बाघा पुराना में समिति चुनाव अब नए सिरे से होगा। 28 मार्च को दोबारा से चुनाव करवाने के आदेश दिए गए हैं। इस दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की एक वकील को ऑब्जर्वर तैनात किया गया है। इस दौरान चुनाव की सारी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। वहीं, इस दौरान बाघापुराना के एसडीएम और डीसी के बीच चल रहे विवाद को लेकर भी सुनवाई हुई। इस दौरान एसडीएम भवनदीप पेश हुए। उन्हें अदालत ने कहा कि आपका पत्र लीक कैसे हो गया। आपको इस मामले को चीफ सेक्रेटरी के पास लेकर जाना चाहिए। पत्र पब्लिक डोमेन में आने पर उठे कई सवाल अदालत ने सुनवाई के दौरान एसडीएम से पहले पूछा कि आपका पत्र लीक कैसे हो गया। फिर उन्होंने एसडीएम को समझाते हुए कहा कि जिस तरह अब तक आपने किया, ऐसा नहीं होना चाहिए था। आपने चीफ सेक्रेटरी को पत्र भी लिखा था। अगर कोई दिक्कत आ रही थी, तो बात बंद दरवाजों में हो सकती थी। जिस तरह यह पत्र पब्लिक डोमेन में आया है, उससे कई सवाल खड़े हुए हैं। आप एक जिम्मेदार अधिकारी हो। इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए। अब जानिए सुनवाई क्या क्या हुआ उचित मंच का सहारा क्यों नहीं लिया सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि SDM का शिकायत पत्र पहले ही फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो चुका है और इस तरह के दस्तावेज़ों के दुरुपयोग पर चिंता जताई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि एक सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद SDM ने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए चंडीगढ़ में उचित मंच का सहारा क्यों नहीं लिया। 9 साल का अनुभव फिर ऐसी स्थिति कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी के पास करीब 9 साल का अनुभव है और एक PCS अधिकारी होने के नाते उन्हें यह पता होना चाहिए कि शिकायत कहां और कैसे दर्ज करनी है। इस पर SDM ने जवाब दिया कि उस समय वे “ठीक मानसिक स्थिति” में नहीं थे। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि SDM का पत्र किसी तीसरे व्यक्ति के जरिए कोर्ट तक पहुंचा, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने सलाह दी कि ऐसी शिकायतें मुख्य सचिव के समक्ष पेश की जानी चाहिए थीं। चुनाव करवाने के लिए रहेंगे यह नियम वहीं, 28 मार्च 2026 को होने वाले बाघा पुराना पंचायत समिति के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन चुनावों को लेकर कोर्ट ने विस्तृत निर्देश दिए। चुनाव DC की निगरानी में होंगे और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने वकील जसजत कौर को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। ऑब्जर्वर की फीस पिटिशनर देगा। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि ऑब्जर्वर को इनोवा गाड़ी से बाघा पुराना ले जाया जाए और पंजाब पुलिस द्वारा पूरी सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। ऑब्जर्वर चुनाव के बाद अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा। एसडीएम ने चिट्ठी में ये बातें लिखीं… चुनाव के दौरान बिगड़ी स्थिति: एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया ने चीफ सेक्रेटरी को लिखी चिट्ठी में लिखा- 17 मार्च को पंचायत समिति के चेयरपर्सन और वाइस-चेयरपर्सन के चुनाव हुए। उस दिन मोगा के बाघापुराना में चुनाव स्थल पर व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हुई, जिससे चुनाव पूरा नहीं हो सका। मीटिंग में बुलाकर, फोन कॉल कर परेशान किया गया: उन्होंने लिखा- यह बात समय पर मोगा के DC सागर सेतिया के ध्यान में लाई गई। उस घटना के बाद मुझे DC ने लगातार और बेवजह परेशान किया। मुझे बार-बार मीटिंग के लिए बुलाया, फोन कॉल कर धमकियां दी गईं, जिससे डर का माहौल बना। छुट्टी वाले दिन भी मुझे फोन कर मानसिक रूप से परेशान किया गया। इससे परेशान होकर मुझे फोन भी बंद करना पड़ा। एक उम्मीदवार के पक्ष में नतीजे घोषित करने को मजबूर किया: चिट्ठी में लिखा है- किसी और के कहने पर मुझे तनाव में डाला गया और एक खास उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव के नतीजे घोषित करने के लिए मजबूर किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव और प्रशासनिक सिद्धांतों के खिलाफ था। जान से मारने की धमकियां मिलीं: उन्होंने लिखा- मुझे अलग-अलग नंबरों से फोन कर जान से मारने की धमकियां दी गईं। जांच के दौरान जब भी जरूरत होगी, मैं इस बारे में ठोस सबूत पेश करूंगा। इनके चलते मुझे बहुत ज्यादा मेंटली स्ट्रेस हुआ है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मुझे मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा को लेकर सोचना पड़ रहा है। चुनाव के दौरान हुआ था भारी हंगामा जानकारी के अनुसार बाघापुराना में 17 मार्च को ब्लॉक समिति के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन पद के चुनावों के दौरान भारी हंगामा हुआ। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें सुबह 9 बजे बुलाया गया और फिर एक कमरे में बंद कर दिया गया, ताकि वे वोटिंग में हिस्सा न ले सकें। जब बाहर मौजूद समर्थकों को इस बात का पता चला तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने दीवारें फांदीं, खिड़कियां तोड़ीं और परिसर के अंदर घुसने की कोशिश की, जिससे पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने परिसर के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया, जिससे स्थानीय आप (AAP) विधायक अमृतपाल सिंह सुखनंद और एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया अंदर ही फंस गए। बाद में भारी पुलिस बल ने उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। हंगामे के बीच ही AAP विधायक ने सोशल मीडिया पर अपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर दिया। जबकि, बाद में कोरम की कमी और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया को अधूरा घोषित कर दिया गया।
आरोपों पर DC ने ये बातें कहीं… मुझे 2 लाइन की जानकारी मिली थी मोगा के DC सागर सेतिया ने बाघापुराना के एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया के सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि एसडीएम पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाला। DC ने बताया कि उन्हें एसडीएम की ओर से केवल दो लाइनों का एक मैसेज मिला था। इसमें कहा गया था कि 17 मार्च को चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के पदों के लिए होने वाला चुनाव कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पूरा नहीं हो सका। DC ने कहा- उसी दिन मुझे कुछ ब्लॉक समिति सदस्यों की शिकायतें भी मिलीं। इनमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने से रोका गया और बीडीपीओ कार्यालय में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। ये आरोप एसडीएम के खिलाफ थे, इसलिए मैंने तुरंत मामले की जांच के आदेश दिए। 5 दिन बाद मुझे दोषी ठहराना समझ से परे हालिया घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए DC ने कहा, “चुनाव के 5 दिन बाद मुझे एसडीएम द्वारा लिखे गए एक कथित पत्र के बारे में पता चला। इस पत्र में मुझ पर धमकी और दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। मैं इन सभी आरोपों का पूरी तरह से खंडन करता हूं।” डीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि बाघापुराना ब्लॉक समिति चुनाव के संचालन में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा, “पूरी चुनाव प्रक्रिया के प्रभारी एसडीएम थे। ऐसे में घटना के कई दिन बाद मुझे दोषी ठहराना समझ से परे है।”