजय मयूख ने 1990 में BJP जॉइन की। 1995 में बिहार बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। इसके बाद प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किए गए। 2013 में इन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया टीम में जगह दी गई। मयूख को 2016 में पहली बार विधानसभा के कोटे से विधान परिषद भेजा गया। 2022 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी ने दोबारा इन्हें विधान परिषद में रिपीट किया। संजय मयूख 2020 के बाद से लगातार भाजपा राष्ट्रीय मीडिया के सह प्रभारी हैं। चुनाव लड़ने पर क्या कहा? संजय मयूख फिलहाल बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। हमने कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। 2. अजय आलोक- नीतीश के करीबी थे, BJP का नेशनल चेहरा बने नेशनल मीडिया में भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले अजय आलोक को भी बांकीपुर में नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। कायस्थ जाति से आने वाले डॉ. आलोक के पिता पद्म श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा बड़े डॉक्टर हैं। पटना में इनकी एक अलग छवि है। 2003 में अपना पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले आलोक ने 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा सीट से LJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2010 के चुनाव में भी इन्होंने इसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में जदयू जॉइन किया। पार्टी के प्रवक्ता और महासचिव बने। 2023 में जदयू से इस्तीफा देकर BJP का दामन थामा। फिलहाल BJP के राष्ट्रीय मीडिया का मुखर चेहरा हैं। चुनाव लड़ने पर क्या कहा? ‘फिलहाल मेरा पहला फोकस बंगाल चुनाव है। पटना चुनाव के बारे में फिलहाल मैं कुछ नहीं बोल सकता। ये पार्टी का निर्णय है। हम फिलहाल रेस में कहीं नहीं है।’ 3. रणवीर नंदन- जदयू MLC से धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष बने भाजपा नेता रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इनके नाम की भी चर्चा बांकीपुर सीट के लिए है। रणवीर शिक्षित और सौम्य क्षवि के नेता माने जाते हैं। कायस्थ जाति से आते हैं। पटना के ही रहने वाले हैं। प्रो. रणवीर नंदन कभी नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते थे। 2014 में नीतीश ने इन्हें पहली बार अपनी पार्टी के कोटे से विधान परिषद भेजा था। 2020 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की तरफ से इन्हें रिपीट नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था। चुनाव लड़ने पर क्या कहा? ‘मैं चुनाव लड़ने का इच्छुक हूं। चुनाव लड़ना चाहता हूं। पार्टी अगर टिकट देगी तो मैं चुनाव लड़ने के तैयार हूं। लेकिन, ये निर्णय पार्टी नेतृत्व की तरफ से लिया जाएगा।’ पूर्व विधायक के बेटे भी टिकट के लिए लगा रहे चक्कर बांकीपुर से अपनी दावेदारी के लिए कई नेता पुत्र के भी नाम आ रहे हैं, जो टिकट के लिए नेतृत्व का चक्कर लगा रहे हैं। इनमें दो नाम सबसे प्रमुख है। कुम्हरार के पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा टिकट की जुगत में जुटे हुए हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान अरुण सिन्हा को कुम्हरार सीट से बेटकिट कर दिया गया था। तब इस बात का भारी विरोध हुआ था। आशीष सिन्हा पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता भी उनकी पैरवी में लगे हुए हैं। बांकीपुर में कायस्थ की आबादी ज्यादा, दूसरी जाति के नेता को टिकट मिलना मुश्किल पटना के शहरी इलाकों को कायस्थों का गढ़ माना जाता है। यही कारण है कि पिछले 6 चुनाव से ज्यादा समय से पटना साहिब लोकसभा सीट से कायस्थ नेता जीतते आ रहे हैं। पहले शुत्रुघ्न सिन्हा अब रविशंकर प्रसाद यहां से चुनाव जीत रहे हैं। यहां की दो विधानसभा सीटों कुम्हरार और बांकीपुर में ये निर्णायक भूमिका में हैं। चुनाव की स्टडी करने वाली संस्था चाणक्या के मुताबिक बांकीपुर में कायस्थ वोटर्स की आबादी 13 प्रतिशत से भी ज्यादा है। बीजेपी पहले ही विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से कायस्थ का टिकट काट कर गुप्ता का प्रयोग कर चुकी है। भले बीजेपी यहां से चुनाव जीतने में सफल रही, लेकिन चुनाव के दौरान खूब नाराजगी जाहिर की गई थी। अब पटना जिले में कुम्हरार एकमात्र सीट है, जहां कायस्थ जाति के विधायक हैं। 1995 से नवीन परिवार बांकीपुर में नहीं हारा है 1995 से इस सीट पर नितिन नवीन परिवार का कब्जा था। 2008 से पहले ये सीट पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र कही जाती थी। 1995 में इस सीट पर पहली बार नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा चुनाव जीते थे। 1995-2005 तक हुए चार चुनाव में यहां से जीतते रहे। 2006 में उनके आकस्मिक निधन के बाद नितिन नवीन इस पर उपचुनाव लड़े और इसके बाद 2006 तक हुए हर चुनाव में वे जीतते रहे। आज तक एक भी चुनाव वे यहां से नहीं हारे।